बैंक खाते में पैसा पड़ा रहने से कितना फायदा मिलता है? सेविंग अकाउंट और एफडी के ब्याज में अंतर समझें

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बैंक खाते में पैसा पड़ा रहना सुरक्षित लगता है। जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत मिल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खाते में पड़े पैसे पर कितना फायदा मिल रहा है। सेविंग अकाउंट में मिलने वाला ब्याज आम तौर पर कम होता है। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज अधिक मिलता है। दोनों के बीच का अंतर समझना आपकी बचत के लिए जरूरी है।

सेविंग अकाउंट का ब्याज दैनिक शेष राशि पर गिना जाता है और आम तौर पर तिमाही में खाते में जुड़ता है।

यह दर बैंक के अनुसार बदलती रहती है और सामान्य दिशा में 2.5 से 3 प्रतिशत के आसपास रहती है। इसका मतलब है कि खाते में पड़ा 1 लाख रुपये एक साल में लगभग 2,500 से 3,000 रुपये ब्याज देगा। यह रकम महंगाई के मुकाबले कम पड़ सकती है।

सेविंग अकाउंट और एफडी में ब्याज का अंतर

फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा एक तय समय के लिए जमा किया जाता है। इस पर मिलने वाला ब्याज सेविंग अकाउंट से अधिक होता है। दर बैंक और अवधि पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, अगर एफडी पर 6.25 प्रतिशत की दर से तिमाही चक्रवृद्धि पर 1 लाख रुपये एक साल के लिए जमा किए जाएं, तो लगभग 6,398 रुपये ब्याज मिल सकता है।

यह सेविंग अकाउंट के ब्याज से दोगुने से अधिक है।

लेकिन एफडी में पैसा तय समय तक बंधा रहता है। समय से पहले निकालने पर जुर्माना लग सकता है और ब्याज कम मिल सकता है। इसलिए जो पैसा लंबे समय तक जरूरत नहीं है, उसे ही एफडी में लगाना समझदारी है। रोजमर्रा के खर्च और आपातकालीन जरूरत के लिए पैसा सेविंग अकाउंट में रखना चाहिए।

टैक्स और सुरक्षा के नियम समझें

ब्याज पर टैक्स के नियम भी जानना जरूरी है। एफडी पर ब्याज के लिए धारा 194ए के तहत टीडीएस लगता है। सामान्य जमाकर्ताओं के लिए एक बैंक की सभी शाखाओं को मिलाकर 50,000 रुपये तक के ब्याज पर टीडीएस नहीं लगता।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1,00,000 रुपये है। पैन होने पर टीडीएस 10 प्रतिशत और पैन न होने पर 20 प्रतिशत लगता है। फॉर्म 15जी या 15एच जमा करके टीडीएस रुकवाया जा सकता है, लेकिन टैक्स की देनदारी खत्म नहीं होती।

सुरक्षा के लिहाज से जमा बीमा निगम एक बैंक में एक जमाकर्ता के सभी खातों को मिलाकर 5 लाख रुपये तक की सुरक्षा देता है। यह सुरक्षा खातों की संख्या बढ़ने से नहीं बढ़ती। इसलिए बड़ी रकम एक ही बैंक में रखने से पहले इस सीमा को समझ लें।

पैसे का सही बंटवारा कैसे करें

समझदारी यह है कि पैसे को जरूरत के हिसाब से बांटें।

रोजमर्रा के खर्च के लिए सेविंग अकाउंट, आपातकालीन कोष के लिए आसानी से निकलने वाला पैसा और लंबे समय के लिए एफडी। इससे न तो जरूरत के समय पैसा अटकेगा और न ही ब्याज का नुकसान होगा।

खाते में पैसा पड़ा रहना नुकसान नहीं है, लेकिन बिना सोचे पड़ा रहना ब्याज का नुकसान हो सकता है। समय-समय पर अपनी बचत की समीक्षा करें और बैंक की वर्तमान दरें जांचें। सही बंटवारा आपकी छोटी बचत को भी बेहतर बना सकता है।