कौवों का अनोखा शोक: कैसे करते हैं ये पक्षी अपने मृत साथियों का अंतिम संस्कार?
नई दिल्ली: प्रकृति में कई जीव-जंतु ऐसे हैं जो अपनी भावनाओं को गहराई से व्यक्त करते हैं, जिनमें कौवे का व्यवहार सबसे अद्भुत और चौंकाने वाला है। वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अध्ययन से पता चला है कि जब एक कौवा मरता है, तो उसके साथी न केवल शोक मनाते हैं, बल्कि मौत के कारणों की भी जांच करते हैं। अक्सर देखा गया है कि कौवे मृत साथी के शरीर को छूते हैं, उसके चारों ओर बैठते हैं और कभी-कभी वहां पत्तियां या अन्य वस्तुएं रखते हैं। यह दृश्य किसी पारंपरिक अंतिम संस्कार की तरह प्रतीत होता है।
जब किसी क्षेत्र में एक कौवा मरता है, तो दूसरा कौवा तुरंत एक विशेष तेज आवाज निकालता है, जो उनके समुदाय के लिए एक आपातकालीन संकेत होता है। इस आवाज को सुनते ही कुछ ही मिनटों में वहां कई कौवे इकट्ठा हो जाते हैं। वे मृत कौवे के चारों ओर चक्कर लगाते हुए जोर से कांव-कांव करने लगते हैं। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को 'फ्यूनरल गैदरिंग' या 'क्रॉ वेक' कहते हैं।
खुद करते हैं 'पोस्टमॉर्टम'
कौवे अत्यंत जिज्ञासु और बुद्धिमान होते हैं। वे मृत साथी की चोंच और शरीर को छूकर यह जानने की कोशिश करते हैं कि मौत का कारण क्या हो सकता है। वे शरीर पर घाव, जहर या बीमारी के लक्षणों की पहचान करने का प्रयास करते हैं। यदि उन्हें आसपास किसी शिकारी का खतरा महसूस होता है, तो वे अपने समूह को सतर्क कर देते हैं। कौवे उस स्थान को लंबे समय तक याद रखते हैं जहां उनके साथी की मृत्यु हुई थी, जिससे भविष्य में वहां जाने से बचते हैं। यह व्यवहार उनके समूह की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।