विदेशी बहू ने पैर छुए तो देसी सास ने लगा लिया गले, भारतीय दामाद ने भी निकाला अपना खुद का जुगाड़, सीखें क्या होता है कल्चर अपनाना

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आजकल शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं रह गई हैं। अलग शहर, राज्य और यहां तक कि अलग देशों के लोगों के बीच शादी आम होती जा रही है। ऐसे रिश्तों में प्यार के साथ कल्चर, फैमिली की आदतें और ट्रेडिशन भी साथ आते हैं। जब दो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक बंधन में बंधते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती रस्मों और तौर-तरीकों को अपनाने की होती है। ऐसे में हर बात अपने तरीके से करवाने के बजाय थोड़ा समझना और एडजेस्ट करना रिश्ते को आसान बना सकता है। हाल ही में ऑथर और साइकोलॉजी एक्सपर्ट भावना रॉय ने अपने पॉडकास्ट की एक दिल छू लेने वाली कहानी शेयर की। ये कहानी उनके भाई आशीष और ऑस्ट्रेलियाई भाभी डॉनी की है। उन्होंने बताया अलग-अलग कल्चर से होते हुए भी दोनों ने कैसे खुद को संभाला और रिश्तों का असली मतलब सिखाया।
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भावना रॉय ने इंस्टाग्राम पर अपने भाई आशीष और ऑस्ट्रेलियाई भाभी डॉनी का दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि पश्चिमी कल्चर में सास-ससुर को नाम से पुकारा जाता है, लेकिन आशीष ने असहज होकर उन्हें 'टेरेंस अंकल' और 'सैली आंटी' कहकर एक प्यारा बीच का रास्ता निकाला। वहीं मुंबई आते ही विदेशी बहू डॉनी ने शादी से पहले ही भारतीय परंपरा का मान रखा, सासू मां के पैर छुए और एक पल में सबको अपना बना लिया। भावना का कहना है कि दो अलग संस्कृतियों को अपनाना किसी एक के झुकने का नाम नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और बीच का रास्ता निकालने की समझदारी है।
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आज की भागदौड़ भरी दुनिया में अलग-अलग देशों, धर्मों और संस्कृतियों के बीच शादियां तेजी से बढ़ रही हैं। पश्चिमी देशों में बातचीत काफी सीधी और अनौपचारिक होती है, जबकि एशियाई परिवारों में औपचारिकता और मर्यादा को सबसे ऊपर रखा जाता है। खासकर भारत में तो इसे प्रॉयरिटी दी जाती है। अक्सर कपल्स एक-दूसरे की मान्यताओं को समझने के बजाय अपनी बात थोपने की गलती कर बैठते हैं, जिससे रिश्तों में शुरुआती तनाव पैदा होता है।
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रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रिश्तों में 'मेरा तरीका' या 'तुम्हारा तरीका' की जिद हमेशा दूरियां बढ़ाती है। अपनी किसी भी परेशानी या असहजता के बारे में खुलकर और सम्मान के साथ बात करना सबसे अच्छा तरीका है। जब दोनों पार्टनर एक-दूसरे के रीति-रिवाजों को कम समझने के बजाय उनका सम्मान करते हैं, तो नई फैमिली में घुलना-मिलना आसान हो जाता है।​

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रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब कोई इंसान अपने पार्टनर के रीति-रिवाजों को खुशी से अपनाता है, तो इससे पता चलता है कि रिश्ते में प्यार और सम्मान है। पैर छूना या परिवार की किसी परंपरा को निभाना बड़ों के प्रति सम्मान दिखाने का एक तरीका है। जब कोई इंसान अपने पार्टनर की संस्कृति को दिल से अपनाता है, तो दोनों के बीच की दूरियां कम होने लगती हैं और रिश्ता और मजबूत बनता है।
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रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अलग-अलग कल्चर में शादी ]में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के ट्रेडिशन को जान सकते हैं, लेकिन हर चीज को नियम बनाने की जरूरत नहीं है। कुछ ट्रेडिशंस अपनाए जा सकते हैं, कुछ पर बात करके बदलाव किया जा सकता है और कुछ सिर्फ समझे भी जा सकते हैं। ऐसे में सवाल ये नहीं कि किसका कल्चर सही है, बल्कि ये है कि दोनों लोग एक-दूसरे को कितना स्पेस और रिस्पेक्ट देते हैं। अगर रिश्ते में बातचीत खुली हो, तो अलग कल्चर दूरी नहीं, एक-दूसरे की दुनिया समझने का मौका बन सकता है।