रंग बदलकर खुद को छिपा लेते हैं ये जीव, शिकारी भी नहीं लगा पाते पता
अगर कोई आपसे कहे कि दुनिया में ऐसे जानवर भी हैं जो कुछ ही सेकंड में लगभग अदृश्य हो सकते हैं, तो शायद आपको यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगे। लेकिन प्रकृति में कई जीव ऐसे हैं जिन्होंने लाखों वर्षों के विकास के दौरान खुद को इस तरह ढाल लिया है कि वे अपने आसपास के वातावरण में लगभग पूरी तरह घुलमिल जाते हैं। रंग बदलने, त्वचा की बनावट बदलने और प्रकाश को अलग तरह से परावर्तित करने जैसी क्षमताएँ उन्हें शिकारी से बचने और शिकार पकड़ने में मदद करती हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक आज भी इन जीवों की अद्भुत क्षमताओं का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं।
यह क्षमता किसी जादू से नहीं बल्कि शरीर की विशेष कोशिकाओं और प्रकाश के साथ होने वाली प्राकृतिक क्रियाओं की वजह से संभव होती है। यही कारण है कि कई बार प्रशिक्षित वैज्ञानिकों को भी इन जीवों को ढूंढने में काफी समय लग जाता है।
इतना ही नहीं, ऑक्टोपस अपनी त्वचा की बनावट भी बदल सकता है। यदि वह चट्टान के पास हो तो उसकी त्वचा खुरदरी दिखाई देने लगती है, जबकि रेत पर वह बिल्कुल समतल दिख सकता है। इससे शिकारी और शिकार दोनों भ्रमित हो जाते हैं।
प्रकृति में अदृश्य होने का मतलब क्या है?
असल में ये जानवर पूरी तरह गायब नहीं होते। वे अपने शरीर का रंग, पैटर्न या बनावट इस तरह बदल लेते हैं कि उन्हें पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस प्रक्रिया को छलावरण या कैमोफ्लाज कहा जाता है।यह क्षमता किसी जादू से नहीं बल्कि शरीर की विशेष कोशिकाओं और प्रकाश के साथ होने वाली प्राकृतिक क्रियाओं की वजह से संभव होती है। यही कारण है कि कई बार प्रशिक्षित वैज्ञानिकों को भी इन जीवों को ढूंढने में काफी समय लग जाता है।
ऑक्टोपस है इस कला का उस्ताद
ऑक्टोपस को प्रकृति का सबसे बेहतरीन छलावरण विशेषज्ञ माना जाता है। इसकी त्वचा में विशेष रंग कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें क्रोमैटोफोर कहा जाता है। ये कोशिकाएँ कुछ ही क्षणों में शरीर का रंग बदल सकती हैं।इतना ही नहीं, ऑक्टोपस अपनी त्वचा की बनावट भी बदल सकता है। यदि वह चट्टान के पास हो तो उसकी त्वचा खुरदरी दिखाई देने लगती है, जबकि रेत पर वह बिल्कुल समतल दिख सकता है। इससे शिकारी और शिकार दोनों भ्रमित हो जाते हैं।
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