रमेश सिप्पी Exclusive: मैं जो भी बनाता हूं तो लोग बोलते हैं कि ये 'शोले' नहीं है तो मैं क्या करूं?
बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी और दिग्गज फिल्मकार रमेश सिप्पी की जोड़ी ने सिनेमा जगत को 'शोले' और 'सीता और गीता' जैसी कालजयी फिल्में दी हैं। रमेश सिप्पी निर्देशित पहली फिल्म 'अंदाज' (1971) से लेकर 2020 में आई आखिरी फिल्म 'शिमला मिर्ची' तक की नायिका हेमा मालिनी ही थीं। ऐसे में, हाल ही में हेमा मालिनी के 60 साल लंबे करियर का जश्न मनाने के लिए हो रहे ' द ड्रीम गर्ल्स डायमंड जुबली कॉन्सर्ट ' की घोषणा करने आए रमेश सिप्पी ने 'नवभारत टाइम्स' से 'शोले', हेमा मालिनी संग अपनी लंबी साझेदारी, धर्मेंद्र और आज के बॉलीवुड से जुड़े कई विषयों पर रोचक बातचीत की।

हेमा मालिनी की कौन सी खूबी उन्हें बाकी ऐक्ट्रेसेस से अलग बनाती है? इस पर रमेश सिप्पी बताते हैं, 'हेमा जी बहुत क्विक रही हैं। किरदार को वह बहुत जल्दी पकड़ लेती हैं और फिर स्क्रीन पर आसानी से उतार देती हैं। जैसे बसंती का ही रोल था, उसे हेमा जी ने मुझसे भी जल्दी समझ लिया, फिर जैसा उन्होंने बंसती को निभाया, वो आइकॉनिक बन गया। जबकि, मुझे तो शुरू में यह रोल उन्हें ऑफर करने में ही हिचक रहा था।' इस हिचक की वजह पूछने पर उन्होंने बताया, 'दरअसल, हेमा जी हमारे साथ 'सीता और गीता' जैसी सुपरहिट फिल्म कर चुकी थीं, जिसकी वह खुद हीरो थीं, वो भी डबल रोल में। उसके मुकाबले बंसती का रोल काफी छोटा था, तो मुझे डर था कि वह पता नहीं करेंगी या नहीं।'
मुमताज होतीं 'सीता और गीता' !
रमेश सिप्पी को अपनी पहली से आखिरी फिल्म की हीरोइन हेमा मालिनी में ही क्यों दिखीं? क्यों उन्हें अपनी सीता-गीता, बसंती सभी के लिए हेमा ही परफेक्ट लगीं? इस पर उन्होंने बताया, 'एक तो उनका काम हमेशा ही बहुत बढ़िया रहा है, दूसरे किस्मत का भी हाथ रहा है। जैसे, 'सीता और गीता' के लिए हमने मुमताज जी से बात की थी, मगर उनकी तारीखें उपलब्ध नहीं थीं। हेमा जी की डेट्स हमें मिल गईं। उस फिल्म के लिए हमें ज्यादा डेट्स चाहिए थी क्योंकि अच्छा काम करने के लिए वक्त चाहिए। मुझसे हड़बड़ी में अच्छा काम नहीं होता। इसी तरह, 'अंदाज' में एक विधवा का रोल था, जिसमें देखा जाए तो नूतन या ऐसी कोई मैच्योर एक्ट्रेस ज्यादा मुफीद होती। हेमा जी काफी यंग थीं, लेकिन वही फिल्म के पक्ष में गया क्योंकि लोगों की सिंपथी ज्यादा जुड़ी कि अरे, बेचारी इतनी युवा है और उसके साथ इतनी कम उम्र में ऐसा हो गया, तो एक तो उन्होंने काम बहुत अच्छा किया। दूसरे किस्मत और ऊपरवाले की मेहरबानी कहिए कि हमने जो फिल्में साथ में कीं, वे इतनी कमाल की बन गईं।'
धरम जी हमेशा याद आएंगे
वहीं, अपने वीरू यानी धर्मेंद्र पाजी को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'धरम जी बहुत ही प्यारे आदमी थे। उनमें एक अजीब सा बचपना था, जो आखिर तक बरकरार रहा। वह जब भी मिलते थे, बहुत प्यार से मिलते थे। जोर से गले लगाते थे। इंडस्ट्री के सबसे जेनुइन आदमी थे। हम सब उन्हें हमेशा मिस करेंगे।' जबकि, काफी अर्से से डायरेक्शन से दूरी की वजह पूछने पर वह हंसकर कहते हैं, 'हम जो भी बनाते हैं तो लोग बोलते हैं कि शोले नहीं है तो मैं क्या करूं?'
हेमा मालिनी की कौन सी खूबी उन्हें बाकी ऐक्ट्रेसेस से अलग बनाती है? इस पर रमेश सिप्पी बताते हैं, 'हेमा जी बहुत क्विक रही हैं। किरदार को वह बहुत जल्दी पकड़ लेती हैं और फिर स्क्रीन पर आसानी से उतार देती हैं। जैसे बसंती का ही रोल था, उसे हेमा जी ने मुझसे भी जल्दी समझ लिया, फिर जैसा उन्होंने बंसती को निभाया, वो आइकॉनिक बन गया। जबकि, मुझे तो शुरू में यह रोल उन्हें ऑफर करने में ही हिचक रहा था।' इस हिचक की वजह पूछने पर उन्होंने बताया, 'दरअसल, हेमा जी हमारे साथ 'सीता और गीता' जैसी सुपरहिट फिल्म कर चुकी थीं, जिसकी वह खुद हीरो थीं, वो भी डबल रोल में। उसके मुकाबले बंसती का रोल काफी छोटा था, तो मुझे डर था कि वह पता नहीं करेंगी या नहीं।'
मुमताज होतीं 'सीता और गीता' !
रमेश सिप्पी को अपनी पहली से आखिरी फिल्म की हीरोइन हेमा मालिनी में ही क्यों दिखीं? क्यों उन्हें अपनी सीता-गीता, बसंती सभी के लिए हेमा ही परफेक्ट लगीं? इस पर उन्होंने बताया, 'एक तो उनका काम हमेशा ही बहुत बढ़िया रहा है, दूसरे किस्मत का भी हाथ रहा है। जैसे, 'सीता और गीता' के लिए हमने मुमताज जी से बात की थी, मगर उनकी तारीखें उपलब्ध नहीं थीं। हेमा जी की डेट्स हमें मिल गईं। उस फिल्म के लिए हमें ज्यादा डेट्स चाहिए थी क्योंकि अच्छा काम करने के लिए वक्त चाहिए। मुझसे हड़बड़ी में अच्छा काम नहीं होता। इसी तरह, 'अंदाज' में एक विधवा का रोल था, जिसमें देखा जाए तो नूतन या ऐसी कोई मैच्योर एक्ट्रेस ज्यादा मुफीद होती। हेमा जी काफी यंग थीं, लेकिन वही फिल्म के पक्ष में गया क्योंकि लोगों की सिंपथी ज्यादा जुड़ी कि अरे, बेचारी इतनी युवा है और उसके साथ इतनी कम उम्र में ऐसा हो गया, तो एक तो उन्होंने काम बहुत अच्छा किया। दूसरे किस्मत और ऊपरवाले की मेहरबानी कहिए कि हमने जो फिल्में साथ में कीं, वे इतनी कमाल की बन गईं।'
धरम जी हमेशा याद आएंगे
वहीं, अपने वीरू यानी धर्मेंद्र पाजी को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'धरम जी बहुत ही प्यारे आदमी थे। उनमें एक अजीब सा बचपना था, जो आखिर तक बरकरार रहा। वह जब भी मिलते थे, बहुत प्यार से मिलते थे। जोर से गले लगाते थे। इंडस्ट्री के सबसे जेनुइन आदमी थे। हम सब उन्हें हमेशा मिस करेंगे।' जबकि, काफी अर्से से डायरेक्शन से दूरी की वजह पूछने पर वह हंसकर कहते हैं, 'हम जो भी बनाते हैं तो लोग बोलते हैं कि शोले नहीं है तो मैं क्या करूं?'
Next Story