माता-पिता बच्चों की अच्छी परवरिश से लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने तक हर संभव प्रयास करते हैं। इसके लिए वे अपनी सेविंग्स तक खर्च करने में भी एक बार नहीं सोचते। लेकिन कई बार बच्चे बड़े होने के बाद यह नहीं समझ पाते कि अब उन्हें भी अपने माता-पिता की जिम्मेदारियों को साझा करना चाहिए या उन्हें भी किसी चीज की जरूरत हो सकती है। ऐसा ही एक किस्सा मोटिवेशनल स्पीकर डॉक्टर उज्ज्वल पाटनी ने साझा किया है, जिसमें एक पिता ने बेटे को कॉल करके 5 हजार रुपये मांगे। इसके बाद बेटे ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसे जानकर हर बच्चा सोचने पर मजबूर हो जाएगा। आखिर क्या था वह निर्णय, चलिए जानते हैं।

मोटिवेशनल स्पीकर डॉक्टर उज्ज्वल पाटनी बताते हैं कि एक बार दोपहर 2 बजे एक पिता का कॉल बेटे के पास आया। कॉल देखते ही बेटे के दिमाग में आया कि लो भाई, अब कोई फालतू का काम बताएंगे। तभी पिता की आवाज आई- ‘बेटा, 5 हजार रुपये चाहिए, कल तक।’ यह कहते ही कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। यह सुनते ही बेटे के दिमाग में तुरंत यह बात आई कि उसके पिता, जिन्होंने 30 साल तक कभी पैसे नहीं मांगे, आज अचानक क्यों मांग रहे हैं। कहीं कुछ गलत तो नहीं हुआ? उसने बिना देर किए कहा, ‘ठीक है पापा, अभी भेजता हूं,’ और 2 सेकेंड में 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। Image-pexels

इसके बाद वह कुछ देर तक सोचता रहा। वही पिता, जिन्होंने उसकी 12 लाख की इंजीनियरिंग फीस भरी और कभी यह नहीं कहा कि पैसे नहीं हैं, जिन्होंने उसे सेटल करने में 50 हजार रुपये दिए और कभी किसी कमी का जिक्र नहीं किया, आज पहली बार 5 हजार रुपये मांग रहे थे। बेटे ने वापस कॉल किया और पूछा, ‘पापा सब ठीक है न?’ पिता ने जवाब दिया, ‘हां बेटा, सब ठीक है। बस पेंशन में कुछ एडजस्ट करना था, दवाइयों का बिल आ गया था।’ यह सुनकर बेटा सोच में पड़ गया कि उन्हें दवाइयों के लिए पैसे चाहिए थे, लेकिन उन्होंने इसे ऐसे मांगा जैसे उधार ले रहे हों।
इस वाकए के बाद, वह अपने खर्चों का हिसाब लगाने लगा, तब उसने पाया कि रहने, खाने, घूमने और बाकी खर्चों के बाद उसके पास करीब 32 हजार रुपये बचते थे, जबकि उसके पिता सिर्फ 5 हजार रुपये दवाइयों के लिए मांग रहे थे। इसके बाद बेटे ने फिर पिता को कॉल किया और कहा, ‘पापा, अगले महीने से मैं आपको 20 हजार रुपये भेजूंगा, आप आराम से इस्तेमाल करना।’ पिता ने कहा, ‘नहीं बेटा, हो जाता है।’ लेकिन बेटा बोला, ‘नहीं पापा, प्लीज।’ कुछ देर की खामोशी के बाद आखिरकार पिता की आवाज आई-’ठीक है बेटा…’
एक्सपर्ट ने अंत में कहा कि पिता ने पैसे मांगने में जो झिझक और शर्मिंदगी दिखाई दी, वह पिता की नहीं बल्कि बेटे की थी, जिसने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि पेंशन कितनी आती है या उन्हें किसी चीज की जरूरत तो नहीं है। उसने बस यह मान लिया कि सब ठीक है। इसीलिए वह सलाह देते हैं कि अगर आपके माता-पिता कभी पैसे नहीं मांगते, तो उनके मांगने का इंतजार न करें। समय-समय पर उनकी जरूरतों को समझकर खुद आगे आकर मदद करें और उनका ध्यान रखें।