दो-तीन रोटी खाते ही पेट गुब्बारे की तरह फूल जाना, कमर का बंधन टाइट लगना और शाम तक भारीपन बने रहना, यह शिकायत आज हर दूसरे घर की है। कई लोग इसे सिर्फ ज्यादा खाने का नतीजा समझ लेते हैं, लेकिन रोज की यह ब्लोटिंग खाने की आदतों, खाने की रफ्तार और आटे की बनावट से भी जुड़ी हो सकती है। इन्हीं दिनों एक सुझाव खूब चर्चा में है कि गेहूं के आटे में एक और अनाज मिलाकर खाने से पेट का फूलना कम हो सकता है।
लेकिन क्या यह सच में तुरंत छुटकारा दिला देता है? जवाब ईमानदारी से समझना जरूरी है, क्योंकि कोई भी खानपान बदलाव जादू की तरह तुरंत असर नहीं करता।
आटे में कौन सा अनाज मिलाने की होती है सलाह
चर्चा में सबसे ज्यादा नाम जौ के आटे का आता है। जौ में रेशा यानी फाइबर गेहूं के मुकाबले अधिक होता है, और रेशा पाचन की गति को संतुलित रखने में मदद करता माना जाता है। सुझाव यह दिया जाता है कि पूरे आटे को एकदम बदलने की बजाय शुरुआत में गेहूं के आटे में छोटा हिस्सा, जैसे चार हिस्से गेहूं में एक हिस्सा जौ का आटा मिलाएं।
कुछ लोग बाजरा या चने का आटा भी इसी तरह मिलाते हैं, लेकिन स्वाद और बनावट बदलने की वजह से धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना ही ठीक रहता है। रोटी थोड़ी मोटी और रंग में गहरी बनेगी, यह बदलाव पहले से समझकर चलें। साथ में यह भी सच है कि सिर्फ आटा बदलना काफी नहीं होता। जल्दी-जल्दी निगलना, खाते समय बातें करना, खाना खाते ही लेट जाना और दिन भर पानी कम पीना भी पेट फूलने की बड़ी वजहें हैं। खाना धीरे चबाकर खाना, खाने के बाद कुछ देर टहलना और दिन में पर्याप्त पानी पीना इस शिकायत में उतना ही काम करता है।
तुरंत छुटकारे का दावा कितना सही है और कब डॉक्टर जरूरी है
सीधी बात यह है कि किसी अनाज का मिश्रण ब्लोटिंग से तुरंत छुटकारा दिला देगा, ऐसा कोई पक्का दावा नहीं किया जा सकता। आंतों को नए आटे की आदत पड़ने में कुछ दिन लगते हैं, और शुरुआती दिनों में कुछ लोगों को गैस उल्टा थोड़ी बढ़ी हुई भी लग सकती है। असर हर शरीर में अलग होता है, किसी को राहत जल्दी महसूस होती है, किसी को बिल्कुल नहीं। इसलिए इसे आजमाना है तो धैर्य के साथ कुछ हफ्ते नियमित तौर पर आजमाएं, एक दिन में परिणाम का फैसला न सुनाएं। एक और जरूरी सावधानी यह है कि लंबे समय से बनी ब्लोटिंग, पेट दर्द, लगातार कब्ज या दस्त, वजन तेजी से घटना, उल्टी या मल में खून जैसी शिकायतों के साथ हो, तो घरेलू प्रयोग रोककर डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
कई बार ये लक्षण किसी बड़ी अंदरूनी समस्या के संकेत भी हो सकते हैं, और सिर्फ आटा बदलकर समय गंवाना ठीक नहीं होता। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, किसी इलाज का दावा नहीं है।
एक व्यावहारिक बात और है। रोटी के साथ भारी, तली हुई या बहुत मसालेदार सब्जी भी पेट पर बोझ बढ़ाती है, इसलिए बदलाव की शुरुआत हल्के खाने से करें। रात का खाना सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाएं, ताकि खाना पेट में रखा हुआ महसूस न हो। अगर आटे का मिश्रण आपकी दिनचर्या में आसानी से बैठ जाए, तो वही इसका असली लाभ है, क्योंकि टिकाऊ आदत ही धीरे-धीरे शरीर में फर्क दिखाती है, एक दिन का प्रयोग नहीं।