क्या आपके घर के गमलों में लगे पौधों की ग्रोथ रुक गई है या फिर उनमें फूल खिलना बंद हो गए हैं? अगर आप महंगे फर्टिलाइजर और केमिकल खाद का इस्तेमाल करके थक चुके हैं, तो अब माली का बेहद आसान और सस्ता उपाय आजमाकर देखें। हर घर में आसानी से मिलने वाली लिखने वाली सफेद चाक आपके पौधों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।
चाक में मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट मिट्टी को पोषण देकर पौधों की जड़ों और तनों को मजबूती देता है। इससे न सिर्फ पौधों का विकास तेजी से होता है, बल्कि ढेरों नई कलियां और सुंदर फूल भी खिलने लगते हैं। तो चलिए जानते हैं गमले की मिट्टी में चाक इस्तेमाल करने का सही तरीका और इसके बेमिसाल फायदे।
सफेद चाक मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है। जब इसे गमले की मिट्टी में डाला जाता है, तो यह पौधे की जड़ों को भरपूर मात्रा में कैल्शियम देता है। कैल्शियम पौधों की कोशिका संरचना को मजबूत बनाता है और तनों को झुकने या टूटने से रोकता है।
गुलाब और अन्य पुष्पीय पौधों में अक्सर कैल्शियम की कमी के कारण कलियां बनने से पहले ही गिरने लगती हैं या फूल छोटे आते हैं। मिट्टी में चाक का प्रयोग करने से पौधे में नई शाखाएं, ढेर सारी नई कलियां और बड़े आकार के सुंदर फूल खिलने लगते हैं।
सबसे पहला और आसान तरीका एक छोटे चाक के टुकड़े को कूटकर बारीक पाउडर बनाना है। इस पाउडर को लगभग 1 लीटर पानी में अच्छे से घोल लें और फिर इस पानी को पौधे की जड़ों की मिट्टी में डाल दें। यह तरीका तुरंत असर दिखाता है।
अगर आप धीरे-धीरे पोषण देना चाहते हैं, तो गमले की गीली मिट्टी में एक छोटा छेद बनाएं। इसमें लगभग एक चौथाई (1/4) चाक का टुकड़ा गाड़ दें और ऊपर से मिट्टी ढककर पानी दे दें। पानी देने पर चाक धीरे-धीरे घुलकर जड़ों को पोषण देता रहेगा।
चाक तासीर में गर्म और तेज असर वाला होता है, इसलिए एक गमले में बहुत अधिक मात्रा में चाक न डालें। यह समझना होगा कि 1/4 टुकड़ा या 1 छोटा चम्मच पाउडर पर्याप्त होता है। इस उपाय का प्रयोग महीने में केवल एक बार ही करें।
सबसे अच्छी बात है कि यह घरेलू नुस्खा सर्दी, गर्मी या बरसात, हर मौसम में समान रूप से असरदार और सुरक्षित है। नियमित और सही मात्रा में इस्तेमाल करने से आपके पौधे बिना किसी रासायनिक खाद के हमेशा स्वस्थ और फूलों से भरे रहेंगे। डिस्क्लेमर: इस लेख में किए गए दावे इंस्टाग्राम वीडियो और इंटरनेट पर मिली जानकारी पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता और सटीकता जिम्मेदारी नहीं लेता है।