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Parenting Tips: बच्चा बात नहीं मानता? बिना डांटे-फटकारे डिसिप्लिन सिखाने के ये 6 आसान और असरदार तरीके अपनाएं

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माता-पिता होना दुनिया का प्यारा एहसास होता है। लेकिन बच्चों को सही राह दिखाना मुश्किल काम होता है। कई बार ऐसा होता है कि बच्चा किसी की बात नहीं सुनता। ऐसे में माता-पिता परेशान होकर उसे डांटने लगते हैं। लेकिन डांट खाने से बच्चे और भी ज्यादा जिद्दी बन जाते हैं। वे डरने लगते हैं। अगर माता-पिता चाहते हैं कि बच्चा बात खुशी से माने, तो parenting tips काम आते हैं।
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ऑप्शन देना है सही तरीका

अक्सर पेरेंट्स बच्चों को सीधे कुछ करने के लिए कहते हैं। जैसे कि पेरेंट्स कहते हैं कि चुपचाप दूध पी लो। इसकी जगह पेरेंट्स बच्चों को चॉइस दे सकते हैं। पेरेंट्स पूछ सकते हैं कि बेटा क्या तुम दूध लाल कप में पियोगे या नीले कप में पियोगे। जब बच्चे से इस तरह पूछा जाता है, तो उसे लगता है कि उसकी पसंद मायने रखती है। इस तरीके से बच्चा बहुत खुशी के साथ बात मान जाता है।

पास जाकर बात करें

जब बच्चा टीवी देख रहा होता है या अपने खेल में मगन होता है, तो दूसरे कमरे से आवाज लगाने का कोई फायदा नहीं होता। ऐसे में दूर से पुकारने पर बच्चा ध्यान नहीं देता। इसलिए बच्चे के पास जाना चाहिए। उसकी आंखों में देखकर शांत आवाज में अपनी बात कहनी चाहिए। माता-पिता की शांत आवाज और आंखों का संपर्क बहुत असरदार होता है। डांटने की तुलना में ये तरीका गहरा असर डालता है।

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नियम बिल्कुल साफ रखें

बच्चों को ये बिल्कुल साफ पता होना चाहिए कि माता-पिता उनसे क्या चाहते हैं। बदमाशी मत करो या अच्छे बच्चे बनो जैसी बातें बच्चों की समझ में नहीं आती हैं। बच्चे इन बातों का मतलब नहीं समझ पाते। इसकी जगह पेरेंट्स को साफ तरीके से अपनी बात बतानी चाहिए। जैसे कि पेरेंट्स कह सकते हैं कि बेटा खिलौनों से खेलने के बाद उन्हें वापस बॉक्स में रखना है। सीधे रूल्स बच्चा आसानी से मान लेगा।

अच्छे काम की तारीफ करें

अक्सर लोग बच्चों की गलतियों पर तुरंत उन्हें टोक देते हैं। लेकिन जब बच्चे कोई अच्छा काम करते हैं, तो लोग उस पर ध्यान नहीं देते। जब बच्चा अपनी प्लेट किचन में रख देता है या किसी की मदद करता है, तो उसकी खूब तारीफ करनी चाहिए। बच्चे को बताना चाहिए कि माता-पिता को उस पर गर्व है। इससे बच्चे को खुशी मिलती है। उसे समझ आता है कि अच्छे काम करने से प्यार मिलता है।


हर बात पर ना न कहें

अगर पेरेंट्स दिन भर बच्चे को हर बात पर टोकेंगे और कहेंगे कि ये मत करो या वो मत छुओ, तो बच्चा उन बातों को अनसुना करना सीख जाएगा। नहीं शब्द का इस्तेमाल सिर्फ उसी समय करना चाहिए जब असली खतरा हो। बाकी समय पॉजिटिव शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे गंदे जूतों के साथ सोफे पर मत चढ़ो कहने की जगह कहें कि बेटा सोफे पर बैठने से पहले अपने जूते उतार लो।

खुद एक अच्छा उदाहरण बनें

बच्चे बड़े लोगों के भाषण सुनकर नहीं सीखते हैं। बच्चे हमेशा अपने माता-पिता को देखकर ही सब कुछ सीखते हैं। अगर पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चा फोन कम देखे, जोर से चिल्लाकर बात न करे या अपना सामान सही जगह पर रखे, तो पेरेंट्स को भी अपनी ये आदतें सुधारनी होंगी। जैसा व्यवहार पेरेंट्स खुद करेंगे, बच्चा बिल्कुल वैसी ही नकल करेगा। इसलिए बच्चों को राह दिखाने के लिए खुद सही काम करें।

प्यार और धैर्य जरूरी है

बच्चों को सही रास्ता दिखाना एक दिन का काम बिल्कुल नहीं है। इसमें बहुत प्यार और धैर्य लगता है। डांटना छोड़कर ऊपर बताए गए इन तरीकों को अपनाना चाहिए। पेरेंट्स खुद देखेंगे कि उनका बच्चा कितनी जल्दी समझदार हो रहा है।



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