सुबह उठते ही एड़ियों में तेज दर्द? इसे मामूली थकान न समझें, शरीर में किसी जरूरी विटामिन की कमी भी हो सकती है एक वजह

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रात भर आराम करने के बाद जब सुबह बिस्तर से पहला कदम जमीन पर पड़ता है, तो कई लोगों की एड़ी में तेज चुभन या खिंचाव वाला दर्द उठता है। कुछ कदम चलने के बाद दर्द धीरे-धीरे हल्का हो जाता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे मामूली थकान या गलत सोने की मुद्रा समझकर भूल जाते हैं। लेकिन जब यही सिलसिला हफ्तों तक रोज दोहराए, तो इसे टालना ठीक नहीं है। ध्यान रहे, एड़ी के दर्द का सीधा मतलब किसी विटामिन की कमी नहीं होता।

इसके पीछे कई सामान्य वजहें हो सकती हैं, और कमी की बात भी सिर्फ एक संभावना के रूप में ही कही जा सकती है, जिसकी पुष्टि बिना जांच के कोई नहीं कर सकता।

सुबह के पहले कदमों में ही एड़ी क्यों दुखती है

एड़ी के दर्द की सबसे आम वजह एड़ी से पंजे तक जाने वाली मोटी पट्टी में खिंचाव और कड़ापन माना जाता है। रात भर पैर आराम की मुद्रा में रहते हैं और यह पट्टी सिकुड़ी हुई रहती है। सुबह अचानक उस पर पूरा वजन पड़ता है, तो वही कड़ापन तेज दर्द के रूप में महसूस होता है। कुछ कदम चलने पर पट्टी ढीली पड़ती है और दर्द घट जाता है।

यही कारण है कि लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठने पर भी ऐसा दर्द उठ सकता है। दिन भर खड़े होकर काम करना, कठोर और सपाट तले वाले जूते-चप्पल पहनना, नंगे पैर सख्त फर्श पर चलना और शरीर का बढ़ा हुआ वजन भी एड़ी पर दबाव बढ़ाकर यह शिकायत पैदा करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ऊतकों का लचीलापन भी घटता है, जो इस दर्द को और बढ़ा सकता है।

कुछ मामलों में डॉक्टर एड़ी और हड्डियों के दर्द के साथ विटामिन डी या बी12 जैसी कमी की जांच भी कराते हैं, क्योंकि ये तत्व हड्डियों, मासपेशियों और नसों की सेहत से जुड़े होते हैं।

लेकिन यह समझना सबसे जरूरी है कि एड़ी का दर्द होना और शरीर में कमी होना दो अलग बातें हैं। दर्द देखकर अपने मन से किसी विटामिन की कमी तय कर लेना और बाजार से सप्लीमेंट शुरू कर देना सही तरीका नहीं है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में लिया गया सप्लीमेंट भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। कमी है या नहीं, इसका पता साधारण खून जांच से ही चलता है, और कौन सी जांच जरूरी है, यह आपकी पूरी स्थिति देखकर डॉक्टर ही बताएगा।

ऐसा दर्द रहे तो घर पर क्या करें और डॉक्टर को कब दिखाएं

हल्के और नए दर्द में कुछ सामान्य देखभाल से आराम मिल सकता है।

सुबह उठते ही बिस्तर पर ही पंजों को धीरे-धीरे अपने ओर खींचने का हल्का खिंचाव करना, नरम और गद्देदार तले वाले जूते पहनना, लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहने से बचना और दर्द वाले दिन एड़ी पर ज्यादा बोझ न डालना आम तौर पर मददगार माना जाता है। लेकिन इन्हें इलाज समझने की भूल न करें, ये सिर्फ अस्थाई आराम के उपाय हैं। अगर दर्द दो-तीन हफ्तों से ज्यादा बना रहे, तेज होता जाए, एड़ी में सूजन या लालिमा दिखे, पैर में सुन्नपन या झुनझुनी भी हो, चोट लगने के बाद दर्द शुरू हुआ हो या चलना ही मुश्किल हो जाए, तो देर किए बिना डॉक्टर को दिखाएं।
ऐसे मामलों में असली वजह का पता लगाकर ही सही इलाज संभव है। शरीर के संकेत सुनना समझदारी है, खुद डॉक्टर बन जाना नहीं। यह जानकारी सिर्फ जागरूकता के लिए है, इलाज के लिए नहीं।