ऑनलाइन ख़रीदारी से पहले रुक जाइए! वीकेंड सेल की ये 5 जांचें नहीं कीं तो जेब खाली होना तय
शुक्रवार की शाम है। हफ़्तेभर की दौड़-भाग के बाद हाथ में मोबाइल है और आंखों के सामने वीकेंड सेल के चमकते बैनर घूम रहे हैं। 70 प्रतिशत छूट, आखिरी कुछ घंटे, सिर्फ़ आज के लिए — ऐसे शब्द देखकर उंगली ख़ुद-ब-ख़ुद ख़रीदारी वाले बटन की ओर बढ़ जाती है। दरअसल, बिक्री का यह शोर ही सबसे बड़ी चाल होती है। इसीलिए कुछ भी ख़रीदने से पहले एक छोटी-सी weekend sale online shopping check वाली सूची दिमाग़ में तय कर लेना ही असली समझदारी है।
ज़्यादातर लोग सेल में वही एक ग़लती दोहराते हैं — पहले सामान चुनते हैं, हिसाब बाद में लगाते हैं। नतीजा यह होता है कि महीने के अंत में पता चलता है कि बचत के नाम पर ऐसी चीज़ें घर आ गईं, जिनकी ज़रूरत ही नहीं थी। नीचे दी गई 5 जांचें मुश्किल से 10 मिनट का समय लेंगी, लेकिन शुक्रवार शाम की यह छोटी-सी सावधानी पूरे वीकेंड का बजट बचा सकती है।
छूट के बड़े दावों के पीछे छिपी असली क़ीमत पहले परखेंसबसे पहले यह जांचें कि दिख रही छूट असली है भी या नहीं। कई बार सेल से ठीक पहले किसी सामान की क़ीमत बढ़ाकर लिख दी जाती है, फिर उसी पर बड़ी छूट का ठप्पा लगा दिया जाता है।
दूसरी जांच कुल ख़र्च की है। सामान सस्ता दिख सकता है, लेकिन ढुलाई शुल्क और बाक़ी छोटे-छोटे शुल्क जुड़ते ही सौदा महंगा पड़ जाता है। कई बार मुफ़्त ढुलाई पाने के लालच में लोग ज़बरदस्ती टोकरी में एक-दो चीज़ें और डाल देते हैं, जिससे बचत की जगह उल्टा ज़्यादा ख़र्च हो जाता है।
तीसरी और सबसे ज़्यादा अनदेखी होने वाली जांच वापसी की शर्तों की है। सेल में ख़रीदी गई कई चीज़ों पर वापसी की सुविधा होती ही नहीं, सिर्फ़ आकार या रंग बदलने का विकल्प मिलता है। कुछ वर्गों में तो एक बार ख़रीद लेने के बाद कुछ बदलना संभव ही नहीं होता। कपड़े, जूते और घरेलू सामान में आकार का धोखा बहुत आम है। इसलिए भुगतान से पहले वापसी और बदलाव की शर्तें ठीक से पढ़ लें, ताकि ग़लत सामान बाद में अलमारी के किसी कोने में पड़ा न रहे।
चौथी जांच सामान से नहीं, ख़ुद से है। जो चीज़ पसंद आए, उसे टोकरी में डालकर पूरे 1 दिन के लिए वहीं छोड़ दें। शुक्रवार की शाम का उत्साह शनिवार तक ठंडा पड़ जाता है, और तब साफ़ दिखने लगता है कि कौन-सी चीज़ सच में चाहिए थी और कौन-सी बस सेल के शोर में भा गई थी। जो चीज़ अगले दिन भी उतनी ही ज़रूरी लगे, वही असली ज़रूरत है। बाक़ी सामान टोकरी से हटाते समय हल्कापन महसूस होगा, पछतावा बिल्कुल नहीं।
सूची से बाहर की ख़रीद पर पहले से रोक लगा लेंपांचवीं जांच अनुशासन की है।
आख़िर में इतना ही समझ लीजिए — सेल हर हफ़्ते आती है, कभी वीकेंड के नाम पर तो कभी त्योहार के नाम पर। सामान कम ख़रीदें या ज़्यादा, उसके ज़रूरत का होना ही उसकी सही क़ीमत है।