हर माता-पिता यही चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे अच्छी आदतें और सही संस्कार सीखें। लेकिन कई बार अनजाने में ही बच्चे अपने पेरेंट्स के व्यवहार से कुछ ऐसी बातें भी अपना लेते हैं, जो उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए सही नहीं होतीं। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने हाल ही में ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में बताया है, जो बेटियां अक्सर अनजाने में खासतौर पर अपनी मां से सीख जाती हैं। इनमें से एक आदत का असर यह होता है कि वे अपना दर्द और तकलीफ दूसरों से छिपाना सीख जाती हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन-सी आदतें हैं और बेटियों के जीवन पर उनका क्या असर पड़ता है।
पेरेंटिंग कोच और NLP प्रैक्टिशनर पुष्पा शर्मा का कहना है कि टीनएज बेटियां अपनी मां की दो आदतें बहुत जल्दी सीख लेती हैं। पहली है, हर किसी को खुश रखने की कोशिश करना। जब मां अपनी जरूरतों को छोड़कर बार-बार कहती है कि पहले सबका काम हो जाए, फिर मैं करूंगी, तो बेटियां भी यह सीख सकती हैं कि अपनी जरूरतों से पहले दूसरों की अप्रूवल जरूरी है।
दूसरी आदत है, गुस्सा होने या हर्ट होने पर अपनी फीलिंग्स को हेल्दी तरीके से एक्सप्रेस न करना। अक्सर मदर्स सीधे यह नहीं कहतीं कि उन्हें किसी बात का बुरा लगा या वे हर्ट हुई हैं। इसके बजाय वे कहती हैं, 'जाने दो', 'मुझे किसी से कुछ नहीं कहना' या 'तुम लोगों को मेरी परवाह ही नहीं है।' इससे टीनएज बेटियां धीरे-धीरे खुलकर अपनी बात कहने के बजाय इमोशनल शटडाउन को सामान्य समझ सकती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मां को परफेक्ट होना है। वह भी एक इंसान है और उसे हर्ट होने या असुरक्षित महसूस करने का पूरा हक है। लेकिन जब भी आप बेटी के सामने खुद को क्रिटिसाइज करें, तो एक बार रुककर सोचें कि अगर आपकी बेटी आपकी जगह होती, तो क्या आप चाहतीं कि वह भी अपने बारे में ऐसी बातें कहे?
ध्यान रखें कि आपकी टीनएज बेटी को ऐसी मां नहीं चाहिए जो परफेक्ट हो, बल्कि ऐसी मां चाहिए जो खुद की रिस्पेक्ट करे और अपनी फीलिंग्स को हेल्दी तरीके से एक्सप्रेस करना जानती हो।