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Pancreatic Cancer Symptoms: बेहद जानलेवा है यह बीमारी, वैज्ञानिकों को मिली नई उम्मीद

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कैंसर की दुनिया में पैंक्रियाटिक कैंसर को सबसे कठिन चुनौतियों में से एक माना जाता है। इसे अक्सर एक 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक कि बीमारी काफी आगे न बढ़ जाए। हाल ही में स्पेन से आई एक रिसर्च रिपोर्ट ने चिकित्सा जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। स्पेन के नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (CNIO) के वैज्ञानिकों ने पैंक्रियाटिक कैंसर के सबसे घातक रूप के खिलाफ एक प्रभावी इलाज खोजने का दावा किया है।

रिसर्च में क्या सफलता मिली

वैज्ञानिकों की इस टीम ने चूहों पर किए गए प्रयोगों में तीन दवाओं के एक खास मिश्रण का उपयोग किया। इस कॉम्बिनेशन का परिणाम हैरान करने वाला रहा। लैब में चूहों के पैंक्रियाटिक ट्यूमर न केवल सिकुड़ गए बल्कि पूरी तरह से खत्म हो गए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इलाज के छह साल बाद तक की निगरानी में कैंसर के दोबारा लौटने के कोई संकेत नहीं मिले। आमतौर पर कैंसर की दवाएं एक समय के बाद बेअसर होने लगती हैं क्योंकि कैंसर कोशिकाएं खुद को बदल लेती हैं, लेकिन इस नई थेरेपी ने कोशिकाओं को संभलने का मौका ही नहीं दिया।

क्यों खतरनाक है पैंक्रियाटिक कैंसर

पैंक्रियास यानी अग्न्याशय हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो पाचन के लिए एंजाइम और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन बनाता है। पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा इसका सबसे खतरनाक प्रकार है। यह कैंसर कोशिकाओं के प्रति बहुत प्रतिरोधी होता है और शरीर के अन्य अंगों में बहुत तेजी से फैलता है। अक्सर मरीज को तब पता चलता है जब ट्यूमर का ऑपरेशन करना मुश्किल हो जाता है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 85 प्रतिशत मामलों में निदान तब होता है जब कैंसर फैल चुका होता है।

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण

इस बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर तरीका इसके लक्षणों के प्रति जागरूक रहना है। शुरुआती संकेतों में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना जो धीरे-धीरे पीठ की तरफ जाता है, प्रमुख है। इसके अलावा बिना किसी कारण के वजन कम होना, भूख में कमी और पीलिया इसके बड़े लक्षण हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक से डायबिटीज की समस्या हो जाए या पेशाब का रंग गहरा होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। थकान और पाचन संबंधी समस्याएं भी इस बीमारी की ओर इशारा कर सकती हैं।

कैसे काम करती है नई थेरेपी

इस नई रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि पैंक्रियाटिक कैंसर की कोशिकाएं एक सुरक्षा चक्र बना लेती हैं। CNIO की इस नई थेरेपी में तीन अलग-अलग दवाओं का उपयोग किया गया जो कैंसर कोशिकाओं की विभिन्न जीवन प्रक्रियाओं पर एक साथ हमला करती हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं का रेजिस्टेंस खत्म हो गया। इस रिसर्च को प्रतिष्ठित जर्नल 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में जगह मिली है, जो इसकी प्रमाणिकता को दर्शाता है।

भविष्य की राह और चुनौतियां

हालांकि चूहों पर मिली यह सफलता बहुत उत्साहजनक है, लेकिन इंसानों के लिए इसका उपयोग शुरू होने में अभी समय लगेगा। चूहों का बायोलॉजिकल सिस्टम और इंसानों का सिस्टम अलग होता है। अब इस फॉर्मूले का क्लिनिकल ट्रायल किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह इंसानों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो यह कैंसर विज्ञान के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम होगा और हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
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