प्रेग्नेंसी में अनानास से बढ़ सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा, ये 2 फल भी नहीं हैं सुरक्षित

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मुझसे कई महिलाएं पूछती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान कौन से फल नहीं खाने चाहिए और क्या किसी खास फल से कोई समस्या हो सकती है। एक डॉक्टर के तौर पर मैं साफ करना चाहती हूं कि गर्भावस्था में फल डाइट का बहुत जरूरी हिस्सा होते हैं, क्योंकि इनमें विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।


लेकिन इस समय हर फल पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता, जैसे अनानास का अधिक सेवन समय से पहले प्रसव (प्रीमैच्योर डिलीवरी) का खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को यह जानना जरूरी है कि किन फलों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए या किनसे परहेज करना बेहतर है, ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रह सके।
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प्रेग्नेंसी में फल खाना बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन पहली त‍िमाही में पपीता और वो भी खासकर कच्चा या अधपका पपीता खाना ब‍िल्‍कुल भी सुरक्ष‍ित नहीं होता है। यह गर्भाशय में संकुचन (कॉन्ट्रैक्शन) बढ़ा सकता है, जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। इसील‍िए इसे खाने से परहेज करना चाह‍िए। Image- Freepik
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अनानास में एक तत्व पाया जाता है जिसे ब्रोमेलिन कहते हैं। ज्यादा मात्रा में इसे खाने से गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) नरम हो सकती है, जिससे समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है। Image- Freepik
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अंगूर, खासकर प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में, ज्यादा मात्रा में खाने से शरीर के हार्मोन पर असर पड़ सकता है। वहीं, इमली का अधिक सेवन करने से एसिडिटी और पेट में जलन बढ़ सकती है। Image- freepik
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प्रेग्नेंसी में मह‍िलाओं के ल‍िए सुरक्ष‍ित व‍िकल्‍पों में सेब, केला, संतरा, एवोकाडो, अनार और तरबूज जैसे फल आराम से खा सकती हैं। सही मात्रा में फल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और जरूरी विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट व फाइबर भी मिलते हैं। Image- Istock
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सेब और केला के अलावा गर्भावस्था में संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी और अमरूद जैसे फलों का सेवन भी सुरक्षित और जरूरी माना जाता है। इन फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है, जो आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाता है, कोलेजन बनाने में मदद करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। फलों के साथ-साथ लाल व हरी शिमला मिर्च, ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और टमाटर जैसी सब्जियां भी विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, तो मह‍िलाएं इसे भी खा सकती हैं।
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इन फलों के अलावा, कॉफी, चाय जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थ भी प्रेग्‍नेंसी में ज्यादा मात्रा में नहीं लेने चाहिए। इनमें कैफीन और शुगर ज्यादा होती है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए ठीक नहीं मानी जाती। इसके अलावा, बिना पाश्चुरीकृत (कच्चा) दूध या जूस पीने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था में इन पेय पदार्थों का सेवन सीमित या बिल्कुल न करना ही बेहतर होता है। मीठे सोडा वाले पेय में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है, जिससे बेवजह वजन बढ़ सकता है और गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है।
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प्रेग्नेंसी के दौरान महि‍लाओं को पौष्टिक और ताजा आहार का चुनाव करना चाहिए, क्‍योंक‍ि इससे मां को जरूरी पोषण मिलता है और बच्चे का विकास सही तरीके से होता है। ध्‍यान रखें क‍ि गर्भावस्था में संतुलित और समझदारी से चुना गई डाइट एक हेल्‍दी प्रेग्‍नेंसी और बच्चे के लिए एक स्वस्थ शुरुआत सुनिश्चित करती है। Image-Freepik