महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण और संतुलित आहार के उपाय
देशभर में 40 वर्ष की आयु पार कर चुकी लाखों महिलाएं एक गंभीर समस्या का सामना कर रही हैं, जिसे वे अक्सर उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। अचानक गुस्सा आना, नींद की कमी, शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस करना (हॉट फ्लैशेस) और लगातार थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये सामान्य लक्षण नहीं हैं, बल्कि मेनोपॉज से पहले की स्थिति, जिसे पेरीमेनोपॉज कहा जाता है, के संकेत हैं। प्रसिद्ध स्वास्थ्य इन्फ्लुएंसर और हार्मोन व गट हेल्थ डाइटीशियन मनप्रीत कालरा ने इस समस्या के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट किया है और बताया है कि सही पोषण के माध्यम से महिलाएं इस कठिन समय को सरल बना सकती हैं।
मनप्रीत कालरा के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के अंडाशय से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोनों का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस परिवर्तन को चिकित्सा विज्ञान में पेरीमेनोपॉज कहा जाता है। यह बदलाव शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और मूड में उतार-चढ़ाव आने लगता है। इस स्थिति को सुधारने के लिए कृत्रिम दवाओं या हार्मोन थेरेपी के बजाय, अपनी डाइट में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव करना सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है।
हार्मोन संतुलन के लिए फूड्स
डाइटीशियन मनप्रीत कालरा ने महिलाओं के शरीर में घटते एस्ट्रोजन स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने और हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए 5 शक्तिशाली खाद्य पदार्थों की सूची साझा की है।
अलसी के बीज: अलसी के बीजों में लिग्नांस होते हैं, जो शरीर में जाकर कमजोर एस्ट्रोजन की तरह कार्य करते हैं। इन्हें दही, सलाद या आटे में मिलाकर खाया जा सकता है।
सोया उत्पाद:
टोफू, सोया चंक्स और सोया दूध में फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं, जो मेनोपॉज के दौरान पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।दालें और बीन्स: राजमा, छोले और मसूर जैसे दालें ऊर्जा का स्तर बनाए रखने में मदद करती हैं।
सफेद तिल और हरी सब्जियां: पालक, मेथी और बथुआ जैसे हरी सब्जियां हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में सहायक होती हैं।
अखरोट और ओमेगा-3 फूड्स: अखरोट और अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो सूजन को कम करते हैं और मूड को स्थिर रखते हैं।
मनप्रीत कालरा ने बताया कि केवल सही खानपान से हार्मोन्स संतुलित नहीं हो सकते। महिलाओं को अपनी जीवनशैली में भी सुधार करना होगा। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे वॉक, योग या प्राणायाम को शामिल करें। रात में 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी आवश्यक है। मानसिक तनाव को कम करने के लिए ध्यान का अभ्यास करें, क्योंकि अत्यधिक तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो अन्य हार्मोन्स के कार्य को प्रभावित करता है। यह जीवन का एक सामान्य चरण है, जिसे सही जानकारी और खानपान के माध्यम से स्वस्थ तरीके से जीया जा सकता है।