शाम होते ही आंखों में जलन और भारीपन क्यों? मोबाइल की यह आदत आंखों को दिनभर थका रही है
दिन ठीक-ठाक गुजर जाता है। लेकिन शाम होते ही आंखें जैसे शिकायत करने लगती हैं — हल्की जलन, भारीपन और बार-बार आंखें मलने का मन। अगर आपके साथ भी रोज ऐसा होता है तो वजह अक्सर कोई बड़ी परेशानी नहीं, दिनभर इकट्ठा हुई स्क्रीन की थकान (evening eye strain screen time से जुड़ी आम शिकायत) हो सकती है। समझने वाली बात यह है कि यह थकान शाम को ही क्यों उभरकर सामने आती है।
दिनभर हम लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल के बीच घिरे रहते हैं।
आंखों की थकान जमा होती है। सुबह की तरोताजा आंखें शाम तक घंटों का काम झेल चुकी होती हैं। दूसरा कारण रोशनी का अंतर है — शाम को कमरे की रोशनी धीमी पड़ जाती है, लेकिन स्क्रीन की चमक वैसी ही तेज रहती है। इस अंतर से आंखों पर जोर और बढ़ जाता है।
कई लोग शाम को घर लौटकर टीवी या मोबाइल पर और समय बिताते हैं, ताकि दिन का तनाव उतर सके। मन तो बहल जाता है, लेकिन आंखों की थकान और गहरी हो जाती है। नतीजा — भारी पलकें, जलन और कभी-कभी सिर के अगले हिस्से में खिंचाव जैसा अहसास। यह क्रम रोज चले तो शाम का सुकून भी घटने लगता है।
शाम के बाद अपनाएं ये छोटे-छोटे बदलावराहत के लिए बड़े उपायों की जरूरत नहीं, छोटे बदलाव काम आ सकते हैं। काम के बीच-बीच में जानबूझकर पलकें झपकाएं और कुछ पल दूर की चीजों की तरफ देखें।
आंखों पर ठंडे पानी के हल्के छींटे देना या कुछ देर आंखें बंद करके बैठना भी तात्कालिक आराम दे सकता है। ध्यान रहे, कोई भी दवा या ड्रॉप बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल न करें। आंखें नाजुक होती हैं, घरेलू प्रयोगों में भी संयम जरूरी है।
कब हल्के में न लें आंखों की यह शिकायतअगर जलन और भारीपन रोज का नियम बन गया है, धुंधला दिखाई देने लगा है, तेज दर्द रहता है या रोशनी से ज्यादा परेशानी होती है, तो इसे सिर्फ थकान कहकर टालना ठीक नहीं।
आंखें पूरे दिन बिना शिकायत काम करती हैं। शाम को उन्हें थोड़ा सा ठहराव देना हमारी जिम्मेदारी है। स्क्रीन से थोड़ी दूरी और थोड़ी देर का आराम — यह छोटी सी देखभाल रोज की थकान को काफी हद तक हल्का कर सकती है।