ज्यादा बोलने वालों की क्यों नहीं होती कद्र? ऐसे लोग क्यों खो देते हैं इज्जत, रॉबर्ट ग्रीन ने बताया इंसानी दिमाग का ये पावरफुल सच

Newspoint
Newspoint
आपने भी नोटिस किया होगा कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा बोलते हैं। कई बार तो उनकी ये आदत एरिटेटिंग भी हो जाती है। ऐसे लोगों को लगता है कि ज्यादा बोलने से हर कोई उनसे इंप्रेस होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही आदत उनकी वैल्यू भी कम कर देती है? बेस्ट सेलिंग बुक 'The 48 Laws of Power' के लेखक रॉबर्ट ग्रीन ने राज शमानी के पॉडकास्ट (Figuring Out with Raj Shamani) में बताया कि जब आप जरूरत से ज्यादा बोलते हैं, तो अनजाने में खुद को कमजोर, असुरक्षित और बेबस साबित कर रहे होते हैं। इससे आपकी इमेज भी खराब होती है। जानिए कैसे ज्यादा बोलना आपकी पर्सनालिटी के लिए खतरनाक हो सकती है..
Newspoint
Hero Image
रॉबर्ट ग्रीन का कहना है कि जो लोग हर समय अपनी सोच, इमोशंस और फीलिंग्स का बखान करते रहते हैं, वे दूसरों की नजरों में हल्के साबित होते हैं। अगर आप लगातार बोलते रहेंगे, तो देर-सवेर मुंह से कोई ऐसी बेवकूफी भरी बात निकल ही जाएगी, जिसका पछतावा बाद में होगा। शांत रहना और कम शब्दों में बात रखना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि दूसरों के सामने अपना दबदबा और ताकत बनाए रखने की सबसे बड़ी चाबी है।
Newspoint
आजकल ज्यादातर लोग दूसरों को खुश करने और अच्छा बनने की होड़ में लगे रहते हैं। इसे साइकोलॉजी में 'पीपल प्लीजिंग' कहा जाता है। जब आप सामने वाले की हर बात पर सहमति जताते हैं और अपनी बात साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा सफाई देते हैं, तो सामने वाला आपको आसानी से टेकन फॉर ग्रांटेड ले लेता है। सबको राजी रखने का ये डर आपको कमजोर दिखाता है। अपनी अलग राय रखना और चुप रहकर असहमत होना भी एक आर्ट है।
Newspoint
ग्रीन ने अपनी जिंदगी में कॉर्पोरेट और सोशल लाइफ को बहुत करीब से देखा है। उनका कहना है कि किसी भी मीटिंग या बातचीत में सबसे ज्यादा बोलने वाला इंसान ही सबसे ज्यादा ताकतवर हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार असली इम्प्रेशन उस इंसान का होता है, जो शांत बैठकर सबकी बातें ध्यान से सुनता है। जब ऐसा इंसान पूरी मीटिंग में सिर्फ एक या दो सही बातें कहता है, तो हर कोई उसकी बात ध्यान से सुनता है। कम बोलने और सही समय पर सही बात कहने का असर फालतू की बातों से कहीं ज्यादा होता है।​

​
Newspoint
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात को गंभीरता से सुनें, तो बोलने से पहले दो सेकंड रुकें और सोचें कि क्या यह बात वाकई जरूरी है। सामने वाले की बात पूरी होने तक ध्यान से सुनें, कभी भी बीच में टोकने की जल्दबाजी न करें। अपने इमोशंस और प्लान्स का ढिंढोरा हर किसी के आगे पीटना तुरंत बंद करें।
Newspoint
आज के डिजिटल दौर में हर कोई खुद को कैमरे के सामने साबित करने में जुटा है। सोशल मीडिया ने हमें ये सिखा दिया है कि जो जितना चिल्लाएगा, उसे उतना अटेंशन मिलेगा। लेकिन असल जिंदगी इंटरनेट का एल्गोरिदम नहीं है। ऑफिस हो या रिश्ते, जो इंसान अपने पत्ते छुपाकर रखता है और रहस्य बनाए रखता है, दुनिया हमेशा उसकी ज्यादा इज्जत करती है। अपनी हर छोटी-बड़ी बात सोशल मीडिया या दोस्तों के आगे खोलकर रख देना आपकी प्राइवेसी और पर्सनालिटी दोनों को नुकसान पहुंचाता है।