दुनिया के सबसे तेज़ सूंघने वाले जानवर कौन हैं? जानिए उनकी अद्भुत क्षमता
हम इंसान अपनी आँखों और कानों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, लेकिन जानवरों की दुनिया में कई प्रजातियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण इंद्रिय उनकी सूंघने की क्षमता होती है। भोजन ढूंढने, खतरे को पहचानने, अपने बच्चों को खोजने, साथी चुनने और लंबी दूरी तक रास्ता तलाशने जैसे कई काम वे केवल गंध के सहारे कर लेते हैं। कुछ जानवरों की घ्राण शक्ति इतनी विकसित होती है कि वे ऐसी गंध भी पहचान सकते हैं, जिन्हें इंसान कभी महसूस नहीं कर सकता। यही कारण है कि वैज्ञानिक आज भी इन असाधारण क्षमताओं का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि चिकित्सा, सुरक्षा और खोज एवं बचाव जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का विकास किया जा सके।
यही वजह है कि वे हवा, मिट्टी या पानी में मौजूद बेहद हल्की गंध को भी पहचान लेते हैं और उससे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।
दुनिया भर में पुलिस, सेना और खोज एवं बचाव दल विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्तों की मदद लेते हैं। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कुछ कुत्ते कैंसर, मधुमेह और मिर्गी के शुरुआती संकेतों से जुड़ी गंध को पहचानने में सक्षम होते हैं।
जानवरों की सूंघने की क्षमता इतनी तेज़ क्यों होती है?
किसी भी जानवर की सूंघने की शक्ति उसके नाक के भीतर मौजूद घ्राण रिसेप्टर्स और मस्तिष्क के उस हिस्से पर निर्भर करती है, जो गंध की जानकारी को समझता है। जिन जानवरों का जीवन गंध पर अधिक निर्भर करता है, उनमें ये दोनों हिस्से बेहद विकसित होते हैं।यही वजह है कि वे हवा, मिट्टी या पानी में मौजूद बेहद हल्की गंध को भी पहचान लेते हैं और उससे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।
कुत्ता है सबसे प्रसिद्ध उदाहरण
कुत्तों को दुनिया के सबसे बेहतरीन सूंघने वाले जानवरों में गिना जाता है। उनकी नाक में इंसानों की तुलना में करोड़ों अधिक घ्राण रिसेप्टर्स होते हैं। यही कारण है कि वे विस्फोटक पदार्थ, मादक द्रव्य, लापता लोगों और यहाँ तक कि कुछ बीमारियों से जुड़ी गंध तक पहचान सकते हैं।दुनिया भर में पुलिस, सेना और खोज एवं बचाव दल विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्तों की मदद लेते हैं। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कुछ कुत्ते कैंसर, मधुमेह और मिर्गी के शुरुआती संकेतों से जुड़ी गंध को पहचानने में सक्षम होते हैं।
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