बारिश के मौसम में डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड्स, बीमारियों से मिलेगा बचाव
मानसून अपने साथ ठंडी हवाएं, हरियाली और राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिसका असर हमारे भोजन और स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है। ऐसे समय में सिर्फ स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि सोच-समझकर भोजन चुनना जरूरी हो जाता है। सही डाइट न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि पेट को भी स्वस्थ रखती है। आइए जानते हैं कि मानसून के दौरान कौन से फूड्स आपकी थाली का हिस्सा होने चाहिए और क्यों।
पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि मानसून में ऐसा भोजन चुनना चाहिए जो आसानी से पच जाए और शरीर पर अतिरिक्त दबाव न डाले। यही वजह है कि इस मौसम में खानपान का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है।
घर का बना भोजन बाहर मिलने वाले खुले खाने की तुलना में अधिक सुरक्षित रहता है। खासकर स्ट्रीट फूड या लंबे समय से खुले में रखे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना समझदारी है।
प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि संतुलित मात्रा में प्रोटीन का सेवन मानसून की डाइट का अहम हिस्सा होना चाहिए।
यही वजह है कि बरसात के दिनों में कई घरों में अदरक वाली चाय, हल्दी वाला दूध या मसालों से भरपूर हल्का भोजन आज भी लोकप्रिय है।
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। यह छोटी-सी आदत कई प्रकार के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती है।
मानसून में सही भोजन क्यों है जरूरी?
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होती है, जिससे भोजन जल्दी खराब हो सकता है। इसी दौरान वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, पेट के संक्रमण और फूड पॉइजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ संक्रमण से लड़ने में भी मदद करता है।पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि मानसून में ऐसा भोजन चुनना चाहिए जो आसानी से पच जाए और शरीर पर अतिरिक्त दबाव न डाले। यही वजह है कि इस मौसम में खानपान का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है।
गर्म और ताजा पका हुआ भोजन सबसे बेहतर विकल्प
मानसून में गर्म और ताजा बना भोजन सबसे सुरक्षित माना जाता है। अच्छी तरह पकाया गया खाना बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों के खतरे को कम करता है। दाल, खिचड़ी, हल्की सब्जियां, सूप और ताजा बनी रोटियां इस मौसम के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।घर का बना भोजन बाहर मिलने वाले खुले खाने की तुलना में अधिक सुरक्षित रहता है। खासकर स्ट्रीट फूड या लंबे समय से खुले में रखे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना समझदारी है।
मौसमी सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर भोजन रखें डाइट में
लौकी, तोरई, टिंडा, परवल और भिंडी जैसी मौसमी सब्जियां मानसून में आसानी से पचती हैं और शरीर को आवश्यक विटामिन व मिनरल्स प्रदान करती हैं। इनके साथ दाल, पनीर, अंडे या अच्छी तरह पकी हुई दालें प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करती हैं।प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि संतुलित मात्रा में प्रोटीन का सेवन मानसून की डाइट का अहम हिस्सा होना चाहिए।
मसाले जो स्वाद के साथ सेहत भी बढ़ाते हैं
भारतीय रसोई में मौजूद कई पारंपरिक मसाले मानसून में विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं। अदरक, हल्दी, काली मिर्च, जीरा और दालचीनी जैसे मसाले लंबे समय से पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे हैं। ये भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं।यही वजह है कि बरसात के दिनों में कई घरों में अदरक वाली चाय, हल्दी वाला दूध या मसालों से भरपूर हल्का भोजन आज भी लोकप्रिय है।
दही की जगह छाछ और पर्याप्त पानी पर दें ध्यान
बारिश के मौसम में कई लोग ठंडी चीजों का सेवन कम कर देते हैं, लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना उतना ही जरूरी रहता है। साफ और सुरक्षित पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए। यदि दही भारी महसूस हो, तो हल्की छाछ या ताजा मट्ठा बेहतर विकल्प हो सकता है, बशर्ते वह पूरी तरह ताजा हो।फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। यह छोटी-सी आदत कई प्रकार के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती है।





