सहजन (मोरिंगा) की पत्तियां क्यों कहलाती हैं सुपरफूड? जानिए इसके अद्भुत फायदे

कुछ साल पहले तक सहजन, जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक ट्री भी कहा जाता है, मुख्य रूप से सांभर और कुछ पारंपरिक व्यंजनों तक ही सीमित माना जाता था। लेकिन आज इसकी पत्तियां दुनिया भर में सुपरफूड के रूप में पहचान बना रही हैं। पोषण विशेषज्ञों से लेकर फिटनेस प्रेमियों तक, हर कोई मोरिंगा की पत्तियों की चर्चा कर रहा है। इसका कारण केवल इसका पौष्टिक होना नहीं, बल्कि यह भी है कि यह आसानी से उगने वाला, कम संसाधनों में पनपने वाला और कई तरह से उपयोग किया जाने वाला पौधा है। भारत में सदियों से इस्तेमाल होने वाली यह हरी पत्ती आज वैश्विक स्वास्थ्य जगत का भी ध्यान आकर्षित कर रही है।
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सहजन का पेड़ क्यों है इतना खास?

सहजन का पेड़ भारत, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में आसानी से उगता है। इसकी खासियत यह है कि इसका लगभग हर हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी माना जाता है। फलियां, पत्तियां, फूल और बीज सभी का उपयोग भोजन या पारंपरिक तरीकों में किया जाता रहा है।

ग्रामीण भारत में सहजन का पेड़ घरों के आसपास लगाना आम बात थी। यह कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ता है और लंबे समय तक हरा-भरा रहता है। यही कारण है कि इसे टिकाऊ खेती के लिए भी उपयोगी पौधों में गिना जाता है।


आज कई देशों में इसकी खेती व्यावसायिक स्तर पर भी की जा रही है।


पोषण का भरपूर स्रोत हैं सहजन की पत्तियां

सहजन की पत्तियां कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इनमें विटामिन A, विटामिन C, विटामिन E, कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा इनमें प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा होती है, जो हरी पत्तेदार सब्जियों में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है।


इन पत्तियों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं।

हालांकि केवल सहजन का सेवन करने से सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। इसे संतुलित और विविध आहार का हिस्सा बनाना अधिक लाभकारी होता है।


सहजन से जुड़े रोचक तथ्य

बहुत कम लोग जानते हैं कि सहजन को अंग्रेजी में "Miracle Tree" यानी चमत्कारी पेड़ भी कहा जाता है। इसका कारण इसके बहुआयामी उपयोग हैं।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सहजन के बीजों का उपयोग कुछ क्षेत्रों में पानी को साफ करने के पारंपरिक तरीकों में किया जाता रहा है। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व पानी में मौजूद कुछ अशुद्धियों को अलग करने में सहायक माने जाते हैं।