वजन घटाने और पाचन सुधारने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीका

वजन घटाने (Weight Loss) और एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए आजकल 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' (Intermittent Fasting) दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हो रही है। यह कोई डाइट प्लान नहीं है, बल्कि खाने का एक पैटर्न है जहाँ आप तय घंटों के भीतर ही भोजन करते हैं और बाकी समय उपवास रखते हैं। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से किया जाए।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे प्रसिद्ध तरीका 16/8 का नियम है। इसका मतलब है कि आप दिन के 16 घंटे भूखे रहते हैं और केवल 8 घंटे की विंडो में ही भोजन करते हैं। उदाहरण के लिए, आप सुबह 11 बजे अपना पहला भोजन लेते हैं और रात को 7 बजे तक अपना आखिरी भोजन समाप्त कर लेते हैं।

फास्टिंग पीरियड के दौरान आपका शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज के बजाय जमा हुई चर्बी (फैट) को बर्न करना शुरू कर देता है। इससे जिद्दी फैट बहुत तेजी से घटता है। इसके अलावा, जब आप लगातार कुछ घंटों तक कुछ नहीं खाते, तो आपके पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे पेट फूलना (Bloating), गैस और अपच जैसी समस्याएं जड़ से खत्म होने लगती हैं।


इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही, यह कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया (Autophagy) को सक्रिय करती है, जिससे पुरानी और खराब कोशिकाएं साफ होती हैं और शरीर अंदर से युवा बना रहता है।

हालांकि, फास्टिंग विंडो का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप ईटिंग विंडो (8 घंटे) में जंक फूड या अत्यधिक मीठा खाएं। आपको उस दौरान दालें, हरी सब्जियां, फल और नट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ ही खाने चाहिए। शुरुआत में 16 घंटे मुश्किल लग सकते हैं, इसलिए आप 12 या 14 घंटे से शुरुआत कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नहीं करना चाहिए।