'सबको पता है पापा बिजनेस ट्रिप पर कहां जाते हैं और क्या करते हैं', मूवी का यह डायलॉग सुन डॉ. ने हर पेरेंट को दी सलाह

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बच्चे कभी-कभी ऐसी बातें बोल देते हैं, जो माता-पिता को बेहद कड़वी लगती हैं। कई बार माता-पिता इतने नाराज या दुखी हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि उनके बच्चे बदतमीज हो रहे हैं। लेकिन कुछ मामलों में बच्चे सिर्फ एक ऐसी हकीकत के बारे में बात कर रहे होते हैं, जिसे वे साफ-साफ देख और समझ रहे होते हैं, बस उसे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। और जब वे उसे कह देते हैं, तो माता-पिता अक्सर उसे बदतमीजी का लेबल दे देते हैं। इसी विषय को समझाने के लिए थेरेपिस्ट डॉक्टर र‍िरी त्रिवेदी ने फिल्म ‘द‍िल धड़कने दो’ के एक सीन का जिक्र किया है, जिसमें बेटे का किरदार निभा रहे रणवीर स‍िंह अपने पिता से कहते हैं, ‘आपके संस्कार क्या हैं? और सबको पता है कि पापा बिजनेस ट्रिप के नाम पर कहां जाते हैं और क्या करते हैं।’
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यह सीन दिखाने के बाद एक्सपर्ट कहती हैं कि उन्होंने हर पेरेंट को एक खास सलाह दी है। उनका कहना है कि माता-पिता को यह समझने की जरूरत है कि क्या बच्चा हमेशा बदतमीजी कर रहा होता है, या फिर वह सिर्फ उस सच पर प्रतिक्रिया दे रहा है, जिसका सामना हम स्वीकार करना नहीं चाहते। उन्‍होंने और क्‍या कहा, चल‍िए जानते हैं व‍िस्‍तार से।
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थेरेपिस्ट डॉक्टर र‍िरी त्रिवेदी ने फिल्म द‍िल धड़कने दो का एक सीन शेयर किया। इस सीन में मां का किरदार निभा रहीं शैफाली शाह अपने पति बने अन‍िल कपूर से बेटी बनी प्र‍ियंका चोपड़ा के बारे में कहती हैं, ‘ये लड़की तो मुझे समझ ही नहीं आती।’ यह सुनकर पिता के किरदार में अनिल कपूर कहते हैं, ‘अरे, नीलम अब वो संस्कार नहीं रहे, जो हमारे समय में थे। शादी बस एक तमाशा बन गई है। आज शादी की और कल तलाक।’ तभी बेटे का किरदार निभा रहे रणवीर स‍िंह अपने पिता से पूछते हैं, ‘आप दोनों की शादी को कितने साल हो गए? आपके संस्कार क्या हैं, हमें भी जरा बताइए।’ Imaage- Zoya akhtar Instagtam
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इसके बाद रणवीर सिंह कहते हैं कि सभी को उनके पिता के बिजनेस ट्रिप के बारे में पता है, वे कहां जाते हैं, किसके साथ जाते हैं और क्या करते हैं। वहीं उनकी मां हर बार ऐसे दिखाती हैं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। आखिर में वह कहते हैं कि सच तो यह है कि उनकी मां के पास कहीं और जाने की कोई जगह नहीं है। Image- Zoya akhtar instagram
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यह सीन दिखाने के बाद एक्सपर्ट कहती हैं कि एक छोटे से दृश्य में बहुत पावरफुल मैसेज छिपा है, जो आज लगभग हर घर की हकीकत को दर्शाता है। उनके मुताबिक, पुरानी पीढ़ी को अक्सर ऐसा लगता है कि जब नई पीढ़ी सच बोलती है या सवाल पूछती है, तो वह बदतमीजी या मिसबिहेव कर रही है। लेकिन हकीकत यह है कि, जैसा इस सीन में भी दिखाया गया है, जब बच्चे बड़े होकर माता-पिता के दोहरे व्यवहार (डबल स्टैंडर्ड) पर सवाल उठाते हैं और उनकी कथनी-करनी का फर्क सामने लाते हैं, तो यह बात पेरेंट्स को पसंद नहीं आती। ऐसे में कई माता-पिता उनकी बात सुनने या समझने के बजाय उसे आसानी से बदतमीजी या मिसबिहेवियर का नाम दे देते हैं।
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