नवजात शिशु की देखभाल करना नए माता-पिता, खासकर मां के लिए, किसी चुनौती से कम नहीं होता। मां दिन-रात बच्चे की देखभाल में लगी रहती है और पूरी कोशिश करती है कि उसकी तरफ से कोई कमी न रह जाए। लेकिन इसके बावजूद कई बार बच्चा अचानक असहज हो जाता है या रोने लगता है। ऐसे में मां की स्थिति समझने के बजाय कई बार पति या परिवार के लोग उसी को दोष देने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज की ओपीडी में सामने आया। 9 दिन के एक नवजात को उसके माता-पिता पीलिया की जांच के लिए लेकर आए थे।
जांच के दौरान बच्चे के पिता ने अपनी पत्नी से ऐसी बात कह दी कि डॉक्टर नाराज हो गईं। उन्होंने सभी परिवारों से अपील करते हुए कहा, ‘प्लीज, ब्लेम गेम बंद कीजिए।’ आखिर पिता ने ऐसा क्या कहा और डॉक्टर ने इसे लेकर इतनी सख्त बात क्यों कही? आइए जानते हैं पूरी घटना।
पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज कहती हैं कि आज शाम ओपीडी में एक ऐसी घटना हुई, जिसके बारे में मुझे बात करनी ही है। मैं इसे बताने के लिए इंतजार नहीं कर सकती। दरअसल, 9 दिन के एक बच्चे को उसके माता-पिता पीलिया की जांच के लिए लेकर आए थे। मां बच्चे को घर पर फीड कराकर आई थी। उसे लगा था कि जांच जल्दी हो जाएगी और वह तुरंत घर लौट जाएगी। लेकिन तभी बच्चा रोने लगा। बच्चे ब्रेस्टफीड पर नहीं था, इसलिए उसे फॉर्मूला मिल्क देना था। हालांकि, मां फॉर्मूला मिल्क अपने साथ लेकर नहीं आई थी। बच्चे का रोना सुनकर अब किसी से सुना तो जाता नहीं है, तो बस तुनक कर बिल्कुल पिता बोले, ‘मैंने कहा था न, दूध साथ में लेकर चलाकर।’
यह केस शेयर करने के बाद एक्सपर्ट समझाती हैं कि नई मां को भी नहीं पता था कि बच्चे को अचानक भूख लग जाएगी या हॉस्पिटल में जांच में उम्मीद से ज्यादा समय लग जाएगा। बच्चे का रोना मां से भी नहीं देखा जा रहा है। वह आगे कहती हैं कि यह बहुत आम बात है। कई बार जब मां बच्चे को ब्रेस्टफीड कराने के लिए खुद को तैयार ही कर रही होती है, तब तक बच्चा रोने लगता है। ऐसे में आसपास के लोग तुरंत कहने लगते हैं, ‘रुलाओ मत, जल्दी फीड करा दो।’ डॉ. माधवी भारद्वाज का कहना है कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले मां को प्लीज सांस लेने दें।