कई बार मदर्स को यह सोचती हैं कि उनका बच्चा अभी छोटा है, जब बड़ा हो जाएगा तब वह कुछ करेंगी। हालांकि, इस सोच पर मशहूर लेखक आचार्य प्रशांत ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह की सोच रखने वाली मांओं के बच्चे कभी बड़े नहीं हो पाते, क्योंकि मम्मियां यह मान लेती हैं कि उनके बिना कुछ नहीं हो सकता। हालांकि, यह धारणा बेहद गलत है। बच्चे को जितना समय देना जरूरी है, उतना दीजिए और फिर खुद पर ध्यान दीजिए।
(सभी तस्वीरें-सांकेतिक हैं)
मशहूर लेखक आचार्य प्रशांत बताते हैं कि हाल ही में एक महिला ने कहा कि बच्चा अभी बहुत छोटा है, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकती। जब उन्होंने पूछा कि बच्चा कितना छोटा है, तो महिला ने बताया कि वह 14 साल का है, जब वह बड़ा हो जाएगा, तब वह कुछ करेंगी। Image-Istock
आचार्य प्रशांत कहते हैं कि यह सुनने के बाद उन्होंने उस महिला से कहा कि वह बच्चा कभी बड़ा नहीं होगा, क्योंकि वह पहले ही बड़ा हो चुका है। उनका कहना था कि जितना समय बच्चे को दिन में मां का देना जरूरी है, उतना समय तय कर दें और फिर अपने बाकी कामों पर ध्यान दें। मान लीजिए आपका दिन 21 घंटे का ही होना चाहिए। Image- acharya prashant Facebook
वे कहते हैं उन लोगों को सोचिए जिनके तीन घंटे किसी अलग जरूरत में लगते हैं, जैसे किसी को फिजियोथैरेपी करानी होती है या किसी को डायलिसिस करानी होती है। तो क्या वे जीना छोड़ देते हैं? नहीं, वे अपनी डेली रूटीन में से उतना समय अलग कर लेते हैं। उनका दिन 24 घंटे का ही होता है, जिसमें से मान लीजिए 6 घंटे डायलिसिस या फिजियोथैरेपी में चले जाते हैं, तो वे बाकी समय के अनुसार अपनी दिनचर्या को एडजस्ट करते हैं।Image-Istock
मां अक्सर यह सोचती हैं कि अगर वे नहीं रहेंगी तो उनके बच्चों का क्या होगा। लेकिन बच्चे इस बात को वैसे नहीं सोचते। कई बार बच्चा तक साफ कह भी देता है- ‘मम्मी, थोड़ा समझदारी से सोचो।’ इसलिए जरूरत से ज्यादा चिंता करके खुद को हर समय 'जरूरी' साबित करने की कोशिश करना सही नहीं है। Image-IStock
आचार्य कहते हैं कि हमें फैक्ट्स और इमैजिनेशन के बीच अंतर करना सीखना चाहिए। ब्रह्मांड का इतिहास अरबों-खरबों वर्षों का है, और उसमें मदर्स की मौजूदगी कितने समय के लिए रही है। लेकिन दावा यह है कि ‘अगर मैं नहीं रहूंगी तो क्या होगा’ या ‘सब कुछ मैंने ही संभाल रखा है।’ इस सोच से बाहर निकलिए। Image-Istock