अंकुरित अनाज खाने के फायदे: क्यों हर दिन डाइट में शामिल करना चाहिए?
सुबह के नाश्ते में अंकुरित मूंग या चने की एक कटोरी अब पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो गई है। फिटनेस प्रेमियों से लेकर पोषण विशेषज्ञों तक, लगभग हर कोई अंकुरित अनाज को संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। हालांकि यह कोई नया भोजन नहीं है। भारतीय घरों में वर्षों से अनाज और दालों को भिगोकर अंकुरित करने की परंपरा रही है। आधुनिक शोध ने भी इस पारंपरिक तरीके में रुचि दिखाई है क्योंकि अंकुरण के दौरान अनाज में कई जैविक परिवर्तन होते हैं। यही वजह है कि आज अंकुरित अनाज को प्राकृतिक, पौष्टिक और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।
मूंग, काला चना, मेथी, लोबिया और हरी मटर जैसे कई खाद्य पदार्थों को आसानी से अंकुरित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी रासायनिक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती।
भारत सहित दुनिया के कई देशों में अंकुरित अनाज का उपयोग सलाद, नाश्ते, सैंडविच, चाट और हल्के भोजन के रूप में किया जाता है।
अंकुरित अनाज में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन C, कुछ बी समूह के विटामिन और खनिजों की जैव उपलब्धता बेहतर हो सकती है। साथ ही, इनमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक, जो खनिजों के अवशोषण में बाधा बनते हैं, अंकुरण के दौरान कम हो सकते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंकुरित अनाज भी संतुलित आहार का केवल एक हिस्सा हैं। केवल इन्हीं पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि अलग-अलग दालों और बीजों का अंकुरण समय अलग होता है। मूंग सामान्यतः 24 से 36 घंटे में अंकुरित हो जाती है, जबकि चने को अधिक समय लग सकता है।
दुनिया के कई देशों में अंकुरित अनाज का उपयोग केवल सलाद तक सीमित नहीं है। इन्हें सूप, नूडल्स, रैप्स और कई पारंपरिक व्यंजनों में भी शामिल किया जाता है।
ये घर पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और महंगे स्वास्थ्य उत्पादों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। साथ ही, अंकुरण की प्रक्रिया से खाद्य पदार्थों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
पौधों पर आधारित भोजन अपनाने वाले लोगों के लिए भी अंकुरित अनाज पोषण बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प माने जाते हैं।
कुछ लोग अंकुरित अनाज कच्चे खाते हैं, जबकि कई विशेषज्ञ हल्का भाप में पकाकर या उबालकर खाने की सलाह देते हैं, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए।
इनमें नींबू, टमाटर, खीरा, प्याज और हरा धनिया मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
अंकुरित अनाज क्या होते हैं?
जब किसी साबुत अनाज, दाल या बीज को कुछ घंटों तक पानी में भिगोकर उचित तापमान पर रखा जाता है, तो उसमें से छोटी-सी सफेद कोंपल निकलने लगती है। इसी प्रक्रिया को अंकुरण कहा जाता है।मूंग, काला चना, मेथी, लोबिया और हरी मटर जैसे कई खाद्य पदार्थों को आसानी से अंकुरित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी रासायनिक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती।
भारत सहित दुनिया के कई देशों में अंकुरित अनाज का उपयोग सलाद, नाश्ते, सैंडविच, चाट और हल्के भोजन के रूप में किया जाता है।
अंकुरण से कैसे बदलता है पोषण?
अंकुरण के दौरान बीज सक्रिय हो जाता है और उसके भीतर मौजूद एंजाइम काम करना शुरू कर देते हैं। इससे कुछ पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ सकती है और भोजन को पचाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।अंकुरित अनाज में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन C, कुछ बी समूह के विटामिन और खनिजों की जैव उपलब्धता बेहतर हो सकती है। साथ ही, इनमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक, जो खनिजों के अवशोषण में बाधा बनते हैं, अंकुरण के दौरान कम हो सकते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंकुरित अनाज भी संतुलित आहार का केवल एक हिस्सा हैं। केवल इन्हीं पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
अंकुरित अनाज से जुड़े रोचक तथ्य
बहुत कम लोग जानते हैं कि अंकुरित अनाज का स्वाद भी सामान्य दालों और अनाजों से अलग होता है। अंकुरण के दौरान उनमें हल्की प्राकृतिक मिठास विकसित हो सकती है।एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि अलग-अलग दालों और बीजों का अंकुरण समय अलग होता है। मूंग सामान्यतः 24 से 36 घंटे में अंकुरित हो जाती है, जबकि चने को अधिक समय लग सकता है।
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दुनिया के कई देशों में अंकुरित अनाज का उपयोग केवल सलाद तक सीमित नहीं है। इन्हें सूप, नूडल्स, रैप्स और कई पारंपरिक व्यंजनों में भी शामिल किया जाता है।
अंकुरित अनाज आज के समय में क्यों हैं महत्वपूर्ण?
आज जब लोग अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर प्राकृतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, तब अंकुरित अनाज एक सरल और किफायती समाधान बनकर सामने आए हैं।ये घर पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और महंगे स्वास्थ्य उत्पादों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। साथ ही, अंकुरण की प्रक्रिया से खाद्य पदार्थों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
पौधों पर आधारित भोजन अपनाने वाले लोगों के लिए भी अंकुरित अनाज पोषण बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प माने जाते हैं।
अंकुरित अनाज खाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अंकुरित अनाज हमेशा साफ पानी से तैयार करने चाहिए और अंकुरण के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि अंकुरों से किसी प्रकार की दुर्गंध आए या उनका रंग असामान्य लगे, तो उनका सेवन नहीं करना चाहिए।कुछ लोग अंकुरित अनाज कच्चे खाते हैं, जबकि कई विशेषज्ञ हल्का भाप में पकाकर या उबालकर खाने की सलाह देते हैं, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए।
इनमें नींबू, टमाटर, खीरा, प्याज और हरा धनिया मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।









