किशमिश: भिगोई या सूखी, कौन सी है बेहतर?
नई दिल्ली: किशमिश हमारे घरों में एक सामान्य सामग्री है। चाहे वह चावल में हो, हलवे में या नाश्ते में, यह सूखा फल स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में योगदान करता है। हाल के समय में, जब से लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं, यह सवाल उठ रहा है कि किशमिश का सेवन कैसे किया जाए - भिगोकर या सूखा? दोनों ही विधियाँ लाभकारी हैं, लेकिन उनके प्रभाव में अंतर है।
पाचन तंत्र को मिले आराम
भिगोई हुई किशमिश फाइबर और सोर्बिटोल से भरपूर होती है, जो प्राकृतिक रूप से कब्ज को दूर करती है। पानी में भिगोने से यह नरम हो जाती है और पाचन में कोई कठिनाई नहीं होती। कई लोग सुबह खाली पेट 8-10 भिगोई किशमिश का सेवन करते हैं और साथ में पानी पीते हैं, जिससे पूरे दिन पाचन सुचारू रहता है। सूखी किशमिश भी फाइबर प्रदान करती है, लेकिन कभी-कभी इससे पेट में गैस या भारीपन महसूस हो सकता है।
किशमिश में प्राकृतिक शर्करा, आयरन और पोटैशियम होते हैं, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। भिगोने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है, जिससे एनीमिया की समस्या कम होती है। ऑफिस जाने वाले या जिम जाने वाले युवा इसे नाश्ते में शामिल कर सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहता है।
वजन नियंत्रण और हड्डियों की सेहत
सूखी किशमिश मीठी होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाएं। भिगोकर खाने से क्रेविंग कम होती है और वजन बढ़ने का खतरा भी घटता है। इसमें कैल्शियम और पोटैशियम होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। यह महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भिगोई किशमिश त्वचा की चमक बढ़ाती है और फ्री रेडिकल्स से लड़ती है। नियमित सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-खांसी जैसी छोटी-मोटी बीमारियों की संभावना कम होती है।
कैसे खाएं और कितनी मात्रा लें
रात को 8-10 किशमिश को साफ पानी में भिगो दें। सुबह इन्हें चबाकर खाएं और साथ में पानी भी पिएं। सूखी किशमिश को नट्स के साथ मिलाकर ट्रेल मिक्स बना सकते हैं। दिन में 20-30 से ज्यादा न खाएं, अन्यथा वजन बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर से सलाह लेकर ही सेवन करना चाहिए।