यूपीआई से गलत दुकान पर पैसे चले गए? घबराएं नहीं, शिकायत का सही तरीका जान लें

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यूपीआई से भुगतान करना आज इतना आसान हो गया है कि कई बार एक छोटी सी जल्दबाजी में पैसा गलत दुकान या गलत व्यक्ति के खाते में चला जाता है। नंबर एक अंक गलत हो, नाम से मिलता-जुलता कोई और दुकानदार चुन लिया जाए या क्यूआर कोड गलत स्कैन हो जाए, वजह कुछ भी हो, पैसा गलत जगह पहुंचते ही घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय सही क्रम में कदम उठाना सबसे जरूरी है, क्योंकि शुरुआती कुछ घंटों में की गई सही कार्रवाई से पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

सबसे पहले यह समझ लें कि गलत खाते में गया पैसा अपने आप वापस नहीं आता। यूपीआई भुगतान तुरंत होता है, इसलिए पैसा पहुंचते ही वह सामने वाले के खाते में जुड़ जाता है। ऐसे में पैसा वापस पाने के लिए सामने वाले की सहमति और बैंक की प्रक्रिया दोनों की जरूरत होती है। जितनी जल्दी आप कार्रवाई करेंगे, उतना ही बेहतर रहेगा।

गलत दुकान पर पैसा जाते ही सबसे पहले क्या करें

पैसा गलत जाने का पता चलते ही सबसे पहले अपने भुगतान का पूरा रिकॉर्ड संभालकर रखें। अपने यूपीआई ऐप में जाकर लेनदेन का विवरण खोलें और उसका स्क्रीनशॉट लें।

इसमें लेनदेन की तारीख, समय, रकम और 12 अंकों का यूपीआई संदर्भ नंबर यानी यूटीआर जरूर दिखना चाहिए। इसके बाद अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट भी निकाल लें, ताकि भुगतान का सबूत आपके पास दो जगह मौजूद रहे। यही रिकॉर्ड आगे शिकायत के समय सबसे ज्यादा काम आएगा।

इसके बाद तुरंत उस दुकानदार से संपर्क करने की कोशिश करें, जिसे गलती से पैसा गया है। अगर दुकान आसपास ही है तो सीधे जाकर बात करें, और अगर दूर है तो उसके नंबर पर विनम्रता से पूरी बात बताएं। कई बार दुकानदार पैसा वापस करने के लिए तैयार हो जाता है, खासकर जब आपके पास भुगतान का साफ सबूत हो।

बातचीत के दौरान धैर्य बनाए रखें और किसी तरह की धमकी या दबाव से बचें, क्योंकि पैसा वापस पाने में सामने वाले का सहयोग ही सबसे तेज रास्ता है।

शिकायत का सही क्रम

अगर दुकानदार पैसा वापस नहीं करता या उससे संपर्क नहीं हो पाता, तो अगला कदम अपने बैंक और यूपीआई ऐप की सहायता टीम से संपर्क करना है। अपने बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करके पूरी घटना बताएं और लेनदेन का संदर्भ नंबर दें। साथ ही अपने यूपीआई ऐप के अंदर भी शिकायत दर्ज करें। शिकायत दर्ज करते समय सही तारीख, समय, रकम और गलत प्राप्तकर्ता का विवरण जरूर लिखें।

शिकायत का नंबर या संदर्भ संख्या संभालकर रखें, क्योंकि आगे की कार्रवाई में इसकी जरूरत पड़ेगी।

अगर बैंक की ओर से 30 दिन के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो आप भारतीय रिजर्व बैंक के एकीकृत लोकपाल के पास शिकायत कर सकते हैं। इसकी वेबसाइट पर शिकायत दर्ज की जा सकती है और हेल्पलाइन नंबर 14448 पर भी जानकारी ली जा सकती है। अगर आपको लगता है कि यह ठगी का मामला है, तो साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी तुरंत सूचना दें। याद रखें, पैसा पाने के लिए यूपीआई पिन की कभी जरूरत नहीं होती, इसलिए कोई भी व्यक्ति अगर पिन, पासवर्ड या ओटीपी मांगे तो उसे कभी न दें।

आगे से गलती से बचने के उपाय

गलत भुगतान से बचने का सबसे आसान तरीका है भुगतान से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और रकम दो बार जांचना। भुगतान करते समय जल्दबाजी न करें, खासकर जब रकम बड़ी हो। यूपीआई की सामान्य दैनिक सीमा 1 लाख रुपये है, इसलिए बड़ी रकम भेजते समय और भी ज्यादा सावधानी बरतें। पहली बार किसी दुकानदार को भुगतान करते समय छोटी रकम भेजकर जांच करना भी एक समझदारी भरा तरीका है।

इसके अलावा अपने यूपीआई ऐप में पुराने और भरोसेमंद दुकानदारों की सूची बनाकर रखें, ताकि हर बार नंबर टाइप करने की गलती न हो।

क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद भी स्क्रीन पर दिखने वाला नाम जरूर पढ़ें। यह छोटी सी आदत आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है। और सबसे जरूरी बात, अपने लेनदेन का रिकॉर्ड नियमित रूप से देखते रहें, ताकि कोई गलती हो भी जाए तो उसका पता तुरंत चल जाए और समय रहते सही कार्रवाई की जा सके।