दिन भर कुर्सी पर बैठकर अकड़ गई है कमर और गर्दन? शाम को घर पर बस ये हलकी स्ट्रेचिंग कर लीजिए, जकड़न होगी दूर

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शाम को घर लौटने के बाद सोफे पर बैठते ही अगर कमर भारी लगती है, गर्दन घुमाने में खिंचाव महसूस होता है और कंधे जैसे जाम हो गए हों, तो यह सिर्फ थकान नहीं है। दिन भर एक ही मुद्रा में बैठे रहने से शरीर धीरे धीरे उसी स्थिति में ढलने लगता है। ऐसे में shaam ko halki stretching ke fayde समझना ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि महंगे साधनों के बिना, घर के एक कोने में ही अकड़न को काफी हद तक ढीला किया जा सकता है।

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असल में दफ्तर हो, घर से काम हो या दुकान की कुर्सी, लंबे समय तक बैठना आज की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कई घंटे तक झुकी गर्दन, आगे की ओर झुके कंधे और बिना हिले बैठी कमर, शाम होते होते शरीर को सुस्त बना देते हैं। इसीलिए विशेषज्ञ अक्सर दिन के अंत में पाँच से दस मिनट शरीर को धीरे धीरे खोलने की सलाह देते हैं, ताकि दिन भर जमा तनाव रात की नींद पर भारी न पड़े।

दिन भर बैठे रहने से शाम को शरीर क्यों अकड़ जाता है?

जब हम लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं तो कुछ मांसपेशियाँ लगातार छोटी स्थिति में रहती हैं और कुछ बिल्कुल निष्क्रिय हो जाती हैं।

कूल्हों के आगे का हिस्सा, गर्दन के पीछे की मांसपेशियाँ और कंधों के आसपास का भाग इसी वजह से सख्त महसूस होने लगता है। वहीं पेट की मांसपेशियाँ कम इस्तेमाल होने से कमर पर बोझ बढ़ जाता है।

यह अकड़न एक दिन में नहीं बनती। रोज़ का वही ढर्रा शरीर की आदत बन जाता है। शाम की हलकी हरकत उसी आदत को तोड़ने का आसान तरीका है। इसमें न तेज़ दौड़ की ज़रूरत है, न भारी कसरत की। बस साँस के साथ धीरे धीरे खिंचाव, कुछ सेकंड रुकना और फिर ढीला छोड़ देना ही इसका मूल मंत्र है।

शाम को हलकी स्ट्रेचिंग के फायदे जो रोज़ महसूस किए जा सकते हैं

नियमित रूप से शाम को की गई हलकी स्ट्रेचिंग से कई लोगों को गर्दन और कंधों का भारीपन कम महसूस होता है। कमर के आसपास का खिंचाव ढीला होने से बैठने और लेटने दोनों में आराम मिल सकता है। कुछ लोगों को दिन भर की मानसिक थकान भी शरीर ढीला होते ही हलकी लगती है और मन नींद के लिए ज़्यादा शांत हो जाता है।

घर पर इसे करना इसलिए भी आसान है क्योंकि इसके लिए किसी खास तैयारी की ज़रूरत नहीं पड़ती। एक चटाई या साफ़ कालीन, ढीले कपड़े और थोड़ी सी जगह ही काफी है। गर्दन को धीरे धीरे दाएँ बाएँ झुकाना, कंधों को गोल घुमाना, पीठ को हलका मोड़ना और घुटनों को छाती की ओर आराम से लाना जैसे सरल अभ्यास शुरुआती लोगों के लिए भी सहज माने जाते हैं।

हर खिंचाव में झटका बिल्कुल न दें।

घर पर शुरुआत करते समय इन छोटी बातों का रखें पूरा ध्यान

शुरुआत हमेशा धीमी रखें। पहला हफ्ता सिर्फ पाँच मिनट का रखें, फिर धीरे धीरे समय बढ़ाएँ। जिस तरफ ज़्यादा खिंचाव महसूस हो, वहाँ ज़बरदस्ती न करें। खिंचाव उतना ही रखें जितने में हलकी खिंचाहट महसूस हो, तेज़ दर्द बिल्कुल नहीं। साँस रोकने की बजाय सामान्य साँस लेते रहें और हर मुद्रा में पंद्रह से तीस सेकंड तक आराम से रुकें।

यह भी समझना ज़रूरी है कि स्ट्रेचिंग कोई इलाज नहीं है। अगर कमर या गर्दन का दर्द लगातार बना रहे, दर्द हाथ या पैर तक फैलने लगे, सुन्नपन, झनझनाहट या कमज़ोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य अकड़न मानकर टालना ठीक नहीं है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर या प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह ज़रूर लें और उनकी देखरेख में ही आगे का अभ्यास तय करें।

कुल मिलाकर शाम के ये कुछ मिनट दिन भर की बैठी हुई थकान उतारने का सबसे सादा घरेलू तरीका बन सकते हैं। कंधों को ढीला छोड़ना और कमर को आराम देना सुनने में छोटी बात लगती है, लेकिन रोज़ की आदत बन जाए तो यही आदत आपको हलका महसूस करा सकती है।