सब कुछ अपनी जगह पर है, फिर भी सामान नहीं मिलता? छोटी जगह के लिए 5 स्मार्ट तरीके आजमाएं

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अजीब बात है, छोटे घर में हर चीज की जगह तय होती है, फिर भी जरूरत के समय कैंची, चार्जर या दवा कहीं नहीं मिलती। असल में समस्या अक्सर जगह की कमी नहीं होती, समस्या यह होती है कि चीजें अपनी जगह लौटती ही नहीं या उनकी जगह इतनी अव्यवस्थित होती है कि आंखों के सामने होकर भी वे दिखती नहीं हैं। अच्छी खबर यह है कि इसके लिए न बड़ा घर चाहिए, न महंगे सामान। पांच सीधे-सादे तरीके आपकी रोज की यह परेशानी काफी हद तक खत्म कर सकते हैं।

दीवारों का खड़ा इस्तेमाल और हर चीज का तय इलाका

पहला तरीका है दीवारों का खड़ा यानी वर्टिकल इस्तेमाल। छोटे घरों में फर्श और अलमारी जल्दी भर जाते हैं, लेकिन दीवारें अक्सर खाली रहती हैं। दरवाजे के पीछे हुक, रसोई की दीवार पर रेल और बिस्तर के ऊपर हल्की शेल्फ लगाकर बहुत सा सामान फर्श से उठाया जा सकता है। दूसरा तरीका है हर श्रेणी की चीजों का एक तय इलाका यानी जोन बनाना। दवाएं सिर्फ एक डिब्बे में, औजार सिर्फ एक जगह, कागजात सिर्फ एक फाइल में। जब मस्तिष्क को पता होता है कि किस श्रेणी की चीज कहां मिलेगी, तो खोज पूरे घर में नहीं, सिर्फ उस इलाके में होती है।

तीसरा तरीका है पारदर्शी डिब्बे और उन पर नाम की पर्ची। ढक्कन खोले बिना अंदर का सामान दिखे और नाम पढ़कर तुरंत पहचान हो, तो चीज निकालना और रखना दोनों आसान हो जाते हैं।

एक अंदर एक बाहर का नियम और रोज के 5 मिनट

चौथा तरीका है एक अंदर तो एक बाहर का नियम। जब भी घर में कोई नई चीज आए, उसी श्रेणी की कोई पुरानी या बेकार चीज बाहर करें, दान दें या हटा दें। इससे छोटा घर धीरे-धीरे भरने से बचा रहता है। पांचवां और सबसे असरदार तरीका है रोज के 5 मिनट की वापस-रख आदत। रात को सोने से पहले या सुबह निकलने से पहले सिर्फ 5 मिनट में बिखरी चीजों को उनके इलाके में लौटा दें।

यह छोटा सा नियम हफ्तेभर की बड़ी सफाई से ज्यादा काम करता है। याद रखिए, व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। घर के सभी लोग एक ही तय जगह का सम्मान करें, तभी ये तरकीबें चलती हैं। शुरुआत महंगे आयोजक डिब्बों से करने की जरूरत नहीं, घर में पड़े पुराने डिब्बों, टोकरियों और डिबियों से ही पहले हफ्ते आजमाकर देखें।

आदत बदलते ही छोटा घर भी बड़ा लगने लगेगा

इन तरीकों को एक साथ लागू करने की जल्दबाजी न करें। पहले हफ्ते सिर्फ एक इलाका चुनें, जैसे दवाओं का डिब्बा या रसोई का एक कोना, और उसे पूरी तरह दुरुस्त करें।

सफलता दिखेगी तो घर के बाकी लोग भी अपने आप जुड़ते जाएंगे। बच्चों को भी उनकी चीजों का इलाका तय करके दें, छोटी उम्र की आदत जिंदगी भर काम आती है। धीरे-धीरे आप पाएंगे कि सामान गुम होना अपवाद बन गया है, रोज की बात नहीं। छोटा घर वाकई छोटा तब लगता है जब चीजें बेकाबू हों, व्यवस्था हाथ में आते ही वही घर खुला और हल्का महसूस होने लगता है।