कुमकुमादि तेल रोज रात को चेहरे पर लगाने से क्या होगा? आयुर्वेदाचार्य बोले- झुर्रियां दूर होंगी और मिलेंगी कई फायदे
आयुर्वेद हमेशा से ही ऐसे उपचार पर जोर देता है जिसका प्रभाव लंबे समय तक के लिए बना रहे। त्वचा के लिए कुमकुमादि ऑयल किसी उपचार से कम नहीं है। इसे अगर रोजाना चेहरे पर लगाया जाए तो धीरे-धीरे चेहरे की तमाम समस्याएं जैसे दाग धब्बे, फाइन लाइन, रूखापन, ऐक्ने वगैरह दूर होना शुरू हो जाते हैं। त्वचा को यह लाभ सिर्फ दिन दो दिन के लिए नहीं होता, बल्कि इससे लंबे समय तक के लिए त्वचा पर जवां और बेदाग निखार बना रहता है। कुमकमादी ऑयल में केसर तो होती ही है साथ ही इसमें अन्य ऐसे कई हर्ब भी होते हैं जो त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं। इस तेल को घर पर आप आसानी से तैयार कर सकते हैं या फिर बाजार से भी खरीद सकते हैं।

शुद्ध केसर का तेल या कुमकुमादि तेल, क्या है बेहतर?सबको पता है कि केसर त्वचा के लिए बेहद लाभदायक है। फिर सवाल आता है कि आखिर कुमकुमादि तेल बेहतर है या केसर का तेल? कुमकुमादि ऑयल का मतलब हुआ अन्य जड़ी बूटियों या तेल के साथ तैयार कुमकुम यानी केसर का तेल। जब हम शुद्ध केसर का तेल चेहरे पर लगाते हैं तो वह त्वचा की भीतरी सतह तक अच्छी तरह नहीं जा पाता और उससे मिलने वाला निखार कुछ ही दिनों के लिए होता है।
कुमकुमादी तेल में तिल का तेल, केसर, मंजिष्ठा, लोध्र, मुलेठी, चंदन और अन्य कई जड़ी बूटियां भी होती हैं जो त्वचा की बीतरी सतह तक पहुंचती हैं। ये सभी सामग्री त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इनके साथ ही केसर के गुणों को भी त्वचा के भीतरी सतह तक पहुंचने का मौका मिलता है जिस कारण त्वचा को भीतर से फायदा मिलता है और निखार लंबे समय तक के लिए बना रहता है। कुमकुमादि तेल त्वचा में एब्जॉर्ब होकर भीतरी सतह से पिग्मेंटेशन हटाता है, इंफ्लेमेशन कम करता है, त्वचा का टेक्सचर बेहतर करता है और एजिंग को कम करता है।
घर पर कुमकुमादी ऑयल कैसे तैयार करें?घर पर कुछ ही सामग्री के साथ आप आसानी से कुमकुमादी ऑयल तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए तरीकों का पालन करना होगा :
कुमकुमादि ऑयल के त्वचा को फायदेकुमकुमादि ऑयल से त्वचा की केवल एक दो समस्याओं का उपचार नहीं होता है। बल्कि यह तेल त्वचा के भीतर गहराई से जाकर कई समस्याओं का निदान करता है।
बेजान और अऩईवेन स्किन टोन : केसर का काम है त्वचा में निखार लाना। अगर आप इसे रोजाना लगते हैं तो कुछ ही सप्ताह में आपको अपने त्वचा पर मौजूद पैच या अनईवेन स्किन टोन सही होते नजर आएंगे।
डार्क स्पॉट और हाइपर पिग्मेंटेशन : मंजिष्ठाा और मुलेठी मेलेनिन की सक्रीयता को कम करते हैं। यानी त्वचा को गहरा रंग देने वाला मेलेनिन कम काम करता है और त्वचा से डार्क स्पॉट और हाइपरपिग्मेंटेशन कम होना शुरू हो जाता है। इस तेल से खास तौर पर एक्ने के निशान, मेलाज्मा, और सन स्पॉट ठीक किए जा सकते हैं।
रूखी और डीहाइड्रेटेड त्वचा : तिल का तेल त्वचा को गहराई से नमी पहुंचाता है और नमी को लॉक भी कर देता है। इसलिए जिन लोगों को बहुत ज्यादा रूखी और फ्लेकी त्वचा की शिकायत है उन्हें कुमूकुमादि ऑयल से फायदा पहुंच सकता है।
एक्ने वाली त्वचा : कुमकुमादि ऑयल में मौजूद लोध्रा और चंदन में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो एक्ने वाली त्वचा को राहत पहुंचाते हैं। इनमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण त्वचा से ऐक्ने को कम करने में मदद कर सकते हैं।
फाइन लाइन्स और प्रीमेच्योर एजिंग : केसर में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं और इस तेल में मौजूद अन्य जड़ी बूटियों में रीजेनेरेटिव गुण होते हैं जो मिलकर कोलाजन को बेहतर करते हैं, त्वचा के ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को घटाते हैं और धीरे धीरे फाइनलाइन्स को कम कर देते हैं।
आंखों के नीचे के कालापन : इस ऑयल से आंखों के चारों तरफ हल्के हाथ से मालिश करने से आंखों के काले घेरे कम होना शुरू हो जाते हैं। ये काले घेरे आंखों पर पिग्मेंटेशन और कमजोरी के कारण आते हैं।
कुमकुमादि ऑयल इस्तेमाल करने का सही तरीकाकुमकुमादि ऑयल को रात में इस्तेमाल करना बेहतर है क्योंकि यह एक तरह का रिपेयर ऑयल है जो रात में बेहतर नतीजे देता है। दरअसल रात में त्चचा खुद को ठीक करने का काम करती है, ऐसे में यही सही समय है इस ऑयल के इस्तेमाल का। इसके इस्तेमाल के दौरान इन बातो का ख्याल रखें :
किसे नहीं लगाना चाहिए यह तेल?यूं तो कुमकुमादि ऑयल सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है लेकिन अगर आपकी त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली है और ऐक्ने की समस्या बहुत ज्यादा होती है तो इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट कर लें। इसके अलावा उन लोगों को भी इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट कर लेना चाहिए जिन्हें इस तेल में मौजूद किसी भी सामग्री से एलर्जी है।
पैच टेस्ट कलाई पर अंदर की तरफ तेल लगाकर करें और इसके प्रभाव को करीब 24 से 48 घंटों तक देखें। गर्भवती महिलाएं इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं, वहीं 12 साल से कम उम्र के बच्चों पर इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए। अगर आपको एग्जिमा, साइरोसिस, या रोसासिया जैसी कोई भी त्वचा की बीमारी है तो कुमकुमादि ऑयल के इस्तेमाल से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लें।
शुद्ध केसर का तेल या कुमकुमादि तेल, क्या है बेहतर?सबको पता है कि केसर त्वचा के लिए बेहद लाभदायक है। फिर सवाल आता है कि आखिर कुमकुमादि तेल बेहतर है या केसर का तेल? कुमकुमादि ऑयल का मतलब हुआ अन्य जड़ी बूटियों या तेल के साथ तैयार कुमकुम यानी केसर का तेल। जब हम शुद्ध केसर का तेल चेहरे पर लगाते हैं तो वह त्वचा की भीतरी सतह तक अच्छी तरह नहीं जा पाता और उससे मिलने वाला निखार कुछ ही दिनों के लिए होता है।
कुमकुमादी तेल में तिल का तेल, केसर, मंजिष्ठा, लोध्र, मुलेठी, चंदन और अन्य कई जड़ी बूटियां भी होती हैं जो त्वचा की बीतरी सतह तक पहुंचती हैं। ये सभी सामग्री त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इनके साथ ही केसर के गुणों को भी त्वचा के भीतरी सतह तक पहुंचने का मौका मिलता है जिस कारण त्वचा को भीतर से फायदा मिलता है और निखार लंबे समय तक के लिए बना रहता है। कुमकुमादि तेल त्वचा में एब्जॉर्ब होकर भीतरी सतह से पिग्मेंटेशन हटाता है, इंफ्लेमेशन कम करता है, त्वचा का टेक्सचर बेहतर करता है और एजिंग को कम करता है।
घर पर कुमकुमादी ऑयल कैसे तैयार करें?घर पर कुछ ही सामग्री के साथ आप आसानी से कुमकुमादी ऑयल तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए तरीकों का पालन करना होगा :
- करीब 100 एमएल कोल्ड प्रेस्ड सेसेमे ऑयल यानी तिल का तेल लें।
- इसमें कुछ पत्तियां केसर की डालें, याद रखें केसर अच्छी गुणवत्ता वाली होनी चाहिए।
- इसके बाद इसमें एक चुटकी मंजिष्ठा रूट पाउडर डालें, थोड़ी लोध्रा की जड़ डालें और कुछ बूंदें शुद्ध चंदन के तेल की डालें। अगर चंदन की लकड़ा का टुकड़ा मौजूद है तो वह भी चलेगा।
- इसके बाद इसमें आधा चम्मच मुलेठी पाउडर डालें।
- इन सबको एक मोटी तली वाले बर्तन में डालकर लो फ्लेम पर करीब 30 से 40 मिनट तक के लिए गर्म करने को रख दें। इसे बीच बीच में चलाते रहें।
- इस तेल को बहुत ज्यादा देर तक उबलने न दें। याद रखें तेल जलने न पाए।
- आंच बंद करके इसे ठंडा होने दें।
- ठंडा होने के बाद हल्के सूती कपड़े से इसे एक बर्तन में छान लें।
- तेल को गहरे रंग की शीशी में रखें ताकि सूरज की सीधी रौशनी इस पर न पड़ सके।
- यह तेल तीन महीनों के लिए तैयार हो जाएगा।
कुमकुमादि ऑयल के त्वचा को फायदेकुमकुमादि ऑयल से त्वचा की केवल एक दो समस्याओं का उपचार नहीं होता है। बल्कि यह तेल त्वचा के भीतर गहराई से जाकर कई समस्याओं का निदान करता है।
बेजान और अऩईवेन स्किन टोन : केसर का काम है त्वचा में निखार लाना। अगर आप इसे रोजाना लगते हैं तो कुछ ही सप्ताह में आपको अपने त्वचा पर मौजूद पैच या अनईवेन स्किन टोन सही होते नजर आएंगे।
डार्क स्पॉट और हाइपर पिग्मेंटेशन : मंजिष्ठाा और मुलेठी मेलेनिन की सक्रीयता को कम करते हैं। यानी त्वचा को गहरा रंग देने वाला मेलेनिन कम काम करता है और त्वचा से डार्क स्पॉट और हाइपरपिग्मेंटेशन कम होना शुरू हो जाता है। इस तेल से खास तौर पर एक्ने के निशान, मेलाज्मा, और सन स्पॉट ठीक किए जा सकते हैं।
रूखी और डीहाइड्रेटेड त्वचा : तिल का तेल त्वचा को गहराई से नमी पहुंचाता है और नमी को लॉक भी कर देता है। इसलिए जिन लोगों को बहुत ज्यादा रूखी और फ्लेकी त्वचा की शिकायत है उन्हें कुमूकुमादि ऑयल से फायदा पहुंच सकता है।
एक्ने वाली त्वचा : कुमकुमादि ऑयल में मौजूद लोध्रा और चंदन में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो एक्ने वाली त्वचा को राहत पहुंचाते हैं। इनमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण त्वचा से ऐक्ने को कम करने में मदद कर सकते हैं।
फाइन लाइन्स और प्रीमेच्योर एजिंग : केसर में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं और इस तेल में मौजूद अन्य जड़ी बूटियों में रीजेनेरेटिव गुण होते हैं जो मिलकर कोलाजन को बेहतर करते हैं, त्वचा के ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को घटाते हैं और धीरे धीरे फाइनलाइन्स को कम कर देते हैं।
आंखों के नीचे के कालापन : इस ऑयल से आंखों के चारों तरफ हल्के हाथ से मालिश करने से आंखों के काले घेरे कम होना शुरू हो जाते हैं। ये काले घेरे आंखों पर पिग्मेंटेशन और कमजोरी के कारण आते हैं।
कुमकुमादि ऑयल इस्तेमाल करने का सही तरीकाकुमकुमादि ऑयल को रात में इस्तेमाल करना बेहतर है क्योंकि यह एक तरह का रिपेयर ऑयल है जो रात में बेहतर नतीजे देता है। दरअसल रात में त्चचा खुद को ठीक करने का काम करती है, ऐसे में यही सही समय है इस ऑयल के इस्तेमाल का। इसके इस्तेमाल के दौरान इन बातो का ख्याल रखें :
- त्वचा को रिपेयर करने के लिए कुमकुमादि ऑयल लगाने के बाद चेहरे पर अन्य कोई मॉश्चराइजर, सनस्क्रीन या मेकअप वगैरह न लगाएं।
- चेहरे को अच्छी तरह धो लें और कुमकुमादि ऑयल की कुछ बूंदें हथेली में रगड़कर गर्म कर लें, इसके बाद इसे चेहरे पर हल्के हाथों से धीरे धीरे गोलाई में लगा लें
- लगाने के बाद इसे कुछ देर तक त्वचा में एब्जॉर्ब होने का मौका दें, इसके बाद ही बिस्तर पर लेटने जाएं।
- अगर आप दिन में कुमकुमादि तेल लगाना चाहते हैं तो बस एक बूंद तेल लें और मॉश्चराइजर में मिलाकर लगांए। इसके ऊपर ब्रॉड स्पेक्ट्रम वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं। याद रखें केसर से फोटो सेंस्टिविटी हो सकती है यानी इसको लगाने के बाद धूप में आने से त्वचा को समस्या हो सकती है।
- बेहतर नतीजों के लिए इसका इस्तेमाल लगातार 4 से 5 सप्ताह तक करें।
किसे नहीं लगाना चाहिए यह तेल?यूं तो कुमकुमादि ऑयल सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है लेकिन अगर आपकी त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली है और ऐक्ने की समस्या बहुत ज्यादा होती है तो इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट कर लें। इसके अलावा उन लोगों को भी इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट कर लेना चाहिए जिन्हें इस तेल में मौजूद किसी भी सामग्री से एलर्जी है।
पैच टेस्ट कलाई पर अंदर की तरफ तेल लगाकर करें और इसके प्रभाव को करीब 24 से 48 घंटों तक देखें। गर्भवती महिलाएं इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं, वहीं 12 साल से कम उम्र के बच्चों पर इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए। अगर आपको एग्जिमा, साइरोसिस, या रोसासिया जैसी कोई भी त्वचा की बीमारी है तो कुमकुमादि ऑयल के इस्तेमाल से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लें।
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