धूप में रखा पानी पीना कितना सही है? बर्तन की यह छोटी गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी
गर्मियों में अक्सर घरों की छत, बालकनी या आंगन में पानी की बोतलें और बर्तन धूप में रखे दिख जाते हैं। किसी ने बोतल भरकर धूप में छोड़ दी, किसी की टंकी पूरे दिन धूप झेलती है। ऐसे में सवाल उठता है कि धूप में रखा पानी पीना कितना सही है? कुछ लोग मानते हैं कि धूप से पानी शुद्ध हो जाता है, तो कुछ इसे पूरी तरह नुकसानदायक समझते हैं। सच इन दोनों के बीच का है। धूप में रखा पानी अपने आप जहरीला नहीं बन जाता, लेकिन गरम हुआ पानी, पुरानी गंदी बोतल और गलत बर्तन मिलकर स्वच्छता की समस्या जरूर खड़ी कर सकते हैं।
धूप में रखा पानी सबसे पहले गरम हो जाता है। गरम पानी पीने में अरुचिकर लगता है और प्यास ठीक से नहीं बुझती। इससे बड़ी बात स्वच्छता की है। यदि बोतल या बर्तन अंदर से गंदा हो, उसमें पुराना पानी जमा हो या मुंह खुला रखा हो, तो गरमी और नमी का माहौल जीवाणुओं के बढ़ने के लिए अनुकूल बन जाता है। धूप की तेज रोशनी कुछ हद तक सतह को प्रभावित करती है, लेकिन यह पानी को पूरी तरह शुद्ध करने का भरोसेमंद तरीका नहीं है।
पानी रखने के लिए बर्तन का चुनाव रोज की सेहत से जुड़ा फैसला है। मिट्टी का मटका पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है और धूप से दूर छांव में रखा जाए तो पानी देर तक ताजा रहता है।
सबसे पहला नियम है कि पीने के पानी का बर्तन रोज धोया जाए। सिर्फ खाली करके भर देना सफाई नहीं है; बोतल के मुंह और ढक्कन के किनारों पर जमी चिकनाहट ही गंध और गंदगी की जड़ होती है। दूसरा नियम, रखा हुआ पानी ज्यादा दिन तक न चलाएं; ताजा पानी रोज भरने की आदत सबसे सुरक्षित है। तीसरा, जिस पानी की शुद्धता पर संदेह हो, उसे उबालकर ठंडा करना या छानना साधारण और भरोसेमंद उपाय है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए रखे पानी में अतिरिक्त सावधानी रखें, क्योंकि उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है।