अक्टूबर में अलमारी से निकाल लीजिए सर्दियों के कपड़े, वरना सीलन, फफूंद और बदबू कर देंगी बर्बाद, सही तरीका जान लीजिए

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अक्टूबर का महीना आते ही मौसम करवट लेने लगता है — सुबह-शाम की हवा में हल्की ठंडक घुलने लगती है और पंखे की जरूरत कम होने लगती है। यही वह समय है, जब समझदार गृहणियां अलमारी के उस कोने की तरफ देखती हैं, जहां मानसून की शुरुआत में सर्दियों के कपड़े तह करके रखे गए थे। इन दिनों ‘sardiyon kapde almari october’ गूगल पर खूब खोजा जा रहा है, क्योंकि हर कोई जानना चाहता है कि महीनों से बंद पड़े स्वेटर-जैकेट को सही तरीके से कैसे निकाला जाए।

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दरअसल बरसात के चार महीनों में बंद अलमारी के अंदर नमी, सीलन और फफूंद पनपने का पूरा मौका मिलता है। अगर अक्टूबर में ही कपड़ों की देखभाल कर ली जाए, तो दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की ठंड में न तो बदबूदार स्वेटर पहनना पड़ेगा और न ही दाग लगे जैकेट को देखकर पछताना पड़ेगा। थोड़ी सी समझदारी से आपके महंगे विंटर वियर सालों-साल नए जैसे बने रह सकते हैं।

सर्दियों के कपड़े निकालते ही सबसे पहले दिखाएं धूप: नमी का सबसे सस्ता इलाज

अलमारी से स्वेटर, जैकेट, शॉल और कंबल निकालते ही सबसे पहला काम है इन्हें तीन-चार घंटे की हल्की धूप दिखाना।

तेज दोपहर की धूप से बचें, क्योंकि ज्यादा तेज धूप ऊनी कपड़ों का रंग उड़ा सकती है — सुबह 9 से 11 बजे की धूप सबसे बेहतर मानी जाती है। धूप से कपड़ों में जमी नमी सूख जाती है, हल्की बदबू दूर होती है और फफूंद के बीजाणु भी नष्ट हो जाते हैं।

धूप दिखाते वक्त कपड़ों को उल्टा करके फैलाएं, ताकि रंग फीका न पड़े। कंबल और रजाई को डंडे से हल्के-हल्के पीटना भी अच्छा रहता है, इससे अंदर जमी धूल निकल जाती है। जिन कपड़ों में तेज बदबू आ रही हो, उन्हें एक दिन धूप में रखने के बाद ही अलमारी में वापस रखें।

नेफ्थलीन की गोलियां, नीम की पत्तियां और दाग-धब्बों का पूरा हिसाब

मानसून के बाद कपड़ों की तह खोलते ही नेफ्थलीन की गोलियों की जांच जरूर करें — अगर वे घिसकर छोटी हो गई हैं, तो नई गोलियां रख दें। नेफ्थलीन की तेज गंध जिन्हें पसंद न हो, वे सूखी नीम की पत्तियों की पोटली या लौंग के दाने कपड़ों के बीच रख सकते हैं; ये कीड़ों से भी बचाते हैं और तेज गंध भी नहीं छोड़ते।

दाग-धब्बों का हिसाब भी अक्टूबर में ही निपटा लें। हल्के दाग पर गुनगुने पानी में नींबू का रस या बेकिंग सोडा लगाकर कुछ देर रखें, फिर हल्के हाथों से धो लें। गहरे या पुराने दाग वाले कपड़ों को ड्राई क्लीन करा लेना ही समझदारी है।

स्वेटर पर जमी रुई की गुठलियों को रेजर या पिलिंग रिमूवर से साफ कर दें — स्वेटर एकदम नया जैसा दिखने लगेगा।

स्वेटर-जैकेट-रजाई को अलग-अलग जगह, सही तह के साथ व्यवस्थित रखें

सर्दियों के कपड़ों को वापस रखने का भी एक सही तरीका होता है। भारी स्वेटरों को हैंगर पर लटकाने की बजाय तह करके रखें, क्योंकि लटकाने से कंधों के पास खिंचाव आ जाता है। जैकेट के जिप और बटन पहले ही चेक कर लें — अटका हुआ जिप या टूटा बटन सर्दी की सुबह में बड़ी परेशानी बन सकता है। रजाई-कंबल के लिए वैक्यूम स्टोरेज बैग बेहतरीन विकल्प हैं, जिनसे जगह भी बचती है और नमी भी नहीं लगती।

बच्चों के पिछले साल के स्वेटर-जैकेट का साइज जरूर चेक कर लें, क्योंकि एक साल में बच्चों की लंबाई काफी बढ़ जाती है। छोटे पड़ गए कपड़े अभी से अलग कर दें, ताकि ठंड बढ़ने पर भागदौड़ न करनी पड़े। अक्टूबर में की गई यह छोटी सी तैयारी पूरे सर्दियों के मौसम को आरामदायक बना देगी — न कपड़े खराब होंगे, न जेब पर अचानक बोझ पड़ेगा।