शाम को घर के दरवाजे पर दीया जलाते ही बदल जाता है पूरा माहौल, जानिए इस पुरानी आदत के पीछे छिपी वजह

Newspoint

गांव हो या शहर, आज भी कई घरों में सूरज ढलते ही दरवाजे पर दीया रख दिया जाता है। शाम की उस हल्की रोशनी में shaam ko diya jalane ke fayde सिर्फ धार्मिक भावना तक सीमित नहीं माने जाते। दिनभर की भागदौड़ के बाद जब घर में दीये की लौ जलती है, तो माहौल अपने आप थोड़ा ठहर सा जाता है। काम से लौटे लोग और पढ़ाई में लगे बच्चे, सबके लिए यह कुछ पल रुककर सांस लेने जैसा होता है।

Hero Image

दरअसल, भारतीय घरों में दीया हमेशा से अंधेरे को हटाने का प्रतीक रहा है। शाम का समय दिन और रात के बीच का वह हिस्सा होता है, जब बाहर की रोशनी कम होने लगती है और थकान महसूस होने लगती है। ऐसे में एक छोटा सा दीया सिर्फ रोशनी नहीं देता, बल्कि मन को संकेत भी देता है कि अब दिन का शोर धीरे धीरे शांत हो रहा है।

शाम के समय दरवाजे पर रखा दीया क्यों माना जाता है घर की शांति की सबसे पुरानी निशानी

परंपरा में माना जाता है कि शाम को घर के मुख्य दरवाजे के पास दीया जलाने से घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है।

पुराने समय में जब बिजली नहीं होती थी, तब आंगन में रखा दीया आने जाने वालों के लिए सहारा भी बनता था। आज भले ही घरों में तेज बल्ब लगे हों, लेकिन मिट्टी या पीतल के दीये की नरम रोशनी आंखों को अलग ही सुकून देती है।

कई बुजुर्ग कहते हैं कि शाम की आरती के समय पूरा परिवार अगर कुछ मिनट एक जगह इकट्ठा हो जाए, तो आपसी बातचीत भी बढ़ती है। मोबाइल और टीवी के दौर में ये पांच मिनट घर वालों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं। जरूरी नहीं कि लंबी पूजा ही हो, शांत मन से जलाया गया एक दीया भी घर के माहौल को हल्का बना सकता है।

दीये की हल्की लौ से मन को मिलता है ठहराव, दिनभर की थकान भी लगती है कम

मन पर असर की बात करें तो रोज एक ही समय पर किया जाने वाला छोटा सा काम दिमाग को स्थिरता का एहसास देता है। शाम को दीया जलाना और कुछ पल शांत खड़े होना, एक तरह से दिन को सुकून से समेटने जैसा है। परंपरा में यह भी माना जाता है कि दीये की लौ की ओर कुछ क्षण देखने से मन की बेचैनी कम होती है। हालांकि इसे किसी चमत्कार की तरह नहीं, बल्कि एक शांत आदत के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

कई लोग शाम को तुलसी के पास दीया रखते हैं। तुलसी वाले हिस्से में हल्की रोशनी पड़ते ही आंगन या बालकनी का कोना सबसे शांत जगह बन जाता है।

वहां खड़े होकर कुछ देर शाम की हवा लेना भी मन को ताजा कर देता है। यही छोटे छोटे पल पूरे घर का वातावरण बदल देते हैं।

दीया जलाते समय इन छोटी बातों का रखें ध्यान, तभी घर में बनेगा सुकून भरा माहौल

दीया जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। दीये को हमेशा सुरक्षित जगह पर रखें, जहां पर्दा या कागज पास न हो। मिट्टी के दीये को इस्तेमाल से पहले थोड़ी देर पानी में भिगो देने से वह तेल कम सोखता है, यह घरों में बरसों से अपनाया जाने वाला तरीका है। बाती ज्यादा लंबी न रखें, वरना धुआं ज्यादा होगा।

आज की तेज जिंदगी में हर परंपरा को पुराने ढंग से निभाना आसान नहीं होता। ऐसे में नियम को बोझ बनाने की जरूरत नहीं है। घर के किसी सुरक्षित कोने में एक छोटा दीया, मन में अच्छी भावना और दो मिनट की शांति ही इस परंपरा का असली सार है। परंपरा में माना जाता है कि भावना साफ हो तो छोटी सी लौ भी घर में उजाला ले आती है।

अगर आपने यह आदत छोड़ दी है, तो आज शाम से ही दरवाजे या तुलसी के पास एक दीया रखकर देखिए। कुछ दिनों बाद वही समय पूरे घर के लिए सबसे सुकून भरा पल बन सकता है। दीये की यह लौ याद दिलाती है कि असली रोशनी सिर्फ बल्ब से नहीं आती, कभी कभी वह मन की शांति से भी बनती है।