मेरे पास कई ऐसे पेरेंट्स आते हैं जिनकी शिकायत होती है कि बच्चा भरपेट दूध तो पी रहा है, फिर भी उसका वजन नहीं बढ़ रहा (Baby not Gaining Weight)है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे इटिंग डिसऑर्डर, डाइजेस्टिव प्रॉब्लम या अन्य स्वास्थ्य संबंधी वजहें। ऐसे में माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्तनपान के दौरान शिशु सही तरीके से दूध पी रहा हो। नवजात शिशुओं को आमतौर पर हर 2 से 3 घंटे में दूध पिलाने की जरूरत होती है। खासकर शुरुआती महीनों में, दूध पिलाने के बीच बहुत लंबा अंतराल नहीं रखना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखकर शिशु के वजन बढ़ाने में मदद की जा सकती है।
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एक शिशु का वजन अगर सही गति से बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पर्याप्त पोषण मिल रहा है। ध्यान रखें कि बच्चे के जीवन का पहला वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान शिशु तेजी से बढ़ता है। इसी समय उसकी इम्युनिटी मजबूत होती है, शरीर के अंग विकसित होते हैं और कॉन्गेनिटिव स्किल्स यानी कि सीखने-समझने की क्षमता का विकास होता है। Image-Istock
हर शिशु का वजन बढ़ने का तरीका अलग होता है, लेकिन स्वस्थ विकास के कुछ सामान्य संकेत होते हैं। आमतौर पर नवजात शिशु का वजन 2.5 से 3.5 किलो के बीच होता है। ज्यादातर बच्चे 5 महीने तक अपने जन्म के वजन का लगभग दोगुना और 1 साल की उम्र तक करीब तिगुना वजन हासिल कर लेते हैं। शुरुआती महीनों में शिशु तेजी से बढ़ते हैं और उनका वजन लगभग 150 से 200 ग्राम प्रति सप्ताह बढ़ सकता है। 6 महीने के बाद जब बच्चा ज्यादा एक्टिव होने लगता है, तो वजन बढ़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। बच्चे का विकास सही हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए ग्रोथ चार्ट पर नजर रखना और समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। Image- Istock
अगर शिशु का वजन सही तरीके से नहीं बढ़ता, तो उसकी ऊर्जा, विकास के चरण और बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। तेजी से वजन बढ़ने की बजाय धीरे-धीरे और लगातार वजन बढ़ना शिशु के स्वस्थ विकास के लिए ज्यादा अच्छा होता है। इसलिए नियमित और स्थिर वृद्धि ज्यादा जरूरी है। Image-freepik

बच्चे का वजन न बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनकी वजह से शिशु को पर्याप्त भोजन मिलने के बावजूद उसका वजन ठीक से नहीं बढ़ पाता। इन वजहों की जानकारी नीचे दी गई है: 1-इटिंग डिसऑर्डर: अगर शिशु को ब्रेस्टफीडिंग या फॉर्मूला दूध सही तरीके से नहीं दिया जाए, तो उसे पूरा पोषण नहीं मिल पाता। कभी-कभी शिशु ठीक से ब्रेस्टमिल्क को लैच नहीं कर पाते, या बहुत कम समय तक दूध पीते हैं और पीते-पीते सो जाते हैं। इससे उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व पूरी मात्रा में नहीं मिल पाते। 2-पाचन संबंधी समस्याएं: शिशुओं में कुछ स्थितियां, जैसे- एसिड रिफ्लक्स, बार-बार उल्टी होना या शरीर में पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषित न होना भी वजन बढ़ने में बाधा डाल सकती हैं। ऐसी स्थिति में शिशु को पर्याप्त दूध मिलने के बावजूद उसके शरीर को जरूरी पोषक तत्व ठीक से नहीं मिल पाते। 3- एनर्जी की ज्यादा जरूरत: कुछ बच्चों की एनर्जी की जरूरत अधिक होती है क्योंकि वे ज्यादा एक्टिव होते हैं और उनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है। इसका मतलब है कि वे कैलोरी जल्दी खर्च कर देते हैं, इसलिए उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ता है। Image-Istock

4-मेडिकल कंडीशन: कभी-कभी इंफेक्शन, एलर्जी और मेटाबॉलिक डिसआर्डर डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। इन स्थितियों के लक्षण हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। मगर इसकी वजह से वजन प्रभावित हो सकता है। 5- खाने की टाइमिंग: आप अपने शिशु को कितनी बार दूध पिलाती हैं और दो बार खिलाने के बीच कितना समय रखती हैं, यह उसके कैलोरी सेवन को प्रभावित कर सकता है। खासकर छोटे शिशुओं को नियमित अंतराल पर दूध पिलाना जरूरी होता है। Image-Istock

1-सही तरीके से दूध पिलाएं: स्तनपान कराते समय ध्यान रखें कि शिशु सही तरीके से ब्रेस्ट पकड़ रहा हो। 2- बार-बार दूध पिलाएं: नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में दूध पिलाना जरूरी हो सकता है। खासकर शुरुआती महीनों में ज्यादा देर का अंतराल न रखें। 3- पर्याप्त समय तक दूध पिलाएं: शिशु को पर्याप्त देर तक दूध पिलाएं, ताकि उसे शुरुआत और आखिर दोनों तरह का दूध मिल सके। आखिर में आने वाला दूध ज्यादा पोषण और कैलोरी वाला होता है। 4- सही समय पर सॉलिड शुरू करें: 6 महीने के बाद शिशु को मैश किए फल, सब्जियां और अनाज जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ठोस आहार देना शुरू करें। साथ में स्तनपान भी जारी रखें। 5- विकास पर नियमित नजर रखें: शिशु के वजन और उसके विकास पर ध्यान दें, ताकि किसी भी बदलाव या समस्या को समय रहते पहचाना जा सके। Image-Istock

शिशु के वजन बढ़ने में थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव होना सामान्य है। लेकिन अगर कई हफ्तों तक उसका वजन नहीं बढ़ रहा, वह बीमार या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखा रहा है, या उसे लगातार दूध पीने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पीडियाट्रिशन बच्चे की जांच करेंगे और उसकी फीडिंग प्रक्रिया को समझेंगे। जरूरत पड़ने पर वे कुछ टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं, ताकि वजन न बढ़ने की वजह पता चल सके और यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चा सही तरीके से बढ़ रहा है Image-Istock