गर्मी में त्वचा की सुरक्षा: सही सनस्क्रीन का चयन कैसे करें
नई दिल्ली, 23 अप्रैल। गर्मियों में सूरज की तीव्रता केवल पसीना ही नहीं लाती, बल्कि यह त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरे का कारण बन सकती है। तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें स्किन कैंसर, समय से पहले बुढ़ापे और पिगमेंटेशन जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सनस्क्रीन सिर्फ एक कॉस्मेटिक उत्पाद नहीं है, बल्कि यह त्वचा के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है। हालांकि, बाजार में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में से अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार सही चयन करना एक चुनौती है।
यदि आपकी त्वचा ऑयली है, तो भारी क्रीम का उपयोग करने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं और मुहासे हो सकते हैं। ऐसे में जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड सनस्क्रीन का उपयोग करना बेहतर होता है। इस पर 'नॉन-कॉमेडोजेनिक' लिखा होना चाहिए। वहीं, जिनकी त्वचा सूखी या खिंची-खिंची होती है, उन्हें क्रीम-बेस्ड सनस्क्रीन की आवश्यकता होती है, जिसमें हायलूरोनिक एसिड या एलोवेरा जैसे तत्व शामिल होने चाहिए, जो धूप से सुरक्षा के साथ-साथ त्वचा को हाइड्रेटेड और मुलायम बनाए रखें।
मिनरल सनस्क्रीन है समाधान
सेंसिटिव स्किन वाले लोग अक्सर सनस्क्रीन लगाने के बाद जलन या लालिमा की समस्या का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे लोगों को मिनरल सनस्क्रीन का चयन करना चाहिए। इसमें जिंक ऑक्साइड जैसे प्राकृतिक ब्लॉकर्स होते हैं, जो त्वचा पर एक सुरक्षा परत बना देते हैं, जिससे UV किरणें त्वचा के अंदर नहीं जा पातीं। इसमें खुशबू और हानिकारक रसायनों की मात्रा न्यूनतम होनी चाहिए ताकि एलर्जी का खतरा कम हो। सामान्य त्वचा वाले लोग अपनी सुविधा के अनुसार क्रीम या जेल किसी भी विकल्प का चयन कर सकते हैं।
कई लोग मानते हैं कि जब धूप नहीं होती या वे घर के अंदर होते हैं, तो सनस्क्रीन की आवश्यकता नहीं होती। यह एक बड़ी गलतफहमी है। बादल छाए रहने पर भी 80% UV किरणें धरती तक पहुँचती हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि सनस्क्रीन को हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए, खासकर यदि आपको अधिक पसीना आता हो। चेहरे के साथ-साथ गर्दन और हाथों पर भी इसकी पर्याप्त मात्रा लगाना न भूलें, क्योंकि ये हिस्से भी धूप के संपर्क में आते हैं।
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