ग्लोबल वार्मिंग और कैंसर का नया कारण: प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल पर विशेषज्ञों की चेतावनी

प्लास्टिक से होने वाला नुकसान केवल इसके कचरे तक सीमित नहीं है। इसके पूरे 'लाइफसाइकिल' यानी कच्चे माल के निष्कर्षण से लेकर पॉलीमर उत्पादन और अंत में इसे जलाने तक की प्रक्रिया जहरीली है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें, सूक्ष्म कण और खतरनाक रसायन सीधे तौर पर मानव शरीर को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
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अध्ययन में यह पाया गया है कि प्लास्टिक के शुरुआती उत्पादन के चरण और इस्तेमाल के बाद इसे खुले में जलाने की वजह से सबसे अधिक स्वास्थ्य हानि होती है। इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि कैंसर और श्वसन संबंधी अन्य गंभीर रोगों का खतरा भी तेजी से पनप रहा है।

2040 तक गहराएगा संकट

शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि प्लास्टिक सिस्टम से होने वाला कुल उत्सर्जन, जिसमें वायु प्रदूषक और कारखानों से निकलने वाले टॉक्सिक केमिकल शामिल हैं, स्वास्थ्य पर गहरा आघात कर रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रणालियों पर इसका बोझ असहनीय हो जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लास्टिक का वैश्विक उत्पादन 2100 तक अपने चरम पर नहीं पहुँचना चाहिए, क्योंकि वर्तमान ढांचा पहले से ही ओवरलोडेड है।