नवरात्रि से सिर्फ तीन दिन पहले शाम को गरबा-डांडिया की तैयारी में क्यों जुट गए हैं लोग, वजह जानकर आप भी शुरू कर देंगे
नवरात्रि शुरू होने में अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं और शाम होते ही कई मोहल्लों, सोसाइटियों और पार्कों में ढोल की थाप पर गरबा-डांडिया का अभ्यास शुरू हो जाता है। कोई पहली बार डांडिया पकड़ना सीख रहा है तो कोई पुराने कदमों को फिर से साध रहा है। असल में navratri garba dandiya practice ke fayde सिर्फ नाच सीखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह तैयारी पूरे नौ दिनों के उत्सव को आराम से और पूरे उत्साह के साथ मनाने में मदद कर सकती है।
दरअसल, त्योहार के दिनों में देर रात तक नाचना, उपवास रखना और दिनभर की भागदौड़ कई लोगों को जल्दी थका देती है। अगर शरीर को पहले से थोड़ी आदत डाल दी जाए तो नौ दिनों की रौनक बोझ नहीं लगती। यही कारण है कि इस बार बहुत से लोग पंडाल सजने से पहले ही शाम की प्रैक्टिस को अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं। यह तैयारी सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
शाम के अभ्यास से शरीर को मिलेगी ऐसी तैयारी जो पूरे नौ दिन काम आएगीशाम का समय अभ्यास के लिए इसलिए भी مناسب माना जाता है क्योंकि दिन की गर्मी कम हो चुकी होती है और शरीर अपेक्षाकृत तरोताज़ा महसूस करता है।
अभ्यास से पहले कुछ मिनट हल्की स्ट्रेचिंग और बाद में शरीर को ठंडा होने का समय देना फायदेमंद हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना और अभ्यास के तुरंत बाद भारी भोजन से बचना भी आमतौर पर ठीक माना जाता है।
गरबा के गोल घेरे में घूमते कदम और डांडिया की तालबद्ध चाल शरीर के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करती है। इस तरह की गतिविधि से कैलोरी खर्च होने में मदद मिल सकती है और नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन और तालमेल बेहतर हो सकता है। यह कोई जिम जैसी कसरत का विकल्प होने का दावा नहीं है, लेकिन रोज़मर्रा की सुस्ती तोड़ने का यह एक आनंददायक तरीका जरूर बन सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह सीखने-समझने का अच्छा मौका होता है। बच्चे लय और अनुशासन सीखते हैं, जबकि परिवार के बड़े सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार धीमे कदमों के साथ शामिल हो सकते हैं। साथ नाचने से आपसी मेलजोल बढ़ता है और त्योहार की खुशी घर से बाहर निकलकर पूरे मोहल्ले तक फैल जाती है। कई जगहों पर तो शाम की यह प्रैक्टिस अब छोटी-सी सामाजिक परंपरा बनती जा रही है।
शुरुआत करने वालों के लिए रोज़ शाम अपनाएं ये आसान तरीका, थकान भी होगी कमहर दिन एक ही समय पर अभ्यास करने से शरीर को लय पकड़ने में आसानी हो सकती है। बीच-बीच में छोटे विराम लेना न भूलें और थकान महसूस होते ही रुक जाना ही बेहतर है। नौ दिनों के उत्सव में यही छोटी-छोटी तैयारियां बड़ा फर्क डाल सकती हैं।