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पारंपरिक भारतीय अचार के फायदे: सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का भी खजाना

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भारतीय भोजन की थाली अचार के बिना अधूरी मानी जाती है। आम, नींबू, मिर्च, आंवला, गाजर या कटहल, लगभग हर मौसम और हर क्षेत्र का अपना पारंपरिक अचार होता है। वर्षों से अचार केवल खाने का स्वाद बढ़ाने वाला साथ नहीं रहा, बल्कि यह भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक पारंपरिक तरीका भी रहा है। आधुनिक दौर में पैकेज्ड अचार आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन घर में बने पारंपरिक अचार की बात ही अलग होती है। सही सामग्री और संतुलित मात्रा में तैयार किया गया अचार स्वाद के साथ भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा और स्थानीय ज्ञान की भी कहानी कहता है।
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भारतीय अचार की परंपरा हजारों साल पुरानी है

भारत में अचार बनाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। जब रेफ्रिजरेटर नहीं थे, तब फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नमक, तेल और मसालों का इस्तेमाल किया जाता था।

हर राज्य की अपनी अलग अचार संस्कृति विकसित हुई। उत्तर भारत में आम और नींबू का अचार लोकप्रिय है, जबकि दक्षिण भारत में आंवला, इमली और लहसुन के अचार का विशेष स्थान है। राजस्थान में कम पानी और गर्म जलवायु के कारण लंबे समय तक टिकने वाले मसालेदार अचार तैयार किए जाते हैं।


इसी विविधता ने भारतीय अचार को दुनिया के सबसे समृद्ध खाद्य परंपराओं में शामिल कर दिया है।


अचार सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाता

घर में बने पारंपरिक अचार में सरसों, मेथी, सौंफ, हल्दी, हींग और लाल मिर्च जैसे मसालों का उपयोग किया जाता है। ये मसाले केवल स्वाद और सुगंध ही नहीं बढ़ाते, बल्कि भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं।


कुछ पारंपरिक अचार प्राकृतिक रूप से किण्वित यानी फर्मेंटेड भी होते हैं। ऐसे अचारों में स्वाद समय के साथ विकसित होता है और वे भारतीय खाद्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

हालांकि अचार में नमक और तेल की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए।


अचार से जुड़े रोचक तथ्य

बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में सैकड़ों प्रकार के अचार बनाए जाते हैं। केवल आम के अचार की ही दर्जनों क्षेत्रीय किस्में मौजूद हैं, जिनका स्वाद, मसाले और बनाने का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि कई परिवारों में अचार की रेसिपी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाई जाती है। कुछ घरों में आज भी दादी-नानी के बताए तरीके से धूप में अचार तैयार किया जाता है।

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