तीज 2025 में कब है? जानें हरियाली, कजरी और हरितालिका तीज की तारीखें, महत्व और परंपराएं

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तीज भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सबसे प्रिय और पवित्र पर्वों में से एक है। यह व्रत न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होता है बल्कि स्त्री सशक्तिकरण, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। हर साल तीज तीन रूपों में आती है—हरियाली तीज, कजरी तीज और हरितालिका तीज—जिनका संबंध देवी पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन की कथाओं से होता है।
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2. तीज के प्रकार और तिथि (2025 में)

2025 में तीनों तीज पर्व निम्नलिखित तिथियों को मनाए जाएंगे:

  • हरियाली तीज: 3 अगस्त 2025 (रविवार)


  • कजरी तीज: 19 अगस्त 2025 (मंगलवार)

  • हरितालिका तीज: 27 अगस्त 2025 (बुधवार)


  • हर तीज का अपना धार्मिक महत्व और रीति-रिवाज होता है, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है।


    3. हरियाली तीज: प्रेम और हरियाली का उत्सव

    हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह खासकर उत्तर भारत की महिलाओं में लोकप्रिय है। महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, झूले पर झूलती हैं और मेंहदी लगाती हैं। यह पर्व पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति की कामना के लिए रखा जाता है।


    4. कजरी तीज: लोकगीतों और नारीत्व का प्रतीक

    कजरी तीज भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और कजरी गीतों का आयोजन करती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन रात को नीम की पूजा की जाती है और मिट्टी से मां पार्वती और शिव की मूर्तियां बनाकर पूजन किया जाता है।


    5. हरितालिका तीज: कठिन व्रत और अखंड सौभाग्य का पर्व

    हरितालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। इसे खासकर महाराष्ट्र, मध्य भारत और दक्षिण भारत में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है। इस व्रत में महिलाएं 24 घंटे निर्जल और निराहार रहकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं और विवाहित स्त्रियों दोनों के लिए शुभ माना जाता है।

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    6. धार्मिक मान्यता: पार्वती और शिव का पुनर्मिलन

    तीज पर्व की कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कई जन्मों तक तप किया था। उनकी अटल निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। यह व्रत महिलाओं की भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।


    7. तीज में क्या करें: पूजा-विधि और परंपरा

    • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

    • भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें

    • बेलपत्र, अक्षत, पुष्प, दूध, शहद आदि से पूजा करें

    • निर्जल व्रत रखें (यदि संभव हो)


  • व्रत कथा सुनें और तीज गीत गाएं

  • सोलह श्रृंगार करें और हरी चूड़ियां पहनें


  • 8. तीज में खाने-पीने का विशेष महत्त्व

    तीज के दिन खासतौर पर घेवर, मालपुआ, पूड़ी, हलवा जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। हालांकि व्रत के कारण महिलाएं व्रत के समापन पर ही प्रसाद ग्रहण करती हैं। तीज की थाली का भी अपना सांस्कृतिक महत्त्व होता है।


    9. समाज में तीज का सामाजिक पक्ष

    तीज सिर्फ धार्मिक ही नहीं, एक सामाजिक अवसर भी है। यह महिलाओं को एक-दूसरे से मिलने, सांस्कृतिक आयोजन करने और एकजुटता को बढ़ावा देने का अवसर देता है। इस दिन झूले, लोकगीत, नृत्य और श्रृंगार का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

    तीज पर्व भारतीय स्त्रियों की आस्था और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व नारी शक्ति, संयम और समर्पण को सम्मान देता है। 2025 में आने वाली तीनों तीजों के साथ यह पर्व फिर एक बार जीवन में प्रेम, श्रद्धा और सौभाग्य की भावना लेकर आएगा।


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