आमतौर पर यह देखने को मिलता है कि बच्चे दोस्तों के साथ तो खूब हंसते-खेलते हैं, लेकिन कई बार घर आते ही उनका मूड बदल जाता है। वे चिढ़े-चिढ़े रहने लगते हैं या पेरेंट्स से दूरी बनाने लगते हैं। यहां तक कि ढंग से बात तक नहीं करते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को समझ नहीं आता कि आखिर घर आते ही बच्चे का व्यवहार क्यों बदल जाता है। इस बारे में सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉक्टर सुनील मित्तल ने जानकारी दी है। उन्होंने विस्तार से समझाया है कि बच्चे के इस व्यवहार के पीछे की क्या वजह हो सकती है।
डॉक्टर सुनील मित्तल कहते हैं कि अक्सर पेरेंट्स उनसे आकर कहते हैं कि घर में ही उनका बच्चा उनसे कुछ चिढ़ा-चिढ़ा रहता है, जबकि बाहर दोस्तों के साथ वह एकदम खुश रहता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है। Image- Magnific
दरअसल, जब बच्चे को घर में लगातार नैगिंग मिले, जैसे- यहां क्यों बैठे हो, वहां क्यों बैठे हो, अब ये कर लो और अब वो कर लो, या फिर उससे अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन रखी जाएं, या घर का माहौल इमोशनली अनसेफ हो, तो बच्चा बाहर ही रहना चाहेगा।
डॉक्टर मित्तल आगे कहते हैं कि पेरेंट्स यह समझने की कोशिश करें कि कारण कुछ भी हो, लेकिन लगातार इस तरह की डीलिंग से बच्चा इमोशनल एग्जॉर्शन महसूस कर सकता है। ऐसे में अगर बच्चा पेरेंट्स से दूरी बना ले, तो वह क्रूर नहीं होता है, बल्कि अपनी इमोशनल वेलबीइंग के लिए एक बाउंड्री बना रहा होता है।
ऐसे स्थिति में हम दोस्तों और अनजान लोगों को तो आसानी से माफ कर देते हैं, लेकिन जब पेरेंट्स की बात आती है, तो सीना टाइट हो जाता है, पेशेंस लूज हो जाता है और इमोशंस ओवरफ्लो करने लगते हैं। क्योंकि फैमिली के साथ सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आज आपने क्या कहा, बल्कि पहले जो कुछ कहा गया है, उसका असर भी साथ रहता है।