Rabies Risk: शेर-बाघ के काटने से भी हो सकता है रेबीज? जानें कब बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
रेबीज का जिक्र होते ही आमतौर पर लोगों के मन में कुत्ते के काटने की बात आती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इंसानों में होने वाले रेबीज के अधिकांश मामलों में संक्रमित कुत्ते प्रमुख स्रोत होते हैं। हालांकि, रेबीज का वायरस केवल कुत्तों तक सीमित नहीं है। संक्रमित होने पर दूसरे स्तनधारी जानवरों के काटने या उनकी संक्रमित लार के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
क्या शेर और बाघ से भी हो सकता है रेबीज?
रेबीज संक्रमित स्तनधारी जानवर की लार के जरिए फैल सकता है। काटने के दौरान त्वचा पर बने घाव के रास्ते वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। खुले घाव के अलावा संक्रमित लार का आंख, नाक या मुंह की अंदरूनी सतह से संपर्क भी जोखिम पैदा कर सकता है।
रेबीज एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। शुरुआती दौर में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और काटे गए स्थान पर दर्द, झनझनाहट, खुजली या जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
बीमारी बढ़ने पर बेचैनी, भ्रम, निगलने में परेशानी और पानी से डर लगने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। लक्षण आने के बाद बीमारी बेहद गंभीर हो सकती है, इसलिए संभावित एक्सपोजर के बाद समय पर चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
रेबीज का जोखिम केवल जानवर के काटने तक सीमित नहीं है। यदि किसी संक्रमित जानवर की लार किसी ताजे घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आती है, तो भी चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।
इसलिए जंगली जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के संदिग्ध संपर्क को मामूली चोट मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जानवर के काटने पर तुरंत क्या करें?
किसी जानवर के काटने या खरोंचने के बाद सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
कुत्ते के अलावा दूसरे जानवरों से भी रहें सावधान
रेबीज घरेलू और जंगली दोनों तरह के स्तनधारी जानवरों को संक्रमित कर सकता है। इंसानों में संक्रमण का प्रमुख स्रोत संक्रमित कुत्ते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि जंगली जानवरों के काटने को नजरअंदाज किया जा सकता है।
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