घर में रखे प्लास्टिक के डिब्बे कब इस्तेमाल के लायक नहीं रहते? इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

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रसोई में रखे प्लास्टिक के डिब्बे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। दाल, चावल, मसाले, बचा हुआ खाना और नाश्ते की चीजें, सब कुछ इन्हीं डिब्बों में रखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि सालों से इस्तेमाल हो रहा डिब्बा धीरे-धीरे अपनी हालत खो देता है। उसका रंग बदल जाता है, उसमें खरोंचें आ जाती हैं और ढक्कन ठीक से बंद होना बंद हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्लास्टिक के डिब्बे कब इस्तेमाल के लायक नहीं रहते और उन्हें कब बदल देना चाहिए।

अक्सर लोग डिब्बे को तब तक इस्तेमाल करते रहते हैं जब तक वह टूट न जाए। लेकिन टूटना ही एकमात्र संकेत नहीं है। डिब्बे की हालत से जुड़े कई छोटे-छोटे संकेत पहले ही बता देते हैं कि अब उसे बदलने का समय आ गया है। इन संकेतों को नजरअंदाज करना सेहत और खाने की गुणवत्ता दोनों के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसलिए डिब्बों की नियमित जांच करना एक अच्छी आदत है।

रंग बदलना और दाग लगना पहला संकेत है

अगर प्लास्टिक के डिब्बे का रंग पीला पड़ने लगा है या उसमें ऐसे दाग लग गए हैं जो धोने के बाद भी नहीं जाते, तो यह पहला संकेत है। हल्दी, तेल और मसालों के दाग आम तौर पर डिब्बों पर पड़ जाते हैं, लेकिन जब दाग स्थायी हो जाएं और डिब्बा देखने में गंदा लगने लगे, तो समझ लें कि उसकी सतह अब पहले जैसी नहीं रही। ऐसी सतह पर बैक्टीरिया के पनपने की आशंका बढ़ जाती है।

खरोंचें और ढक्कन का ढीला होना भी नजरअंदाज न करें

डिब्बे के अंदर गहरी खरोंचें दिखने लगें तो उसे बदल देना चाहिए। खरोंचों वाली जगहों पर सफाई ठीक से नहीं हो पाती और वहां नमी व खाने के कण जमा हो सकते हैं। बार-बार चम्मच या कांटे से खुरचने पर भी डिब्बे की सतह खराब होती है। इसलिए गहरी खरोंचों वाले डिब्बों को रोजमर्रा के इस्तेमाल से हटा देना बेहतर है।

ढक्कन का ठीक से बंद न होना भी एक बड़ा संकेत है। अगर ढक्कन ढीला हो गया है या उसका रबर खराब हो गया है, तो डिब्बा हवा से सुरक्षित नहीं रहता। इससे खाना जल्दी खराब हो सकता है और फ्रिज में रखी दूसरी चीजों की गंध भी उसमें मिल सकती है। कई बार ढक्कन के कोनों में दरार आ जाती है, जो शुरुआत में नजर नहीं आती। इसलिए ढक्कन को समय-समय पर ध्यान से देखें।

गर्म खाने और माइक्रोवेव से जुड़ी सावधानी

प्लास्टिक के डिब्बों में बहुत गर्म खाना डालने से भी उनकी उम्र कम होती है। तेज गर्मी से डिब्बा टेढ़ा हो सकता है या उसकी सतह नरम पड़ सकती है। अगर डिब्बा गर्मी के कारण अपना आकार बदल चुका है, तो उसे इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए। ऐसे डिब्बे में ढक्कन भी ठीक से नहीं बैठता।

इसी तरह माइक्रोवेव में इस्तेमाल के लिए बने डिब्बों पर ही भरोसा करें। हर प्लास्टिक का डिब्बा माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित नहीं होता। डिब्बे के नीचे बने निशान और निर्देश देखें। अगर निर्देश मिट गए हैं या डिब्बा पुराना हो गया है, तो उसे गर्म करने के काम में न लाएं। सामान्य तौर पर डिब्बों को धूप में लंबे समय तक रखना भी ठीक नहीं माना जाता, क्योंकि धूप से प्लास्टिक कमजोर हो सकता है।

डिब्बे कब बदलें और पुराने डिब्बों का क्या करें

कोई एक तय समय सीमा हर डिब्बे पर लागू नहीं होती, क्योंकि यह इस्तेमाल की आदत और गुणवत्ता पर निर्भर करता है। लेकिन आम तौर पर जब डिब्बा पीला पड़ जाए, उसमें गहरी खरोंचें आ जाएं, गंध न जाए, ढक्कन ढीला हो जाए या आकार बदल जाए, तो उसे बदल देना चाहिए। एक साथ सारे डिब्बे बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि खराब हालत वाले डिब्बों को धीरे-धीरे हटाएं।

पुराने डिब्बों को फेंकने के बजाय उन्हें गैर-खाद्य कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे बटन, पिन या छोटे सामान रखना। लेकिन खाने की चीजों के लिए हमेशा साफ, मजबूत और अच्छी हालत वाले डिब्बों का ही इस्तेमाल करें। डिब्बे खरीदते समय अच्छी गुणवत्ता वाले और खाने के लिए सुरक्षित माने जाने वाले डिब्बे चुनें। नियमित सफाई, पूरी तरह सुखाना और सही रखरखाव डिब्बों की उम्र बढ़ा सकता है। छोटी सी सावधानी से रसोई भी साफ रहेगी और खाना भी सुरक्षित रहेगा।