बार-बार इस्तेमाल करते हैं खाना पकाने वाला तेल? जानें सेहत पर इसके नुकसान और सुरक्षित इस्तेमाल के तरीके
खाना पकाने वाले तेल का दोबारा इस्तेमाल करना कई घरों में आम बात है। खासकर पकौड़े, पूरी, समोसे और फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें तलने के बाद बचा हुआ तेल छानकर दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है। इससे तेल की बर्बादी कम होती है और पैसे भी बचते हैं। लेकिन क्या बार-बार गर्म किए गए तेल का इस्तेमाल करना सेहत के लिए सुरक्षित है? विशेषज्ञों के अनुसार, तेल को बार-बार तेज तापमान पर गर्म करने से उसकी गुणवत्ता बदल सकती है और उसमें कुछ हानिकारक रासायनिक तत्व बनने लगते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा कब इस्तेमाल किया जा सकता है और कब उसे फेंक देना चाहिए।
इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। तेल का दोबारा इस्तेमाल करने से रसोई का खर्च कम हो सकता है, खाने की बर्बादी घट सकती है और खाना बनाना सुविधाजनक हो जाता है। अगर तेल का इस्तेमाल सावधानी से किया गया हो और उसकी गुणवत्ता खराब न हुई हो, तो कुछ परिस्थितियों में उसका सीमित पुनः उपयोग संभव हो सकता है।
हालांकि, तेल को छानने से उसमें मौजूद खाने के टुकड़े और अन्य ठोस कण तो निकल जाते हैं, लेकिन गर्म करने के दौरान बनने वाले सभी रासायनिक यौगिक खत्म नहीं होते। तेल जितनी बार तेज गर्मी, हवा और खाने के अवशेषों के संपर्क में आता है, उसके खराब होने की आशंका उतनी ही बढ़ सकती है।
इसलिए तेल को दोबारा इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं, यह उसके प्रकार, गर्म करने के तापमान, इस्तेमाल की अवधि, उसमें तली गई चीजों और पहले किए गए इस्तेमाल की संख्या पर निर्भर करता है।
इनमें से कुछ तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है, जिसमें शरीर में हानिकारक प्रतिक्रियाशील अणुओं की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर की एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा उन्हें पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं कर पाती।
लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बने रहने का संबंध कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और कई पुरानी बीमारियों से पाया गया है। हालांकि, तेल में बनने वाले तत्वों की मात्रा उसके प्रकार और इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
तेल खराब होने पर उसका रंग गहरा हो सकता है, गंध बदल सकती है और उसमें झाग बनने लग सकता है। इससे तेल में तले गए खाने के स्वाद और बनावट पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि तेल के खराब होने के सभी संकेत तुरंत दिखाई दें। कई बार तेल में रासायनिक बदलाव हो चुके होते हैं, जबकि उसका रंग और गंध सामान्य नजर आते हैं।
बार-बार गर्म करने से तेल में मौजूद कुछ एंटीऑक्सीडेंट कम हो सकते हैं। इससे तेल की गुणवत्ता धीरे-धीरे घट सकती है और उसके ऑक्सीडेशन की आशंका बढ़ सकती है।
इनकी मात्रा तेल के प्रकार, तापमान, गर्म करने की अवधि और स्टोरेज के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं है कि हर प्रकार के तेल को एक तय संख्या में इस्तेमाल करने के बाद वह हमेशा सुरक्षित रहेगा।
प्रयोगशालाओं और जानवरों पर किए गए अध्ययनों में इन प्रभावों की जांच की गई है। हालांकि, इन निष्कर्षों से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि सामान्य मात्रा में दोबारा इस्तेमाल किए गए तेल का सेवन करने से इंसानों में भी वही प्रभाव होंगे।
अनहेल्दी फैट से भरपूर आहार का संबंध हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम से है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि इस्तेमाल किए गए तेल की हर मात्रा सीधे दिल की बीमारी का कारण बनती है।
इस विषय पर उपलब्ध कई निष्कर्ष जानवरों और प्रयोगशालाओं में किए गए शोध से आते हैं। इंसानों में वास्तविक जोखिम को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
हालांकि, इन अध्ययनों के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि दोबारा इस्तेमाल किया गया तेल सीधे कैंसर, अल्जाइमर रोग या अन्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर उपलब्ध प्रमाणों की मजबूती भी अलग है।
इसलिए सबसे व्यावहारिक तरीका यही है कि तेल को लंबे समय तक गर्म करने और बार-बार इस्तेमाल करने से बचें।
भारतीय खाद्य सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों में इस्तेमाल किए गए तेल की गुणवत्ता और खराब होने के संकेतों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। दो से तीन बार इस्तेमाल करने जैसे सामान्य नियम को सुरक्षा की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
अगर तेल को बहुत तेज तापमान पर गर्म किया गया है, उसमें खाने के अवशेष जमा हो गए हैं या वह लंबे समय तक गर्म होता रहा है, तो उसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद भी फेंकना पड़ सकता है।
अगर तेल का रंग, गंध या बनावट बदल गई है, तो इस्तेमाल की संख्या चाहे जो हो, उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। संदेह होने पर नया तेल इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।
ये अवशेष अगली बार गर्म करने पर जल सकते हैं और तेल के खराब होने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। ध्यान रखें कि छानने से ठोस कण निकलते हैं, लेकिन तेल में घुले हुए हानिकारक रासायनिक तत्व नहीं हटते।
इसे धूप, गर्मी और नमी से दूर ठंडी तथा अंधेरी जगह पर रखें। तेल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए हवा और रोशनी के संपर्क को कम करना जरूरी है।
पुराने तेल में नया तेल मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाने से बचें, क्योंकि इससे तेल की वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
तेल को ठंडा होने दें, फिर उसे उपयुक्त कंटेनर में भरकर स्थानीय कचरा प्रबंधन या इस्तेमाल किए गए तेल को इकट्ठा करने वाली व्यवस्था के अनुसार निपटाएं।
भारतीय रसोई में मूंगफली का तेल और सरसों का तेल आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा, तेज तापमान पर खाना पकाने के लिए उपयुक्त रिफाइंड तेल भी विकल्प हो सकते हैं।
हालांकि, कोई भी तेल ऐसा नहीं है जो बार-बार बहुत तेज गर्मी के संपर्क में आने पर बिल्कुल न बदले।
तेल चुनते और इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
खाना पकाने वाले तेल को बार-बार इस्तेमाल करना भले ही किफायती लगे, लेकिन लगातार गर्म करने से उसमें ऑक्सीडेशन, पॉलीमराइजेशन और अन्य रासायनिक बदलाव हो सकते हैं। इससे तेल की गुणवत्ता घट सकती है और खराब हो चुके तेल का नियमित सेवन स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा सकता है।
तेल को छानकर सही तरीके से स्टोर करने से आगे होने वाली गिरावट धीमी हो सकती है, लेकिन पहले से खराब तेल की गुणवत्ता वापस नहीं आती। इसलिए केवल इस्तेमाल की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय यह भी देखें कि तेल को कैसे गर्म किया गया, किस तरह रखा गया और क्या उसमें खराब होने के संकेत हैं।
अगर तेल की सुरक्षा को लेकर संदेह है, तो उसे फेंककर ताजा तेल इस्तेमाल करें। रसोई में बर्बादी कम करना जरूरी है, लेकिन सेहत की सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
खाना पकाने वाले तेल को दोबारा इस्तेमाल क्यों करते हैं?
डीप फ्राई करने के बाद अक्सर कड़ाही में काफी मात्रा में तेल बच जाता है। इसे फेंकने के बजाय कई लोग ठंडा करके छान लेते हैं और अगली बार खाना बनाने के लिए रख देते हैं।इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। तेल का दोबारा इस्तेमाल करने से रसोई का खर्च कम हो सकता है, खाने की बर्बादी घट सकती है और खाना बनाना सुविधाजनक हो जाता है। अगर तेल का इस्तेमाल सावधानी से किया गया हो और उसकी गुणवत्ता खराब न हुई हो, तो कुछ परिस्थितियों में उसका सीमित पुनः उपयोग संभव हो सकता है।
हालांकि, तेल को छानने से उसमें मौजूद खाने के टुकड़े और अन्य ठोस कण तो निकल जाते हैं, लेकिन गर्म करने के दौरान बनने वाले सभी रासायनिक यौगिक खत्म नहीं होते। तेल जितनी बार तेज गर्मी, हवा और खाने के अवशेषों के संपर्क में आता है, उसके खराब होने की आशंका उतनी ही बढ़ सकती है।
इसलिए तेल को दोबारा इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं, यह उसके प्रकार, गर्म करने के तापमान, इस्तेमाल की अवधि, उसमें तली गई चीजों और पहले किए गए इस्तेमाल की संख्या पर निर्भर करता है।
बार-बार तेल गर्म करने से क्या होता है?
खाना पकाने वाले तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें कई रासायनिक बदलाव हो सकते हैं। इन बदलावों का असर तेल के स्वाद, गंध, बनावट और पोषण संबंधी गुणों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक गर्म करने या एक ही तेल को कई बार इस्तेमाल करने से ये बदलाव अधिक गंभीर हो सकते हैं।1. ऑक्सीडेशन से बन सकते हैं हानिकारक तत्व
जब तेल तेज तापमान पर हवा के संपर्क में आता है, तो उसमें ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इस दौरान एल्डिहाइड जैसे कुछ रासायनिक यौगिक और अन्य ऑक्सीडेशन उत्पाद बन सकते हैं।इनमें से कुछ तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है, जिसमें शरीर में हानिकारक प्रतिक्रियाशील अणुओं की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर की एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा उन्हें पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं कर पाती।
लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बने रहने का संबंध कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और कई पुरानी बीमारियों से पाया गया है। हालांकि, तेल में बनने वाले तत्वों की मात्रा उसके प्रकार और इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
2. तेल की गुणवत्ता खराब होने लगती है
तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें पॉलीमराइजेशन जैसी रासायनिक प्रक्रियाएं हो सकती हैं। इसके कारण बड़े आकार के यौगिक बनने लगते हैं, जिससे तेल गाढ़ा, चिपचिपा और इस्तेमाल करने में मुश्किल हो सकता है।तेल खराब होने पर उसका रंग गहरा हो सकता है, गंध बदल सकती है और उसमें झाग बनने लग सकता है। इससे तेल में तले गए खाने के स्वाद और बनावट पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि तेल के खराब होने के सभी संकेत तुरंत दिखाई दें। कई बार तेल में रासायनिक बदलाव हो चुके होते हैं, जबकि उसका रंग और गंध सामान्य नजर आते हैं।
3. पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट में कमी आ सकती है
कुछ खाना पकाने वाले तेलों में विटामिन ई और अन्य प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं।बार-बार गर्म करने से तेल में मौजूद कुछ एंटीऑक्सीडेंट कम हो सकते हैं। इससे तेल की गुणवत्ता धीरे-धीरे घट सकती है और उसके ऑक्सीडेशन की आशंका बढ़ सकती है।
4. हानिकारक रासायनिक यौगिक जमा हो सकते हैं
तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें एल्डिहाइड और अन्य ध्रुवीय यौगिकों जैसे तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है। कुछ खास परिस्थितियों में अन्य संभावित हानिकारक पदार्थ भी बन सकते हैं।इनकी मात्रा तेल के प्रकार, तापमान, गर्म करने की अवधि और स्टोरेज के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं है कि हर प्रकार के तेल को एक तय संख्या में इस्तेमाल करने के बाद वह हमेशा सुरक्षित रहेगा।
बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल से सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं?
खराब हो चुके तेल का नियमित सेवन करने से शरीर में ऑक्सीडेशन से बनने वाले तत्वों और अन्य अवांछित यौगिकों का संपर्क बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने बार-बार गर्म किए गए तेल और कई स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन किया है।ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन का खतरा
ऑक्सीडाइज्ड फैट और उनसे बनने वाले कुछ तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस तथा सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।प्रयोगशालाओं और जानवरों पर किए गए अध्ययनों में इन प्रभावों की जांच की गई है। हालांकि, इन निष्कर्षों से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि सामान्य मात्रा में दोबारा इस्तेमाल किए गए तेल का सेवन करने से इंसानों में भी वही प्रभाव होंगे।
दिल की सेहत पर पड़ सकता है असर
तेल को बार-बार गर्म करने से उसकी फैटी एसिड संरचना और अन्य रासायनिक गुण बदल सकते हैं। इससे खाने में इस्तेमाल होने वाले फैट की पोषण संबंधी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।अनहेल्दी फैट से भरपूर आहार का संबंध हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम से है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि इस्तेमाल किए गए तेल की हर मात्रा सीधे दिल की बीमारी का कारण बनती है।
लिवर पर संभावित प्रभाव
लिवर शरीर में फैट और अन्य पदार्थों को प्रोसेस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ प्रयोगात्मक अध्ययनों में यह जांचा गया है कि लंबे समय तक बार-बार गर्म किए गए तेल का सेवन लिवर की कार्यप्रणाली और ऑक्सीडेटिव नुकसान को प्रभावित कर सकता है या नहीं।इस विषय पर उपलब्ध कई निष्कर्ष जानवरों और प्रयोगशालाओं में किए गए शोध से आते हैं। इंसानों में वास्तविक जोखिम को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
लंबे समय में अन्य बीमारियों को लेकर चिंताएं
कुछ अध्ययनों में बार-बार गर्म किए गए तेल और कुछ प्रकार के कैंसर तथा न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बीच संभावित संबंधों की जांच की गई है।हालांकि, इन अध्ययनों के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि दोबारा इस्तेमाल किया गया तेल सीधे कैंसर, अल्जाइमर रोग या अन्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर उपलब्ध प्रमाणों की मजबूती भी अलग है।
इसलिए सबसे व्यावहारिक तरीका यही है कि तेल को लंबे समय तक गर्म करने और बार-बार इस्तेमाल करने से बचें।
खाना पकाने वाले तेल को कितनी बार दोबारा इस्तेमाल करना चाहिए?
तेल को दोबारा इस्तेमाल करने की कोई एक निश्चित संख्या सभी परिस्थितियों में सुरक्षित होने की गारंटी नहीं देती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि तेल को कितनी देर और किस तापमान पर गर्म किया गया, उसमें क्या पकाया गया और उसे किस तरह रखा गया।भारतीय खाद्य सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों में इस्तेमाल किए गए तेल की गुणवत्ता और खराब होने के संकेतों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। दो से तीन बार इस्तेमाल करने जैसे सामान्य नियम को सुरक्षा की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
अगर तेल को बहुत तेज तापमान पर गर्म किया गया है, उसमें खाने के अवशेष जमा हो गए हैं या वह लंबे समय तक गर्म होता रहा है, तो उसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद भी फेंकना पड़ सकता है।
अगर तेल का रंग, गंध या बनावट बदल गई है, तो इस्तेमाल की संख्या चाहे जो हो, उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। संदेह होने पर नया तेल इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।
बचे हुए तेल को सुरक्षित तरीके से कैसे स्टोर करें?
अगर आप इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा उपयोग करना चाहते हैं, तो सही तरीके से संभालने और स्टोर करने से उसकी गुणवत्ता में और गिरावट आने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। हालांकि, इससे पहले से खराब हो चुके तेल की गुणवत्ता वापस नहीं आती।1. तेल को ठंडा होने दें
खाना तलने के बाद गैस बंद कर दें और तेल को ठंडा होने दें। गर्म तेल को किसी बंद कंटेनर में डालने से बचें, क्योंकि इससे जलने और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा हो सकता है।2. तेल को अच्छी तरह छानें
तेल पर्याप्त ठंडा होने पर उसे महीन छलनी या उपयुक्त फिल्टर से छान लें। इससे उसमें मौजूद खाने के टुकड़े, ब्रेडक्रम्ब्स और अन्य ठोस कण निकल जाएंगे।ये अवशेष अगली बार गर्म करने पर जल सकते हैं और तेल के खराब होने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। ध्यान रखें कि छानने से ठोस कण निकलते हैं, लेकिन तेल में घुले हुए हानिकारक रासायनिक तत्व नहीं हटते।
3. साफ और एयरटाइट कंटेनर में रखें
तेल को साफ, सूखे और खाने की चीजें रखने के लिए उपयुक्त कंटेनर में भरें। कंटेनर का ढक्कन अच्छी तरह बंद होना चाहिए।इसे धूप, गर्मी और नमी से दूर ठंडी तथा अंधेरी जगह पर रखें। तेल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए हवा और रोशनी के संपर्क को कम करना जरूरी है।
पुराने तेल में नया तेल मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाने से बचें, क्योंकि इससे तेल की वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
4. तेल खराब होने के संकेत पहचानें
अगर तेल में नीचे दिए गए बदलाव दिखाई दें, तो उसे फेंक देना बेहतर है:- तेल का रंग पहले की तुलना में काफी गहरा हो जाना।
- तेल का असामान्य रूप से गाढ़ा या चिपचिपा हो जाना।
- गर्म करते समय लगातार झाग बनना।
- तेल से बासी या अप्रिय गंध आना।
- सामान्य तापमान पर भी तेल से बहुत ज्यादा धुआं निकलना।
5. इस्तेमाल किए गए तेल को सही तरीके से फेंकें
बड़ी मात्रा में बचे हुए तेल को सीधे सिंक में न डालें। इससे पाइप जाम हो सकते हैं और नालियों में रुकावट आ सकती है।तेल को ठंडा होने दें, फिर उसे उपयुक्त कंटेनर में भरकर स्थानीय कचरा प्रबंधन या इस्तेमाल किए गए तेल को इकट्ठा करने वाली व्यवस्था के अनुसार निपटाएं।
खाना पकाने के लिए कौन-सा तेल बेहतर है?
तेल की स्थिरता उसकी फैटी एसिड संरचना, प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और प्रोसेसिंग के तरीके पर निर्भर करती है। मोनोअनसैचुरेटेड फैट से भरपूर कुछ तेल खाना पकाने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं, लेकिन सही तेल का चुनाव इस्तेमाल के तापमान और पकाने के तरीके के अनुसार करना चाहिए।भारतीय रसोई में मूंगफली का तेल और सरसों का तेल आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अलावा, तेज तापमान पर खाना पकाने के लिए उपयुक्त रिफाइंड तेल भी विकल्प हो सकते हैं।
हालांकि, कोई भी तेल ऐसा नहीं है जो बार-बार बहुत तेज गर्मी के संपर्क में आने पर बिल्कुल न बदले।
तेल चुनते और इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- खाना पकाने के तरीके के अनुसार तेल चुनें: तेल के इस्तेमाल और स्मोक पॉइंट से जुड़ी जानकारी देखें।
- तेल को जरूरत से ज्यादा गर्म न करें: अगर तेल से लगातार धुआं निकलने लगे, तो गर्म करना बंद कर दें।
- लंबे समय तक गर्म करने से बचें: लगातार गर्म रहने से तेल में रासायनिक बदलाव तेज हो सकते हैं।
- अलग-अलग इस्तेमाल किए गए तेल न मिलाएं: हर तेल की संरचना और गुणवत्ता अलग हो सकती है।
- मछली तलने के बाद उसी तेल को बार-बार दूसरे व्यंजनों के लिए इस्तेमाल न करें: खाने के अवशेष और गंध तेल की गुणवत्ता तथा स्वाद को प्रभावित कर सकते हैं।
तेल की बर्बादी कम करने के आसान तरीके
तेल की बर्बादी कम करने के लिए उसे बार-बार इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। खाना पकाने की कुछ आदतों में बदलाव करके तेल की खपत कम की जा सकती है।- जरूरत के अनुसार छोटी और गहरी कड़ाही का इस्तेमाल करें, ताकि तलने के लिए कम तेल की जरूरत पड़े।
- जहां संभव हो, डीप फ्राई करने के बजाय शैलो फ्राई, सॉटे, बेकिंग या एयर फ्राइंग जैसे विकल्प अपनाएं।
- खाने को छोटे बैच में तलें, ताकि तेल को लंबे समय तक गर्म न रखना पड़े।
- तेल को सीधे बोतल से डालने के बजाय पहले उसकी मात्रा माप लें।
- नए तेल को सही तरीके से स्टोर करें, ताकि इस्तेमाल से पहले उसकी गुणवत्ता बनी रहे।
खाना पकाने वाले तेल को बार-बार इस्तेमाल करना भले ही किफायती लगे, लेकिन लगातार गर्म करने से उसमें ऑक्सीडेशन, पॉलीमराइजेशन और अन्य रासायनिक बदलाव हो सकते हैं। इससे तेल की गुणवत्ता घट सकती है और खराब हो चुके तेल का नियमित सेवन स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा सकता है।
तेल को छानकर सही तरीके से स्टोर करने से आगे होने वाली गिरावट धीमी हो सकती है, लेकिन पहले से खराब तेल की गुणवत्ता वापस नहीं आती। इसलिए केवल इस्तेमाल की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय यह भी देखें कि तेल को कैसे गर्म किया गया, किस तरह रखा गया और क्या उसमें खराब होने के संकेत हैं।
अगर तेल की सुरक्षा को लेकर संदेह है, तो उसे फेंककर ताजा तेल इस्तेमाल करें। रसोई में बर्बादी कम करना जरूरी है, लेकिन सेहत की सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
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