Ceiling Fan Speed Tips: धीमा चल रहा है छत का पंखा? इन 5 आसान तरीकों से घर बैठे बढ़ाएं स्पीड
जब गर्मियों में पारा अपने चरम पर होता है, तब एक धीमा चलने वाला सीलिंग फैन कमरे को भट्टी जैसा बना देता है। आप रेगुलेटर को बढ़ाकर फुल स्पीड पर भी कर देते हैं, लेकिन पंखे की पंखुड़ियां (ब्लेड्स) कछुए की रफ्तार से ही घूमती रहती हैं। इससे पहले कि आप यह मान लें कि पंखा खराब हो चुका है और नया खरीदने के लिए हजारों रुपये खर्च करने की सोचें, आपको यह समझना होगा कि स्पीड कम होने का मतलब हमेशा मोटर का जलना नहीं होता।
सच तो यह है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में पंखे की रफ्तार कम होने की वजह बिजली की सामान्य खराबी, पार्ट्स का घिसना या बेयरिंग में रुकावट होना होती है। अगर आप सही तरीके से जांच करें, तो इन 5 आसान उपायों से असली समस्या का पता लगाकर पंखे को फिर से फुल स्पीड में ला सकते हैं।
"Free Spin" टेस्ट से करें जांच
पंखे के तारों या अंदरूनी हिस्सों को हाथ लगाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि दिक्कत मैकेनिकल है या इलेक्ट्रिकल।
ऐसे करें चेक: सबसे पहले पंखे का पावर स्विच पूरी तरह बंद कर दें और एक मजबूत सीढ़ी की मदद से ऊपर पहुंचें। अब अपने हाथ से पंखे की पंखुड़ियों को धीरे से घुमाकर देखें।
नतीजा: अगर पंखुड़ियां बिना किसी रुकावट के बिल्कुल स्मूथ घूमती हैं और हाथ हटाने के बाद भी काफी देर तक घूमती रहती हैं, तो इसका मतलब मैकेनिकल系统 ठीक है और खराबी इलेक्ट्रिकल वायरिंग या पार्ट्स में है। लेकिन, अगर पंखुड़ियां भारी महसूस होती हैं, घूमने में जोर लगाती हैं या रगड़ खाकर तुरंत रुक जाती हैं, तो अंदर की बॉल बेयरिंग में खराबी आ चुकी है।
कमजोर या खराब कैपेसिटर को बदलें
अगर आपका पंखा हाथ से घुमाने पर तो बिल्कुल सही घूम रहा है, लेकिन स्विच चालू करने पर उसकी रफ्तार बेहद सुस्त है, तो इसकी वजह खराब कैपेसिटर (कंडेंसर) हो सकता है। कैपेसिटर एक छोटे पावर बैकअप की तरह काम करता, जो मोटर को शुरुआती टॉर्क (घूमने की ताकत) देता है ताकि पंखा तेज रफ्तार पकड़ सके।
समस्या: सालों तक लगातार चलने या बिजली के उतार-चढ़ाव (वोल्टेज फ्लक्चुएशन) के कारण कैपेसिटर कमजोर हो जाता है। जब इसकी क्षमता कम हो जाती है, तो यह मोटर को पर्याप्त पावर नहीं दे पाता और पंखे की स्पीड बहुत कम हो जाती है।
समाधान: सबसे पहले मेन एमसीबी (MCB) को बंद कर दें। पंखे के ऊपरी हिस्से (कैनोपी कवर) को नीचे खिसकाएं ताकि अंदर की वायरिंग दिखने लगे। वहाँ आपको एक छोटा सफेद या काले रंग का प्लास्टिक का डिब्बा दिखाई देगा, यही कैपेसिटर है। इस पर लिखी रेटिंग चेक करें। भारत में घरों में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पंखों में 2.25 माइक्रोफैराड (mfd) का कैपेसिटर होता है।
अब इसके दोनों तारों को सावधानी से काटें और बाजार से उसी रेटिंग का नया कैपेसिटर लाकर लगा दें (यह लोकल हार्डवेयर की दुकान पर 50 रुपये से भी कम में मिल जाता है)। इसके बाद तारों पर अच्छी तरह से इलेक्ट्रिकल इंसुलेशन टेप लपेट दें।
सुरक्षा सलाह: पंखे को ज्यादा तेज भगाने के चक्कर में कभी भी बड़ी रेटिंग का कैपेसिटर (जैसे कृषि पंपों में इस्तेमाल होने वाला) न लगाएं। बहुत ज्यादा पावर मिलने से मोटर के तांबे के तार (वाइंडिंग) गर्म होकर कुछ ही हफ्तों में जल सकते हैं।
बॉल बेयरिंग की सफाई और ऑयलिंग है जरूरी
अगर हाथ से घुमाने पर पंखा जाम या भारी महसूस हो रहा था, तो इसका मतलब है कि उसकी अंदरूनी बॉल बेयरिंग में गंदगी जमा हो गई है या उसका लुब्रिकेंट (ग्रीस) सूख चुका है।
समस्या: पंखे लगातार धूल-मिट्टी के बीच चलते हैं। समय के साथ हवा में मौजूद धूल, रसोई का धुआं और चिपचिपाहट पंखे के अंदर घुसकर ग्रीस के साथ मिल जाती है। यह मिश्रण एक गाढ़े और खुरदरे पेस्ट में बदल जाता है, जिससे बेयरिंग जाम होने लगती है और पंखे की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
समाधान: पावर सप्लाई बंद करने के बाद, पंखे के बीच वाले घूमने वाले हिस्से (स्पिंडल) के आसपास जमी गंदगी को साफ करें। इसके बाद बेयरिंग के ऊपर और नीचे वाले ट्रैक में अच्छे ग्रेड का मशीन ऑयल या सिलाई मशीन वाला तेल डालें। तेल डालने के बाद पंखुड़ियों को हाथ से आगे-पीछे घुमाएं ताकि तेल अंदर तक चला जाए।
ध्यान रखें कि लंबे समय के लुब्रिकेशन के लिए डब्ल्यूडी-40 (WD-40) का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह बहुत जल्दी सूख जाता है और अंदर बचे हुए ग्रीस को भी साफ कर देता है।
पंखुड़ियों पर जमी भारी धूल को साफ करें
यह एक ऐसी वजह है जिस पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता, लेकिन इसे ठीक करने के लिए किसी तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती है।
समस्या: जब पंखे की पंखुड़ियां तेज हवा को काटती हैं, तो स्टेटिक चार्ज की वजह से उनके किनारों और नीचे के हिस्से पर धूल की एक मोटी परत जमा हो जाती है। धूल की यह परत पंखुड़ियों के एयरोडायनामिक डिजाइन (हवा काटने की क्षमता) को बिगाड़ देती है जिससे हवा का रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। साथ ही वजन बढ़ने से मोटर पर दबाव पड़ता है और स्पीड कम हो जाती है।
समाधान: एक आसान घरेलू तरीका अपनाएं। एक पुराना तकिए का कवर (पिलोकेस) लें और उसे पंखे की एक पंखुड़ी के ऊपर पूरी तरह चढ़ा दें। अब कपड़े को पंखुड़ी पर दोनों तरफ से दबाते हुए पीछे की तरफ खींचें। इससे सारी जमी हुई गंदगी कपड़े के अंदर ही सिमट जाएगी और धूल आपके फर्नीचर या फर्श पर नीचे नहीं गिरेगी।
खराब या पुराने रेगुलेटर को चेक करें
कई बार समस्या छत पर लगे पंखे में नहीं, बल्कि दीवार पर लगे आपके स्विच बोर्ड के अंदर होती है।
समस्या: पुराने जमाने के बड़े और भारी वायर-रेसिस्टेंस वाले रेगुलेटर समय के साथ घिस जाते हैं। वहीं आजकल आने वाले सस्ते इलेक्ट्रॉनिक स्टेप-रेगुलेटर भी अंदरूनी पार्ट्स खराब होने के कारण वोल्टेज को ठीक से पास नहीं कर पाते। रेगुलेटर में खराबी आने से सर्किट में वोल्टेज ड्रॉप होने लगता है, जिससे रेगुलेटर को फुल (स्टेप 5) पर करने के बाद भी पंखे को पूरी बिजली नहीं मिल पाती।
समाधान: इसकी जांच करना बहुत आसान है। आप कुछ समय के लिए रेगुलेटर के तारों को हटाकर पंखे के तार को सीधे ऑन/ऑफ (ON/OFF) स्विच से जोड़ दें। अगर स्विच चालू करते ही पंखा तुरंत अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेता है, तो समझ जाएं कि आपका रेगुलेटर ही खराब है और उसे तुरंत बदलने की जरूरत है।
सच तो यह है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में पंखे की रफ्तार कम होने की वजह बिजली की सामान्य खराबी, पार्ट्स का घिसना या बेयरिंग में रुकावट होना होती है। अगर आप सही तरीके से जांच करें, तो इन 5 आसान उपायों से असली समस्या का पता लगाकर पंखे को फिर से फुल स्पीड में ला सकते हैं।
"Free Spin" टेस्ट से करें जांच
पंखे के तारों या अंदरूनी हिस्सों को हाथ लगाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि दिक्कत मैकेनिकल है या इलेक्ट्रिकल। ऐसे करें चेक: सबसे पहले पंखे का पावर स्विच पूरी तरह बंद कर दें और एक मजबूत सीढ़ी की मदद से ऊपर पहुंचें। अब अपने हाथ से पंखे की पंखुड़ियों को धीरे से घुमाकर देखें।
नतीजा: अगर पंखुड़ियां बिना किसी रुकावट के बिल्कुल स्मूथ घूमती हैं और हाथ हटाने के बाद भी काफी देर तक घूमती रहती हैं, तो इसका मतलब मैकेनिकल系统 ठीक है और खराबी इलेक्ट्रिकल वायरिंग या पार्ट्स में है। लेकिन, अगर पंखुड़ियां भारी महसूस होती हैं, घूमने में जोर लगाती हैं या रगड़ खाकर तुरंत रुक जाती हैं, तो अंदर की बॉल बेयरिंग में खराबी आ चुकी है।
कमजोर या खराब कैपेसिटर को बदलें
अगर आपका पंखा हाथ से घुमाने पर तो बिल्कुल सही घूम रहा है, लेकिन स्विच चालू करने पर उसकी रफ्तार बेहद सुस्त है, तो इसकी वजह खराब कैपेसिटर (कंडेंसर) हो सकता है। कैपेसिटर एक छोटे पावर बैकअप की तरह काम करता, जो मोटर को शुरुआती टॉर्क (घूमने की ताकत) देता है ताकि पंखा तेज रफ्तार पकड़ सके।समस्या: सालों तक लगातार चलने या बिजली के उतार-चढ़ाव (वोल्टेज फ्लक्चुएशन) के कारण कैपेसिटर कमजोर हो जाता है। जब इसकी क्षमता कम हो जाती है, तो यह मोटर को पर्याप्त पावर नहीं दे पाता और पंखे की स्पीड बहुत कम हो जाती है।
समाधान: सबसे पहले मेन एमसीबी (MCB) को बंद कर दें। पंखे के ऊपरी हिस्से (कैनोपी कवर) को नीचे खिसकाएं ताकि अंदर की वायरिंग दिखने लगे। वहाँ आपको एक छोटा सफेद या काले रंग का प्लास्टिक का डिब्बा दिखाई देगा, यही कैपेसिटर है। इस पर लिखी रेटिंग चेक करें। भारत में घरों में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पंखों में 2.25 माइक्रोफैराड (mfd) का कैपेसिटर होता है।
अब इसके दोनों तारों को सावधानी से काटें और बाजार से उसी रेटिंग का नया कैपेसिटर लाकर लगा दें (यह लोकल हार्डवेयर की दुकान पर 50 रुपये से भी कम में मिल जाता है)। इसके बाद तारों पर अच्छी तरह से इलेक्ट्रिकल इंसुलेशन टेप लपेट दें।
सुरक्षा सलाह: पंखे को ज्यादा तेज भगाने के चक्कर में कभी भी बड़ी रेटिंग का कैपेसिटर (जैसे कृषि पंपों में इस्तेमाल होने वाला) न लगाएं। बहुत ज्यादा पावर मिलने से मोटर के तांबे के तार (वाइंडिंग) गर्म होकर कुछ ही हफ्तों में जल सकते हैं।
बॉल बेयरिंग की सफाई और ऑयलिंग है जरूरी
अगर हाथ से घुमाने पर पंखा जाम या भारी महसूस हो रहा था, तो इसका मतलब है कि उसकी अंदरूनी बॉल बेयरिंग में गंदगी जमा हो गई है या उसका लुब्रिकेंट (ग्रीस) सूख चुका है। समस्या: पंखे लगातार धूल-मिट्टी के बीच चलते हैं। समय के साथ हवा में मौजूद धूल, रसोई का धुआं और चिपचिपाहट पंखे के अंदर घुसकर ग्रीस के साथ मिल जाती है। यह मिश्रण एक गाढ़े और खुरदरे पेस्ट में बदल जाता है, जिससे बेयरिंग जाम होने लगती है और पंखे की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
समाधान: पावर सप्लाई बंद करने के बाद, पंखे के बीच वाले घूमने वाले हिस्से (स्पिंडल) के आसपास जमी गंदगी को साफ करें। इसके बाद बेयरिंग के ऊपर और नीचे वाले ट्रैक में अच्छे ग्रेड का मशीन ऑयल या सिलाई मशीन वाला तेल डालें। तेल डालने के बाद पंखुड़ियों को हाथ से आगे-पीछे घुमाएं ताकि तेल अंदर तक चला जाए।
ध्यान रखें कि लंबे समय के लुब्रिकेशन के लिए डब्ल्यूडी-40 (WD-40) का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह बहुत जल्दी सूख जाता है और अंदर बचे हुए ग्रीस को भी साफ कर देता है।
पंखुड़ियों पर जमी भारी धूल को साफ करें
यह एक ऐसी वजह है जिस पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता, लेकिन इसे ठीक करने के लिए किसी तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती है।समस्या: जब पंखे की पंखुड़ियां तेज हवा को काटती हैं, तो स्टेटिक चार्ज की वजह से उनके किनारों और नीचे के हिस्से पर धूल की एक मोटी परत जमा हो जाती है। धूल की यह परत पंखुड़ियों के एयरोडायनामिक डिजाइन (हवा काटने की क्षमता) को बिगाड़ देती है जिससे हवा का रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। साथ ही वजन बढ़ने से मोटर पर दबाव पड़ता है और स्पीड कम हो जाती है।
समाधान: एक आसान घरेलू तरीका अपनाएं। एक पुराना तकिए का कवर (पिलोकेस) लें और उसे पंखे की एक पंखुड़ी के ऊपर पूरी तरह चढ़ा दें। अब कपड़े को पंखुड़ी पर दोनों तरफ से दबाते हुए पीछे की तरफ खींचें। इससे सारी जमी हुई गंदगी कपड़े के अंदर ही सिमट जाएगी और धूल आपके फर्नीचर या फर्श पर नीचे नहीं गिरेगी।
खराब या पुराने रेगुलेटर को चेक करें
कई बार समस्या छत पर लगे पंखे में नहीं, बल्कि दीवार पर लगे आपके स्विच बोर्ड के अंदर होती है। समस्या: पुराने जमाने के बड़े और भारी वायर-रेसिस्टेंस वाले रेगुलेटर समय के साथ घिस जाते हैं। वहीं आजकल आने वाले सस्ते इलेक्ट्रॉनिक स्टेप-रेगुलेटर भी अंदरूनी पार्ट्स खराब होने के कारण वोल्टेज को ठीक से पास नहीं कर पाते। रेगुलेटर में खराबी आने से सर्किट में वोल्टेज ड्रॉप होने लगता है, जिससे रेगुलेटर को फुल (स्टेप 5) पर करने के बाद भी पंखे को पूरी बिजली नहीं मिल पाती।
समाधान: इसकी जांच करना बहुत आसान है। आप कुछ समय के लिए रेगुलेटर के तारों को हटाकर पंखे के तार को सीधे ऑन/ऑफ (ON/OFF) स्विच से जोड़ दें। अगर स्विच चालू करते ही पंखा तुरंत अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेता है, तो समझ जाएं कि आपका रेगुलेटर ही खराब है और उसे तुरंत बदलने की जरूरत है।
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