मुगल बादशाह की बेगम से लेकर जयपुर घराने की महारानी तक क्या लगाती थीं चेहरे पर, जानें रॉयल्स के स्किन-हेयर केयर सीक्रेट

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दमकती त्वचा के लिए आप क्या कुछ नहीं करते। कभी सोचा है कि पुराने समय में रानियां और राज घरानों में औरतें किस तरह से अपनी सुंदरता का ख्याल रखती थीं। तब न तो ऐसे महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट हुआ करते थे और न ही ब्यूटी क्लीनिक। फिर भी कई ऐसी रानियां और राजपूतानियां रहीं जिनकी खूबसूरती के कसीदे आज भी पढ़े जाते हैं।

वह मुगल दरबार की नूरजहां हो या जयपुर घराने की महारानी गायत्री देवी, पद्मावती हों या दक्षिण भारत के राज घरानों की महिलाएं, उनकी खूबसूरती का राज उनके देसी अंदाज में छिपा था। फूलों से लेकर दूध और चंदन तक कई ऐसी चीजें थीं जो उस दौर में इन महिलाओं की त्वचा और बालों का ख्याल रखती थीं।
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मेवार की रानी पद्मावती अलौकिक खूबसूरती की मालकिन थीं। इनकी खूबसूरती का बखान जायसी ने अपनी कविताओं में खुलकर किया है और पद्मावत की रचना भी रानी पर ही की। हिंदुस्तान टाइम्स के एक लेख से पता चलता है कि रानी की त्वचा इतनी साफ और उजली थी कि अगर वह पान खाएं तो उसका रस आप गले से उतरते देख सकते थे।

लोक कथाओं में कहा जाता है कि वह नाहाने के लिए दूध और केसर का इस्तेमाल करती थीं। इसी तरह अगर हम ऐसी एक रानी की बात करें जिन्हें हम सभी ने देखा है तो नाम आता है ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ 2 का। उनके स्किन केयर में मिनिमल कॉस्मेटिक का फॉर्मुला शामिल था जो उनके आखिरी दम तक चेहरे पर दमक बरकरार रख सका। आप भी जानें कि राज घरानों की महिलाओं की खूबसरती के क्या थे राज।

गुलाब से संवारी नूरजहां
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वह जहांगीर की बेगम थीं जिन्हें दुनिया नूरजहां के नाम से जानती है। नूरजहां की पहचान सिर्फ एक सम्राट की बेगम होने भर नहीं थी, उनकी पहचान में उनकी खूबसूरती भी शामिल थी। रानी को सौंदर्य प्रसाधनों की बेहतर समझ थी। वे न सिर्फ अपनी त्वचा और बालों का अच्छा ख्याल रखना जानती थीं, बल्कि उनका स्टइल, नफासत, इत्र लगाना, और खुद बागबानी करके सौंदर्य उत्पाद तैयार करना भी चर्चा में था।

एक ऐतिहासिक मत कहता है कि आज जो गुलाब का इत्र आप लगाते हैं, वह नूरजहां ने तैयार किया था। हुआ यूं कि वह गुलाब जल बना रही थीं और तब देखा कि पानी पर तेल जैसी परत आ गई है। इसे अलग किया गया तो उसमें गुलाबों की बेहतरीन खुश्बू थी जो इत्र के रूप में इस्तेमाल होना शुरू हो गई। गुलाब का नूरजहां की खूबसूरती में बड़ा हाथ था। वह गुलाब जल को चेहरे पर लगाती थीं और पानी में गुलाब डालकर ही नहाती थीं। इससे उनकी त्वचा पूरा दिन तरोताजा बनी रहती थी और बदन से गुलाबों की खुश्बू भी आती थी।


मुगल दरबार के ये थे ब्यूटी सीक्रेट
  • इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख के मुताबिक दिन भर खुश्बूदार बने रहने के लिए गुलाब, केवड़ा, चमेली जैसे फूलों के इत्र लगाए जाते थे।
  • फूलों को नहाने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता था।
  • हेयर केयर के लिए वनस्पति तेलों में जड़ी बूटियां मिलाकर इंफ्यूज किया जाता था। इससे बाल मुलायम और चमकदार बने रहते थे।
  • बालों में कंडीश्निंग के लिए मेहंदी का इस्तेमाल होता था।
  • आखों को आकर्षक दिखाने के लिए सुरमें का इस्तेमाल होता था लेकिन इसे चिकित्सकीय गुणों से भी जोड़कर देखा जाता था।
  • मुगल रानियों के स्किन केयर में फारसी और मध्य एशिया के ब्यूटी सीक्रेट का प्रभाव था।
  • सॉना का चलन आज का नहीं है, मुगल रानियां उस वक्त भी स्टीम बाथ लिया करती थीं।

रानी पद्मावती का ब्यूटी सीक्रेट था अयुर्वेदिकपद्मावती की खूबसूरती के लिए तो खिलजी पूरी सेना लेकर आ गया था, और सबको पता है कि अपनी खूबसूरती के साथ साथ शान और ईमान को ऊंचा रखने वाली रानी ने कितना बड़ा जौहर किया था। रानी की खूबसूरती के पीछे आयुर्वेद का खजाना था। जायसी के पद्मावत और लोककथाओं से पता चलता है कि त्वचा की देखभाल के लिए रानी उबटन का इस्तेमाल करती थीं। इसके अलावा त्वचा पर चंदन, केसर, गुलाब जल और दूध का लेप लगाया जाता था ताकि त्वचा को नमी मिल सके और पिग्मेंटेशन की समस्या न हो।


महारानी गायत्री देवी करती थीं मेकअप

स्टाइल और खूबसूरती के उम्दा तालमेल की बात हो तो जयपुर घराने की महारानी गायत्री देवी का नाम शान से लिया जाता है। उनका जिक्र अक्सर फैशन जगत की जानी मानी भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय मैग्जीन में देखने को मिलता है और उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में गिना जाता है। महारानी गायत्री देवी की तस्वीरों पर गौर करें तो वह चेहरे पर बहुत ज्यादा ब्यूटी प्रोडक्ट लगाने से बचती हैं। इसकी जगह त्वचा को साफ रखने पर ज्यादा ध्यान देती थीं।

इसके अलावा त्वचा को मॉश्चराइज रखने और धूप से बचाने की कोशिश करती थीं। उनकी दमकती त्वचा के पीछे उनके संतुलित खानपान, फिजिकल वर्क और नियमित जीवनशैली का भी हाथ था। वह हल्का मेकअप करती थीं जिसमें पतला आईलाइनर और हल्की लिपस्टिक शामिल थे। इसके साथ ही शोल्डर लेंथ तक बालों को खुला रखती थीं। कभी कभी वह क्लासिक बन में भी नजर आती थीं।

राजपूत रानियों के ये रहे ब्यूटी सीक्रेट
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  • रेगिस्तान की सूखी हवा में त्चचा को रूखेपन का सामना करना पड़ता था। इसलिए राजपूत रानियां त्वचा को हायड्रेटेड रखने पर खास ध्यान देती थीं।
  • वे साबुन नहीं बल्कि रोज बेसन, हल्दी, चंदन, दूध, केसर, दही, गुलाबजल जैसी सामग्री से उबटन तैयार करके नहाती थीं।
  • गर्मी के कारण त्वचा को इंफ्लेमेशन से बचाने के लिए चंदन का लेप लगाती थीं।
  • त्वचा काे हायड्रेट रखने और पोषण देने के लिए देसी घी और दूध का इस्तेमाल होता था।
  • बालों पर तिल, सरसों का तेल और नारियल के तेल में आंवला, भृंगराज, गुड़हल, मेथी वगैरह डालकर इस्तेमाल करती थीं।
  • बालों को धोने के लिए शीकाकाही, आंवला और रीठा का इस्तेमाल होता था।
  • मौसम के हिसाब से होता था स्किन केयर, गर्मी में चंदन और गुलाब जैसे ठंडक देने वाली सामग्रियों का इस्तेमाल होता था, बारिश में त्वचा की सफाई पर ज्यादा जोर दिया जाता था और सर्दी में त्वचा को मॉश्चराइज करने के लिए घी, बादाम या तिल का तेल इस्तेमाल होता था।

त्रावणकोर राजघराने में हेयर केयर को दिया जाता था महत्व