हर घर में एक छोटी सी दवाओं की अलमारी या डिब्बा जरूर होता है। बुखार, सिरदर्द, पेट की तकलीफ या किसी पुरानी बीमारी की दवाएं अक्सर इसी में रखी जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अलमारी की पूरी जांच की है? कई बार हम दवाएं खरीदकर रख देते हैं और फिर भूल जाते हैं कि उनकी इस्तेमाल की तारीख कब निकल गई। एक्सपायरी दवाएं सिर्फ बेअसर नहीं होतीं, बल्कि गलत तरीके से फेंकने पर घर के लोगों, बच्चों और पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हो सकती हैं।
इसलिए यह जानना जरूरी है कि ऐसी दवाओं का क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
दवा की एक्सपायरी तारीख का मतलब होता है कि उस तारीख तक दवा को तय मानकों के अनुसार सुरक्षित और असरदार माना जाता है। इसके बाद दवा का असर कम हो सकता है, उसका रंग, गंध या बनावट बदल सकती है। दवा का असर कम होने पर बीमारी ठीक होने की बजाय बढ़ भी सकती है, और कुछ दवाओं में समय के साथ ऐसे बदलाव आ सकते हैं जो शरीर के लिए ठीक नहीं होते। इसलिए एक्सपायरी तारीख निकलने के बाद किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
एक्सपायरी दवा को पहचानने के संकेत
सबसे पहला काम है हर 3 से 6 महीने में एक बार अपनी दवाओं की अलमारी की जांच करना। हर डिब्बे, पत्ते और बोतल पर लिखी तारीख को ध्यान से देखें। तारीख अक्सर डिब्बे के किनारे या नीचे लिखी होती है। अगर तारीख धुंधली हो गई है या पढ़ी नहीं जा रही है, तो उस दवा को इस्तेमाल न करना ही सुरक्षित रहेगा। गोली टूटी हुई, चिपचिपी या बदरंग दिखे, सिरप गाढ़ा हो गया हो या उसमें कुछ जमा हुआ दिखे, तो ऐसी दवा को भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, भले ही उसकी तारीख बाकी हो।
एक और जरूरी बात यह है कि दवाओं को हमेशा उनके असली डिब्बे या पत्ते में ही रखें।
कई लोग गोलियां निकालकर किसी आम डिब्बे में रख देते हैं, जिससे यह पता नहीं चलता कि कौन सी दवा कब तक इस्तेमाल की जा सकती है। नाम और तारीख के बिना रखी दवा को पहचानना मुश्किल हो जाता है और गलती से गलत दवा लेने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दवाओं को हमेशा उनके मूल पैक में, नाम और तारीख के साथ ही संभालकर रखें।
गलत तरीके से फेंकने के नुकसान
एक्सपायरी दवाओं को सीधे कूड़ेदान में फेंक देना सबसे आम गलती है। खुले कूड़े में पड़ी दवाएं बच्चों या पालतू जानवरों के हाथ लग सकती हैं, जो उनके लिए खतरनाक हो सकता है।
इसके अलावा दवाएं नाली या शौचालय में बहाने से पानी और मिट्टी में रसायन मिल सकते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कुछ दवाएं ऐसी होती हैं जिनका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है, इसलिए उन्हें खुले में फेंकना किसी और के लिए भी जोखिम बन सकता है। यही वजह है कि दवाओं के निपटान में थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
सही तरीके से निपटान कैसे करें
एक्सपायरी दवाओं के निपटान का सबसे सुरक्षित तरीका है उन्हें किसी और चीज में मिलाकर, पहचान छिपाकर, बंद थैली में डालकर फेंकना। गोलियां और कैप्सूल किसी पुराने अखबार या गत्ते में लपेटकर, फिर एक मजबूत थैली में बंद करके फेंकें।
सिरप जैसी तरल दवाओं को भी किसी सोखने वाली चीज में मिलाकर थैली में बंद करना बेहतर रहता है। इससे कोई बच्चा या जानवर गलती से भी उन तक नहीं पहुंच पाएगा। दवा के डिब्बे पर लिखा आपका नाम या निजी जानकारी भी फेंकने से पहले हटा दें या काट दें, ताकि आपकी निजी जानकारी किसी और के हाथ न लगे।
कुछ शहरों में दवा की दुकानों या स्वास्थ्य केंद्रों पर पुरानी दवाएं वापस लेने की व्यवस्था भी होती है। अगर आपके आसपास ऐसी सुविधा है, तो वहीं दवाएं जमा करना सबसे अच्छा तरीका है। नहीं तो ऊपर बताया गया तरीका अपनाएं।
एक और जरूरी आदत यह है कि दवाएं खरीदते समय ही सिर्फ उतनी मात्रा लें जितनी जरूरत हो। जरूरत से ज्यादा दवा जमा करने से ही एक्सपायरी का सामान बढ़ता है। घर आकर दवाओं को ठंडी, सूखी और बच्चों की पहुंच से दूर जगह पर रखें। थोड़ी सी सावधानी से आप अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं और पर्यावरण की भी रक्षा कर सकते हैं।