इन फूलों ने लाखों वर्षों में ऐसी विशेष जैविक क्षमताएँ विकसित की हैं जो उन्हें कठोर वातावरण में भी जीवित रहने में मदद करती हैं। यही वजह है कि वे दुनिया के सबसे ठंडे इलाकों में भी रंग और जीवन की उम्मीद बनाए रखते हैं। बर्फ में भी कैसे जीवित रहते हैं ये फूल? ज्यादातर पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी ठंड में जम जाता है, जिससे उनकी कोशिकाएँ फट सकती हैं। लेकिन ठंडे क्षेत्रों में उगने वाले फूलों ने इससे बचने के लिए अनोखे तरीके विकसित किए हैं। उनके ऊतकों में प्राकृतिक शर्करा और विशेष प्रोटीन बनते हैं, जो कोशिकाओं को जमने से बचाने में मदद करते हैं। कुछ पौधों की पत्तियाँ और कलियाँ महीन रोयों से ढकी होती हैं। ये रोएँ ठंडी हवा को सीधे पौधे तक पहुँचने से रोकते हैं और एक प्राकृतिक इन्सुलेशन का काम करते हैं। दुनिया के सबसे ठंडे इलाकों के प्रसिद्ध फूल स्नोड्रॉप उन पहले फूलों में गिना जाता है जो बर्फ पिघलने से पहले ही खिलना शुरू कर देते हैं। इसकी नुकीली कली बर्फ को चीरकर बाहर निकल सकती है। क्रिसमस रोज़ भी सर्दियों के दौरान खिलने के लिए प्रसिद्ध है। वहीं आल्प्स पर्वतों में मिलने वाला एल्पाइन पास्क फ्लावर तेज़ बर्फीली हवाओं और कम तापमान को आसानी से सहन कर लेता है। आर्कटिक क्षेत्रों में मिलने वाले पर्पल सैक्सिफ्रेज़ जैसे फूल बेहद कम गर्मी वाले मौसम में तेजी से बढ़ते हैं और बहुत कम समय में अपना पूरा जीवनचक्र पूरा कर लेते हैं। प्रकृति की अनोखी रणनीति इन फूलों की वृद्धि का समय बहुत सोच-समझकर तय होता है। जैसे ही बर्फ पिघलती है और थोड़ी धूप मिलती है, ये तुरंत खिल जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ी और ध्रुवीय क्षेत्रों में गर्म मौसम केवल कुछ सप्ताह के लिए ही रहता है। इनके चमकीले रंग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गहरे बैंगनी, गुलाबी या पीले रंग सूर्य की गर्मी को अधिक अवशोषित करते हैं, जिससे फूल का तापमान आसपास की हवा से थोड़ा अधिक बना रहता है। इससे परागण करने वाले कीट भी उनकी ओर जल्दी आकर्षित होते हैं। कम लोग जानते हैं ये रोचक बातें कुछ हिमालयी और आर्कटिक फूल अपनी पंखुड़ियों को कटोरे जैसा आकार देते हैं। यह आकार सूर्य की किरणों को फूल के केन्द्र की ओर केन्द्रित करता है, जिससे तापमान कुछ डिग्री तक बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि कुछ ठंडे क्षेत्रों के पौधे कई महीनों तक बर्फ के नीचे जीवित रह सकते हैं। जैसे ही बर्फ हटती है, वे तेजी से सक्रिय होकर खिलने लगते हैं। आज के समय में यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है? जलवायु परिवर्तन का असर सबसे पहले पहाड़ी और ध्रुवीय क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। बढ़ते तापमान के कारण बर्फ जल्दी पिघल रही है और फूलों के खिलने का समय बदल रहा है। यदि फूल समय से पहले खिल जाएँ और उस समय परागण करने वाले कीट मौजूद न हों, तो उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक इन विशेष फूलों का अध्ययन कर रहे हैं। इनसे मिली जानकारी भविष्य में ऐसी फसलें विकसित करने में भी मदद कर सकती है जो अत्यधिक ठंड को बेहतर ढंग से सहन कर सकें।