हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का विशेष धार्मिक और औषधीय महत्व माना जाता है, इसलिए हर घर में तुलसी का पौधा देखने को मिलता है। लेकिन कई बार सही जानकारी न होने के कारण तुलसी केवल सीधी ऊपर की ओर बढ़ती जाती है और उसमें नई शाखाएं या पत्तियां नहीं निकल पातीं।
अगर आपके घर में लगा तुलसी का पौधा भी बेजान और पतला दिख रहा है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। सूखी मंजीरी हटाने से लेकर सही कटाई और सीवीड फर्टिलाइजर के इस्तेमाल जैसे 3 मुख्य उपायों को अपनाकर आप अपने पौधे को कुछ ही दिनों में झाड़ीदार और लहलहाता हुआ बना सकते हैं।
तुलसी के पौधे पर जब मंजीरी पक जाती है, तो उसमें बीज बनने लगते हैं। पौधा अपनी सारी ऊर्जा इन बीजों को पकाने और नए पौधे बनाने के लिए लगाने लगता है। इसके कारण तुलसी की अपनी ग्रोथ रुक जाती है। इसलिए, कैंची से सूखी और पकी हुई मंजीरी को काटकर तुरंत हटा दें। इन कटे हुए बीजों को वापस गमले की मिट्टी में डाला जा सकता है।
पौधे को ऊपर से लंबा होने से रोकने और उसे चौड़ाई में फैलाने के लिए उसकी टिप्स को काटना बहुत जरूरी है। जब आप ऊपरी हिस्से की कटाई करते हैं, तो नीचे की ओर से नई शाखाएं निकलने लगती हैं। जितनी ज्यादा शाखाएं निकलेंगी, तुलसी का पौधा उतना ही घना और हरा-भरा दिखाई देगा।
तुलसी में पोषण की कमी दूर करने और ग्रोथ हार्मोन्स को सक्रिय करने के लिए सीवीड लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करें। 1 लीटर पानी में 1 चम्मच सीवीड सॉल्यूशन मिलाएं। यह पौधों को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वप्रदान करता है, जिससे पौधे की पत्तियां हरी-भरी रहती हैं और पौधा तेजी से फैलता है।
तैयार किए गए सीवीड फर्टिलाइजर के घोल को हफ्ते में एक बार तुलसी के पौधे और पत्तियों पर स्प्रे करें। नियमित इस्तेमाल से पौधे की पोषक तत्वों से जुड़ी कोई भी कमी दूर हो जाती है और उसकी सेहत में तेजी से सुधार आता है। और, पौधे को घना बनाने में भी मदद मिलती है।
तुलसी के पौधे के बेहतर विकास के लिए उसे पर्याप्त मात्रा में धूप मिलना बेहद जरूरी है। पौधे को ऐसे स्थान पर रखें जहां रोजाना कम से कम 4-5 घंटे की सीधी धूप आती हो। इसके साथ ही गमले में बहुत अधिक पानी न भरें, केवल मिट्टी में नमी बनाए रखें ताकि जड़ें सुरक्षित रहें।
समय-समय पर गमले की ऊपरी मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना बहुत जरूरी है। इससे जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और पानी व पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर तरीके से होता है, जिससे पौधा हमेशा स्वस्थ बना रहता है। डिस्क्लेमर: इस लेख में किए गए दावे इंस्टाग्राम वीडियो और इंटरनेट पर मिली जानकारी पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता और सटीकता जिम्मेदारी नहीं लेता है।