बच्चे कभी-कभी ऐसे सवाल पूछ लेते हैं, जिन्हें सुनकर माता-पिता हैरान रह जाते हैं। कई बार उनका पहला रिएक्शन गुस्सा या नाराजगी होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चे बेवजह की बातें कर रहे हैं। लेकिन जब उन सवालों के पीछे छिपी मासूम भावना और वजह सामने आती है, तो उन्हें अपनी ही सोच पर पछतावा होने लगता है। मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. उज्ज्वल पाटनी ने हाल ही में एक ऐसी ही भावुक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि एक 8 साल के बच्चे ने अपने पिता से पूछा, पापा, आप 1 घंटे में कितना कमाते हैं?' जिसे सुनकर पिता झल्ला पड़े। लेकिन जब उन्हें उस सवाल के पीछे छिपी वजह का पता चला, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि आखिर वे कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं।

मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. उज्ज्वल पाटनी एक उदाहरण देकर बताते हैं कि एक बहुत बिजी बिजनेसमैन देर रात थका-हारा अपने आलीशान घर लौटा। उस समय उसका 8 साल का बेटा दरवाजे के पास उसका इंतजार कर रहा था। फिर बेटे ने पूछा, ‘पापा, आप एक घंटे में कितना कमाते हैं?’ पिता चिढ़ गया और गुस्से में बोला, ‘क्या फालतू बातें कर रहे हो?’ खैर, बेटे के बार-बार पूछने पर पिता ने गुस्से में जवाब दिया, ‘मैं 1000 रुपये प्रति घंटा कमाता हूं। अब जाओ और जाकर सो जाओ।’
बच्चा उदास होकर अपने कमरे में चला गया। उसने अपनी गुल्लक तोड़ी और उसमें जमा सिक्के गिनने लगा। थोड़ी देर बाद वह अपनी मुट्ठी में मुड़े-तुड़े नोट और सिक्के लेकर वापस आया। रोते हुए उसने वे पैसे पिता की ओर बढ़ाए और कहा, ‘पापा, मेरे पास अब 1000 रुपये इकट्ठा हो गए हैं। क्या आप कल अपना एक घंटा मुझे दे सकते हैं? मुझे आपके साथ बैठकर खाना खाना है।’
यह सुनते ही पिता सन्न रह गए। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्हें एहसास हुआ कि पैसे और सफलता की इस अंधी दौड़ में उन्होंने अपने ही बच्चे का बचपन और उसके साथ बिताने वाला अनमोल समय खो दिया था। इस घटना का सबक बताते हुए एक्सपर्ट कहते हैं कि यदि आप तिजोरियों में करोड़ों रुपये छोड़कर भी दुनिया से जाएं, तब भी वह पैसा आपके बच्चे का खोया हुआ बचपन और उसके साथ बिताए जाने वाले कीमती पल वापस नहीं ला सकता।
इसीलिए माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि पैसे की दौड़ में वे इतने न उलझ जाएं कि वही चीजें पीछे छूट जाएं, जिनके लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। अपने बच्चों को भरपूर प्यार, स्नेह और पूरा समय दीजिए। इससे पहले की देर हो जाए, अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर अपने बच्चों के साथ बिताइए, क्योंकि बचपन एक बार चला जाए तो वापस नहीं आता।