बिना हवा और पानी के भी बच सकते हैं ये जीव, विज्ञान भी रह गया हैरान
अंतरिक्ष को पृथ्वी के बाहर सबसे कठोर वातावरण माना जाता है। यहाँ न सांस लेने लायक हवा है, न सामान्य तापमान और न ही जीवन के लिए जरूरी दबाव। तेज़ कॉस्मिक विकिरण और लगभग पूर्ण निर्वात किसी भी जीवित प्राणी के लिए घातक साबित हो सकते हैं। ऐसे में यह जानकर हैरानी होती है कि पृथ्वी पर कुछ जीव ऐसे भी हैं जो इन कठिन परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों ने कई अंतरिक्ष अभियानों के दौरान इन जीवों का अध्ययन किया है और पाया है कि उनका शरीर ऐसे अनोखे तरीके से काम करता है, जो जीवन की हमारी पारंपरिक समझ को चुनौती देता है।
वैज्ञानिक प्रयोगों में टार्डीग्रेड को पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया, जहाँ उसने निर्वात, तीव्र पराबैंगनी विकिरण और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों का सामना किया। कई टार्डीग्रेड पृथ्वी पर वापस आने के बाद भी जीवित पाए गए और सामान्य रूप से सक्रिय हो गए।
इस विशेष अवस्था में उसका शरीर महीनों या कई बार वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है। जैसे ही उसे फिर से पानी और अनुकूल वातावरण मिलता है, वह दोबारा सक्रिय हो जाता है। यही क्षमता उसे पृथ्वी के सबसे मजबूत जीवों में शामिल करती है।
टार्डीग्रेड है अंतरिक्ष का सबसे मशहूर जीव
जब भी अंतरिक्ष में जीवित रहने वाले जीवों की बात होती है, तो सबसे पहले टार्डीग्रेड का नाम आता है। इसे आम भाषा में "वॉटर बेयर" भी कहा जाता है। यह सूक्ष्म जीव आकार में आधे मिलीमीटर से भी छोटा होता है, लेकिन इसकी सहनशीलता असाधारण है।वैज्ञानिक प्रयोगों में टार्डीग्रेड को पृथ्वी की कक्षा में भेजा गया, जहाँ उसने निर्वात, तीव्र पराबैंगनी विकिरण और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों का सामना किया। कई टार्डीग्रेड पृथ्वी पर वापस आने के बाद भी जीवित पाए गए और सामान्य रूप से सक्रिय हो गए।
ऐसा क्या है जो इन्हें इतना मजबूत बनाता है?
टार्डीग्रेड कठिन परिस्थितियों में अपने शरीर से लगभग पूरा पानी निकाल देता है और एक निष्क्रिय अवस्था में चला जाता है। इस अवस्था को क्रिप्टोबायोसिस कहा जाता है। इस दौरान उसका चयापचय लगभग पूरी तरह रुक जाता है।इस विशेष अवस्था में उसका शरीर महीनों या कई बार वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है। जैसे ही उसे फिर से पानी और अनुकूल वातावरण मिलता है, वह दोबारा सक्रिय हो जाता है। यही क्षमता उसे पृथ्वी के सबसे मजबूत जीवों में शामिल करती है।
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